राहुल गांधी की वो 'सीक्रेट मीटिंग', जिसने 2009 में रोक दी विजय की कांग्रेस में एंट्री?
साल 2009 में राहुल गांधी और विजय की गुपचुप मुलाकात ने तमिल राजनीति का बड़ा मोड़ तय किया. जानिए क्यों रुक गई विजय की कांग्रेस एंट्री. चुनाव बाद देनों अचानक कैसे आ गए सेम ट्रैक पर. राहुल गांधी ने डीएमसे दूरी बनाने का क्यों लिया फैसला?
टीवीके प्रमुख सी जोसेफ विजच आज तमिलनाडु की राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में गिने जा रहे हैं. उनकी पार्टी TVK को लेकर राज्य की राजनीति में नई हलचल है और भविष्य में सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब विजय सीधे कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे. अगर 2009 में दिल्ली में हुई एक मुलाकात का परिणाम अलग होता, तो शायद आज तमिल राजनीति की तस्वीर भी अलग होती.
उस दौर में केंद्र में UPA सरकार दोबारा सत्ता में लौटी थी और राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे थे. वे खास तौर पर यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई को मजबूत करने में लगे थे. इसी समय विजय अपने पिता एस ए चंद्रशेखर और कांग्रेस नेता गोपीनाथ पलानियप्पन के साथ दिल्ली पहुंचे. उनका उद्देश्य कांग्रेस के साथ राजनीतिक जुड़ाव बनाना था.
क्या सिर्फ सदस्य बनना चाहते थे विजय?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विजय की मांग बहुत बड़ी नहीं थी. वे न तो चुनाव लड़ने की शर्त रख रहे थे और न ही किसी पद की मांग कर रहे थे. वे सिर्फ कांग्रेस के सदस्य के रूप में जुड़ना चाहते थे. उस समय विजय तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो चुके थे और उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही थी.
कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं को लग रहा था कि विजय जैसे बड़े स्टार को पार्टी से जोड़ना दक्षिण भारत में बड़ा राजनीतिक फायदा दे सकता है. खासकर तमिलनाडु जैसे राज्य में, जहां फिल्म और राजनीति का रिश्ता बेहद पुराना रहा है.
राहुल गांधी ने क्या शर्त रखी?
बताया जाता है कि राहुल गांधी ने विजय को सीधे पार्टी में बड़ी भूमिका देने के बजाय संगठनात्मक राजनीति का रास्ता सुझाया. उन्होंने कहा कि अगर वे राजनीति में गंभीर हैं, तो पहले यूथ कांग्रेस के चुनाव लड़कर खुद को साबित करें. साथ ही उन्होंने वार्ड स्तर पर चुनाव लड़ खुद को साबित करने को भी कहा था.
यहीं से पूरा मामला बदल गया. विजय एक स्थापित फिल्म स्टार थे और वे शायद सीधे संगठनात्मक छात्र राजनीति के रास्ते खुद को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे. कांग्रेस का यह मॉडल उन्हें उतना आकर्षक नहीं लगा. इसके बाद वे चेन्नई लौट गए और उनकी राजनीतिक एंट्री फिलहाल टल गई.
क्या DMK भी नहीं चाहती थी विजय की एंट्री?
उस समय कांग्रेस तमिलनाडु में द्रविड़ मुनंत्र कड़गम यानी DMK की सहयोगी थी. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि DMK नहीं चाहती थी कि कांग्रेस किसी ऐसे बड़े तमिल स्टार को अपने साथ जोड़े, जो भविष्य में राज्य की राजनीति में स्वतंत्र शक्ति केंद्र बन सकता हो. हालांकि, इसका कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया, लेकिन तमिल राजनीति को समझने वाले कई विश्लेषक मानते हैं कि विजय की लोकप्रियता उस समय भी इतनी बड़ी थी कि उनका कांग्रेस में आना DMK के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता था.
क्या कांग्रेस ने एक बड़ा मौका गंवा दिया?
आज जब विजय की पार्टी TVK तमिलनाडु में तेजी से उभरती दिख रही है, तब 2009 की वह मुलाकात फिर चर्चा में है. कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि अगर विजय उस समय पार्टी में शामिल हो जाते, तो शायद वे भी पार्टी सिस्टम में सीमित होकर रह जाते और आज जैसा स्वतंत्र जनाधार नहीं बना पाते.
दूसरी तरफ यह भी तर्क दिया जा रहा है कि कांग्रेस ने दक्षिण भारत में एक बड़े जनाधार वाले चेहरे को समय रहते अपने साथ जोड़ने का अवसर गंवा दिया.
17 साल बाद फिर क्यों बढ़ रही गठबंधन की चर्चा?
अब जब TVK तमिल राजनीति में नई ताकत बनती दिख रही है, तब कांग्रेस और विजय के संभावित गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है. विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर का हालिया बयान भी इसी ओर इशारा करता है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस को विजय के साथ आने की सलाह दी.
तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के बीच अब नई राजनीतिक जगह बनती दिख रही है. ऐसे में कांग्रेस भी राज्य में अपनी खोई जमीन तलाश रही है, जबकि विजय खुद को पारंपरिक द्रविड़ दलों के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं. यही वजह है कि 2009 की अधूरी राजनीतिक कहानी 17 साल बाद फिर सुर्खियों में लौट आई है.
समझें राहुल ने विजय का क्यों किया खुला समर्थन
कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने विजय और खुद की मुलाकात का एक फोटो शेयर करते याद दिलाया है कि क्यों, टीवीके को सरकार बनाने के लिए राहुल गांधी ने अचानक समर्थन दे दिया. उन्होंने अपने पोस्ट में बताया है कि ये बात ये 12 से 13 साल पुरानी फोटो है जिसमें NSUI के तत्कालीन राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ विजय थलपती कंधे से कंधा मिलाकर विजय खड़े हैं और उसमें मैं भी हूं!




