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SC के फर्जी दस्तावेज से रिहाई, नियम तोड़कर पैरोल और कैदी की पत्नी का यौन शोषण; आरोपी DIG को पुलिस ने किया गिरफ्तार

कर्नाटक के कलबुर्गी जेल क्षेत्र के DIG सोमशेखर को 2018 में फर्जी सुप्रीम कोर्ट दस्तावेजों के आधार पर उम्रकैद की सजा काट रहे हत्या के दोषी को जेल से रिहा कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. उन पर दोषी की पत्नी के यौन शोषण और नियमों के विपरीत पैरोल देने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

Karnataka DIG Somashekhar Arrested Over Fake Supreme Court Documents, Convict Release Case
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Karnataka DIG Somashekhar

( Image Source:  x.com/prajwaldza )

कर्नाटक की जेल व्यवस्था से जुड़े एक पुराने मामले में बड़ा पुलिस एक्शन हुआ है. कलबुर्गी जोन के पुलिस (Prisons) DIG सोमशेखर को एक हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी को कथित तौर पर फर्जी सुप्रीम कोर्ट दस्तावेजों के आधार पर जेल से रिहा कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने उन पर कैदी की पत्नी के यौन शोषण समेत कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं.

सोमशेखर को इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के DCP एम. नारायण के नेतृत्व वाली विशेष टीम ने गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, वह 2018 में बेंगलुरु सेंट्रल जेल, परप्पना अग्रहारा के मुख्य अधीक्षक थे. इसी दौरान हत्या के दोषी शंकर की कथित अवैध रिहाई का मामला सामने आया था. सोमशेखर को सोमवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया.

फर्जी Supreme Court दस्तावेज से कैसे हुई उम्रकैदी की रिहाई?

  • पूरे मामले की जांच उस कार्रवाई से आगे बढ़ी, जिसमें बेंगलुरु सेंट्रल जेल से जुड़े सेकेंड डिवीजन असिस्टेंट (SDA) श्रीकांत को पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था. उस पर आरोप है कि उसने 2018 में हत्या के दोषी शंकर की रिहाई के लिए फर्जी सुप्रीम कोर्ट दस्तावेज तैयार किए या पेश किए.
  • इन दस्तावेजों के आधार पर शंकर को जेल से बाहर कर दिया गया था. बाद में शिकायत और विभागीय जांच शुरू हुई. पुलिस के अनुसार, शंकर को इसी साल अगस्त में दोबारा गिरफ्तार किया गया.
  • जांच के दौरान 2018 में कैदी अनुभाग में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लिए गए. पुलिस का दावा है कि इन बयानों से यह सामने आया कि शंकर की रिहाई सीधे सोमशेखर के आदेश पर हुई थी.
  • जांच एजेंसी का आरोप है कि सोमशेखर को पेश किए गए सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी थी. इसके बावजूद उन्होंने कथित तौर पर कैदी की रिहाई को मंजूरी दी.

DIG पर कैदी की पत्नी के यौन शोषण का भी आरोप

मामला सिर्फ कथित फर्जी दस्तावेजों और अवैध रिहाई तक सीमित नहीं है. सोमवार को अदालत में दाखिल पुलिस के रिमांड आवेदन में सोमशेखर पर शंकर की पत्नी के यौन शोषण के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. यह आरोप जांच का एक अलग और संवेदनशील पहलू है. फिलहाल ये पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप हैं और मामले की जांच जारी है.

उम्रकैदी को तीन बार मिली 15-15 दिन की पैरोल

पुलिस के रिमांड आवेदन में सोमशेखर पर जेल नियमों को दरकिनार कर शंकर को फायदा पहुंचाने के कई आरोप भी लगाए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, शंकर पहले पैरोल के दौरान फरार हो चुका था. इसके बावजूद 2018 में उसे तीन अलग-अलग मौकों पर 15-15 दिन की पैरोल मंजूर की गई. जांच एजेंसी का कहना है कि जेल स्टाफ की ओर से रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज थीं और इन टिप्पणियों के आधार पर शंकर पैरोल के लिए पात्र नहीं माना जा रहा था. इसके बावजूद कथित तौर पर उसे पैरोल दी गई.

पैरोल सत्यापन में भी सामने आया संदिग्ध फोन नंबर

जांच में पैरोल प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड भी पुलिस के संदेह के घेरे में आए हैं. पुलिस के अनुसार, पैरोल मंजूर करते समय आधिकारिक रिकॉर्ड में यह दर्ज किया गया कि शंकर की जानकारी का सत्यापन चंद्रा लेआउट पुलिस स्टेशन के फोन नंबर 23390847 पर कॉल करके किया गया था, लेकिन जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि यह नंबर चंद्रा लेआउट पुलिस स्टेशन का था ही नहीं. इससे जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि पैरोल से पहले अनिवार्य पुलिस सत्यापन वास्तव में हुआ भी था या रिकॉर्ड में उसे सिर्फ दिखाया गया.

2018 की जेल व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने 2018 में बेंगलुरु सेंट्रल जेल में कैदियों की रिहाई और पैरोल प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं. एक तरफ फर्जी सुप्रीम कोर्ट दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप है, वहीं दूसरी तरफ उसी कैदी को बार-बार पैरोल दिए जाने और सत्यापन रिकॉर्ड में संदिग्ध फोन नंबर दर्ज होने की बात सामने आई है.

अब पुलिस की जांच का फोकस यह पता लगाने पर होगा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने में कौन-कौन लोग शामिल थे, जेल स्तर पर किस-किस अधिकारी को इसकी जानकारी थी और कथित अवैध रिहाई तथा पैरोल मंजूरी की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी.

पुलिस हिरासत में हैं सोमशेखर

फिलहाल सोमशेखर पुलिस हिरासत में हैं. अदालत ने उन्हें 9 अक्टूबर तक कस्टडी में भेजा है. मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई के दौरान होगी.

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