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धरती से अंतरिक्ष तक भारत की दहाड़! ISRO का ‘बाहुबली’ रॉकेट हुआ लॉन्च, LVM3 ने दिखाया स्पेस पावर का दम

भारत ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि वह अब सिर्फ अंतरिक्ष दौड़ में भाग नहीं ले रहा, बल्कि उसका नेतृत्व कर रहा है. इसरो (ISRO) ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3, जिसे ‘बाहुबली रॉकेट’ कहा जाता है, को सफलतापूर्वक लॉन्च कर इतिहास रच दिया है.

धरती से अंतरिक्ष तक भारत की दहाड़! ISRO का ‘बाहुबली’ रॉकेट हुआ लॉन्च, LVM3 ने दिखाया स्पेस पावर का दम
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( Image Source:  x-@isro )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 2 Nov 2025 6:09 PM IST

भारत ने एक बार फिर अंतरिक्ष में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के ‘बाहुबली’ रॉकेट LVM3 के धमाकेदार लॉन्च ने देश की विज्ञान और तकनीक की ताकत को नई बुलंदियों तक पहुंचा दिया. 4,410 किलोग्राम वजनी यह कम्युनिकेशन सैटेलाइट भारतीय रॉकेट से अब तक छोड़ा गया सबसे भारी सैटेलाइट बन गया है.

धरती से अंतरिक्ष तक गूंजती इस सफलता ने हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. यह सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की उड़ान है.

‘बाहुबली’ रॉकेट से अंतरिक्ष की नई उड़ान

43.5 मीटर ऊंचा यह रॉकेट LVM3-M5, अपनी भारी क्षमता की वजह से ‘बाहुबली’ कहलाता है. ISRO के अनुसार, इस मिशन का उद्देश्य CMS-03 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित करना था, ताकि यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप और आस-पास के समुद्री इलाकों में संचार सेवाएं प्रदान कर सके. इस लॉन्च के साथ भारत ने भारी सैटेलाइट्स के लिए विदेशी लॉन्च वाहनों पर निर्भरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.

पहले फ्रांस करता था भारी सैटेलाइट लॉन्च

अब तक 4,000 किलोग्राम से अधिक वजनी सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के लिए ISRO को फ्रांस की Arianespace कंपनी की मदद लेनी पड़ती थी. ये लॉन्च फ्रेंच गयाना से होते थे, जिससे भारत को भारी खर्च उठाना पड़ता था. लेकिन अब LVM3 की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारत खुद भारी सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेज सकता है. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है.

CMS-03 सैटेलाइट के क्या होंगे फायदे

CMS-03 सैटेलाइट भारत की दूरसंचार और इंटरनेट सेवाओं को नई मजबूती देगा. यह सैटेलाइट देश के सुदूर और दुर्गम इलाकों में भी संचार और प्रसारण सेवाएं पहुंचाने में मदद करेगा. इसके अलावा यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसी सेवाओं में भी अहम भूमिका निभा सकता है. हालांकि ISRO ने इसकी सैन्य उपयोगिता पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सैटेलाइट निगरानी और स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन में भी काम आ सकता है.

LVM-3: भारत का ‘हेवी-ड्यूटी’ लॉन्च व्हीकल

LVM-3 जिसे पहले GSLV Mk-3 कहा जाता था, तीन चरणों वाला रॉकेट है. इसमें दो सॉलिड बूस्टर (S200), एक लिक्विड कोर स्टेज (L110) और एक क्रायोजेनिक स्टेज (C25) शामिल है. यह तकनीक पूरी तरह भारत में विकसित की गई है. LVM-3 अब 4,000 किलोग्राम तक के सैटेलाइट को GTO में और 8,000 किलोग्राम तक के सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पहुंचाने में सक्षम है.

इस ऐतिहासिक लॉन्च ने साबित कर दिया है कि भारत अब अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किसी भी बड़े देश से पीछे नहीं है. ISRO की यह सफलता न सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और तकनीकी आत्मविश्वास का भी प्रतीक बन गई है.

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