आम जनता को महंगाई का डबल झटका, सब्जी-फल समेत बढ़ेंगे दूध के दाम; एयरलाइंस पर भी बढ़ेगा दबाव
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3.08 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद आम आदमी की जेब पर असर दिखना शुरू हो सकता है. इसका प्रभाव खाद्य वस्तुओं, ट्रांसपोर्ट, खेती, एयर यात्रा और डिलीवरी सेवाओं तक देखने को मिलेगा.
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो गई है. शुक्रवार से लागू हुई इस बढ़ोतरी में दोनों ईंधनों की कीमत 3.08 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 98 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गई है, जबकि डीजल की कीमत 90 रुपये से ऊपर चली गई है. यह बढ़ोतरी कई हफ्तों से चल रही चर्चाओं और अटकलों को खत्म कर देती है. लोग सोच रहे थे कि जब दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, तो भारत सरकार इस बोझ को आम उपभोक्ताओं पर कितना डालेगी. अब यह फैसला आ गया है, लेकिन यह उतना तेज और भारी नहीं है जितना कई लोग डर रहे थे.
क्यों हुई यह बढ़ोतरी?
दरअसल, दुनिया के कई इलाकों में तनाव चल रहा है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट की वजह से तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इस इलाके से दुनिया का बहुत बड़ा तेल व्यापार होता है. ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं. ऐसे में यह आशंका जताई जा रही थी कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 10 रुपये या उससे भी ज्यादा बढ़ सकती हैं. लेकिन सरकार और तेल कंपनियों ने सोच-समझकर फैसला लिया. उन्होंने एकदम बड़ी छलांग नहीं लगाई. उन्होंने एक संतुलित रास्ता चुना ताकि लोगों पर महंगाई का झटका एक साथ न पड़े. एक्सपर्ट कह रहे हैं कि यह बढ़ोतरी उम्मीद से कम है, फिर भी आम आदमी के लिए चिंता की बात है.
3 रुपये की बढ़ोतरी क्यों मायने रखती है?
पहली नजर में 3 रुपये ज्यादा नहीं लगते. लेकिन ईंधन की कीमतों का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक ही नहीं रुकता. यह पूरे देश की अर्थव्यवस्था और आम जीवन को धीरे-धीरे प्रभावित करता है. डीजल को भारत के परिवहन का इंजन कहा जा सकता है. ट्रक, बस, ट्रैक्टर, सिंचाई पंप, जनरेटर और बड़े-बड़े माल ढोने वाले वाहन सब डीजल पर चलते हैं. जब डीजल महंगा होता है तो परिवहन का खर्च बढ़ जाता है. यह बढ़ा खर्च धीरे-धीरे हर चीज की कीमत में शामिल हो जाता है. पेट्रोल का असर तो सीधे उन लोगों पर पड़ता है जो रोज स्कूटी, बाइक या कार से काम पर जाते हैं. लेकिन डीजल का असर हर घर तक पहुंचता है क्योंकि रोज खाए जाने वाले सामान इसी परिवहन पर निर्भर करते हैं.
खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं
सबसे पहले असर फ़ूड आइटम्स पर दिखेगा. सब्जियां, फल, दूध, अनाज और पैकेटबंद खाना मुख्य रूप से ट्रकों से एक राज्य से दूसरे राज्य भेजा जाता है. अभी परिवहन वाले तुरंत किराया नहीं बढ़ाएंगे, लेकिन अगर डीजल महंगा बना रहा तो कुछ हफ्तों में वे मजबूर होकर माल ढुलाई दरें बढ़ा देंगे. इसका मतलब है कि बाजार में टमाटर, प्याज, आलू, दूध, खाना पकाने के लिए इत्सेमाल होने वाले तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें थोड़ी-थोड़ी महंगी होती जाएंगी. जैसे फल और दूध और ज्यादा प्रभावित होंगी क्योंकि इन्हें ठंडा रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड ट्रकों की जरूरत पड़ती है, जो सब ईंधन पर चलते हैं.
हवाई यात्रा और डिलीवरी महंगी
एयरलाइंस पर भी दबाव बढ़ेगा. जेट फ्यूल (एटीएफ) की कीमतें पहले से ही बहुत बढ़ गई हैं. एयरलाइंस शुरू में तो किराया नहीं बढ़ाएंगी ताकि यात्री कम न हों, लेकिन अगर तेल महंगा रहा तो घरेलू उड़ानों के टिकट महंगे हो सकते हैं. खासकर त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में यह असर ज्यादा दिखेगा. ऐप वाले खाने की डिलीवरी, ई-कॉमर्स और कैब सेवाओं पर भी असर पड़ेगा. स्विगी, जोमैटो, उबर, ओला जैसी कंपनियां ईंधन खर्च बढ़ने पर डिलीवरी चार्ज या सर्ज प्राइसिंग बढ़ा सकती है. दिल्ली में सीएनजी की कीमत भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गई है. ऑटो-रिक्शा, टैक्सी वाले भी लंबे समय तक किराया बढ़ाने की मांग कर सकते हैं.
किसानों पर बोझ
गांव और खेती पर यह बढ़ोतरी और भी गहरी चोट कर सकती है. किसान ट्रैक्टर चलाते हैं, खेतों में पानी पहुंचाने के लिए पंप चलाते हैं और फसल को मंडी ले जाने के लिए ट्रक इस्तेमाल करते हैं. ईंधन महंगा होने से खेती का खर्च बढ़ जाएगा. अंत में यह बढ़ा खर्च भी बाजार में अनाज और सब्जियों की कीमतों में जुड़ सकता है. 3.08 रुपये की यह बढ़ोतरी दुनिया की सबसे बुरी स्थिति की तुलना में कम है, लेकिन इसका असर एकदम नहीं, बल्कि धीरे-धीरे पूरे देश में फैलेगा. परिवहन, खाना, यात्रा, डिलीवरी और खेती हर क्षेत्र में इसकी छाप दिखेगी. सरकार को उम्मीद है कि स्थिति जल्द सुधरेगी और तेल की कीमतें स्थिर हो जाएंगी. लेकिन फिलहाल आम आदमी को थोड़ी सावधानी बरतनी होगी और अपने खर्च पर नजर रखनी होगी. बढ़ती महंगाई से बचने के लिए जरूरी चीजों की खरीदारी में थोड़ी समझदारी दिखानी होगी.




