प्रियंका गांधी के लिए कितनी कठिन है ‘असम की जंग’? कांग्रेस के लिए असली इम्तिहान 2026 में
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने असम में बड़ा सियासी दांव चला है. पहली बार गांधी परिवार की सदस्य प्रियंका गांधी वाड्रा को राज्य की स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है. यह फैसला बीजेपी के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के मजबूत चुनावी मॉडल को चुनौती देने की कोशिश माना जा रहा है. असम अब कांग्रेस के संगठन, गठबंधन और नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा बन चुका है.
2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने असम को लेकर बड़ा और सियासी तौर पर जोखिम भरा फैसला लिया है. पार्टी ने पहली बार गांधी परिवार के किसी सदस्य को किसी राज्य की स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन बनाया है. यह जिम्मेदारी मिली है प्रियंका गांधी वाड्रा को.
तीन महीने बाद चुनावी रण में उतरने जा रहे असम में यह सिर्फ संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि बीजेपी के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके सधे हुए चुनावी तंत्र को सीधी चुनौती देने की कोशिश मानी जा रही है.
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क्यों असम कांग्रेस के लिए बना अहम राज्य?
असम उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां 2026 में चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं. पिछले चुनाव में आंकड़े बताते हैं कि मुकाबला एकतरफा नहीं था - NDA को 126 में से 75 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस-नेतृत्व वाले महागठबंधन को 50 सीटें. वोट शेयर का फर्क भी सिर्फ 1.6 फीसदी का रहा था. यानी सत्ता भले बीजेपी के पास रही हो, लेकिन जमीन पर लड़ाई बेहद करीबी थी. कांग्रेस का मानना है कि अगर सही उम्मीदवार, सही गठबंधन और साफ रणनीति बनाई जाए, तो NDA को असम में चुनौती दी जा सकती है.
सिर्फ चेहरा नहीं, सिस्टम सुधार की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन बनाना सिर्फ स्टार पावर नहीं, बल्कि कांग्रेस के अंदर की पुरानी कमजोरियों को दूर करने की कोशिश है. असम में कांग्रेस लंबे समय से टिकटों की खरीद-फरोख्त, परिवारवाद और कमजोर और गैर-लोकप्रिय उम्मीदवार चुनने जैसे आरोपों से जूझती रही है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी की मौजूदगी से टिकट वितरण में पारदर्शिता आएगी और अंदरूनी असंतोष कम होगा.
गौरव गोगोई vs हिमंता सरमा
असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई युवा और उभरते नेता हैं. वे लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर भी हैं और भविष्य में पार्टी के बड़े चेहरे माने जा रहे हैं. लेकिन सच्चाई यह भी है कि हिमंता बिस्वा सरमा आक्रामक, प्रशासनिक और चुनावी तौर पर बेहद मजबूत नेता हैं. उनके पास BJP का पूरा चुनावी इकोसिस्टम, संगठन, RSS नेटवर्क और केंद्र सरकार का समर्थन है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि गौरव गोगोई अकेले फिलहाल हिमंता के किले में सीधा हमला नहीं कर सकते. ऐसे में प्रियंका गांधी की एंट्री उन्हें नैतिक, रणनीतिक और संगठनात्मक ताकत दे सकती है.
असम में गठबंधन ही कांग्रेस की बड़ी उम्मीद
असम की राजनीति की खासियत है कि यहां चुनाव हमेशा गठबंधनों के बीच लड़े जाते हैं. छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियां हर चुनाव में पाला बदलती हैं. कांग्रेस का फोकस है INDIA ब्लॉक को मजबूत करना, सीट शेयरिंग में संतुलन और वोट कटने से रोकना. प्रियंका गांधी की भूमिका यहां अहम हो जाती है, क्योंकि सही उम्मीदवार चयन के बिना गठबंधन भी बेकार साबित हो सकता है.
इमरान मसूद का बयान और बढ़ती राजनीतिक चर्चा
असम स्क्रीनिंग कमेटी में शामिल कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का हालिया बयान भी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने प्रियंका गांधी को भविष्य का प्रधानमंत्री बताया. हालांकि पार्टी इसे व्यक्तिगत राय बता रही है, लेकिन इससे यह साफ है कि प्रियंका गांधी की भूमिका कांग्रेस में तेजी से बढ़ रही है.
असम प्रियंका गांधी के लिए परीक्षा भी, मौका भी
असम चुनाव प्रियंका गांधी के लिए संगठन चलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी, हिमंता-BJP मॉडल के खिलाफ रणनीति की परीक्षा और कांग्रेस में नेतृत्व क्षमता साबित करने का मंच - तीनों साबित हो सकते हैं. अगर कांग्रेस यहां बेहतर प्रदर्शन करती है, तो प्रियंका गांधी की राजनीतिक हैसियत राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी. लेकिन अगर असम में फिर हार मिलती है, तो यह सवाल और गहरे होंगे कि क्या गांधी परिवार का करिश्मा अब राज्यों में भी कमजोर पड़ रहा है? 2026 का असम, दरअसल कांग्रेस के भविष्य की दिशा तय कर सकता है.





