मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब हज पर भी! 10 हजार रुपये महंगा हुआ सफर, सरकार पर जमकर भड़के ओवैसी
हज 2026 के लिए हवाई किराया 10,000 रुपये बढ़ाने से विवाद खड़ा हो गया है. सरकार का कहना है कि ATF कीमत बढ़ने के बावजूद यात्रियों को बड़े बोझ से बचाया गया, वहीं, विपक्ष ने इसे गलत बताते हुए फैसले पर सवाल उठाए हैं.
हज 2026 का किराया महंगा होने पर सरकार पर भड़के ओवैसी
Haj 2026 Airfare Hike Explained: हज 2026 पर जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए इस साल खर्च बढ़ गया है. Haj Committee of India ने हवाई किराए में 1000 रुपये प्रति यात्री की बढ़ोतरी की है, जिसकी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज उछाल बताई गई है. सरकार के मुताबिक, यह बढ़ोतरी एक 'वन-टाइम एडजस्टमेंट' है, जो मिडिट ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ने से हुई है.
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि एयरलाइंस ने शुरुआत में 300 से 400 डॉलर तक किराया बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने बातचीत कर इसे घटाकर सिर्फ 100 डॉलर (करीब ₹10,000) तक सीमित रखा. हम विमानन टरबाइन ईंधन की कीमतों में वृद्धि के लिए एयरलाइंस को भी दोषी नहीं ठहरा सकते. बातचीत के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि वृद्धि केवल 100 अमेरिकी डॉलर तक सीमित रहे, जिससे प्रत्येक तीर्थयात्री को काफी बचत हुई.
हज कमेटी के सर्कुलर के अनुसार, सभी यात्रियों को 15 मई तक यह अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी, ताकि यात्रा संचालन में कोई बाधा न आए. बता दें कि निजी टूर ऑपरेटरों ने पहले ही किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी थी और बाद में लगभग 150 अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि लागू कर दी.
क्या बोले ओवैसी?
हालांकि, इस फैसले पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है. AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने इसे वापस लेने की मांग की, जबकि कांग्रेस सांसद Imran Pratapgarhi ने इसे 'अन्याय' करार दिया. उनका कहना है कि जब किराया पहले ही तय हो चुका था, तो आखिरी समय में अतिरिक्त राशि वसूलना सही नहीं है.
सरकार ने क्या सफाई दी?
वहीं, सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि यह फैसला पूरी पारदर्शिता के साथ लिया गया है. इसका उद्देश्य हज यात्रा को बिना किसी व्यवधान के पूरा कराना है. सरकार का दावा है कि इस फैसले से यात्रियों को बड़े आर्थिक बोझ से बचाया गया है.




