Epstein Files Controversy : राहुल गांधी के बयान पर भड़के हरदीप पुरी, कह दी ऐसी बात मच गया हंगामा, क्या है पूरा मामला?
राहुल गांधी के एपस्टीन फाइल्स से जुड़े आरोपों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कड़ा पलटवार किया और ट्रेड डील पर दबाव के दावों को खारिज किया. विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री मोदी के इजराइल दौरे से जुड़े कथित ईमेल को दोषी अपराधी की बेकार की बातें करार दिया है.
भारत की राजनीति में एक बार फिर एपस्टीन फाइल्स को लेकर बवाल मचा है. अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से संबंधित दस्तावेजों (Epstein Files) में नाम आने के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है. इस विवाद में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Trade Deal) को भी जोड़ा गया है. इस पर भड़के मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि "राहुल गांधी ने खुद को बेवकूफ बना लिया."
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने गुरुवार को राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर उन्हें 'गधा' कहा. ऐसा उन्होंने राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोप के जवाब में कहा. राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स में हरदीप पुरी के नाम जिक्र करते हुए कहा था कि उनकी वजह से अमेरिका भारत व्यापार समझौते प्रभावित हुआ.
RG को राई का पहाड़ बनाने' की आदत है!
एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि जब वह बदनाम अमेरिकी फाइनेंसर और बच्चों के यौन अपराधी से काम से जुड़े टॉपिक पर मिले, तो उन्हें "अजीब सी" महसूस हुई. पुरी ने आगे कहा कहा, "मैंने, एपस्टीन के साथ मीटिंग नहीं मांगी थी. वे, मेरे लिए तय की गई थीं." "दो मीटिंग किसी रिश्ते की वजह से कोई गलती नहीं हैं. मैं इससे खुश होकर निकला हूं. तब मैं सरकार का हिस्सा भी नहीं था." राहुल गांधी को 'राई का पहाड़ बनाने' की आदत है.
ट्रेड पढ़ते तो पता चलता सही क्या है?
"मिस्टर राहुल गांधी, अगर वह सिर्फ वह (भारत-US एग्रीमेंट का टेक्स्ट) पढ़ते तो उन्हें पता चलता कि ट्रेड डील में क्या हुआ है. भारत जैसे देश के लिए, जिसकी GDP का 50 परसेंट हिस्सा एक्सटर्नल सेक्टर में है, के लिए ट्रेड डील बहुत जरूरी था."
राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने लोकसभा में अपने संबोधन के बाद कहा कि उनके पास ऐसी जानकारी है जिसमें अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) की एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में कुछ भारतीय नामों का उल्लेख है. उन्होंने हरदीप पुरी का नाम इस मसले से जोड़ा था. उन्होंने यह भी दावा किया कि इन संदर्भों के कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारत पर दबाव बनाया गया. हालांकि, इन दावों पर अब तक कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है.
हरदीप पुरी का जवाब
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन आरोपों का खंडन किया. उन्होंने कहा कि वह जेफरी एपस्टीन से कुछ औपचारिक बैठकों में मिले थे, लेकिन वे बैठकें पूर्व-निर्धारित थीं और निजी प्रकृति की नहीं थीं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय वे सरकार का हिस्सा नहीं थे और किसी भी प्रकार के अनुचित संबंध का आरोप निराधार है. पुरी ने यह भी कहा कि व्यापार समझौते को किसी व्यक्तिगत संदर्भ से जोड़ना उचित नहीं है.
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी हाल ही में सामने आए एक कथित ईमेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2017 के इज़राइल दौरे के उल्लेख को खारिज किया. प्रवक्ता ने कहा कि आधिकारिक यात्रा के अलावा किसी अन्य संदर्भ को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता और ऐसे उल्लेखों को प्रमाणिक नहीं माना जाना चाहिए.
एपस्टीन फाइल्स क्या हैं?
जेफरी एपस्टीन अमेरिकी फाइनेंसर थे जिन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी के गंभीर आरोप लगे थे. 2019 में उनकी जेल में मृत्यु हो गई थी, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया. हाल के महीनों में अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन से संबंधित लाखों पन्नों के दस्तावेज और डिजिटल सामग्री जारी की है. यह प्रक्रिया Epstein Files Transparency Act के तहत हो रही है, जिसका उद्देश्य सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करना है. इन फाइलों में कई प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं. हालांकि, नाम का उल्लेख होना स्वयं में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जाता.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का संदर्भ
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन कथित संदर्भों के कारण भारत पर व्यापार समझौते में दबाव हो सकता है. दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि व्यापार समझौते आर्थिक हितों और रणनीतिक साझेदारी के आधार पर तय होते हैं, न कि किसी व्यक्तिगत संदर्भ के कारण. अब तक ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है जो इन दोनों मामलों के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करता हो.
क्या कानूनी स्थिति है?
एपस्टीन फाइल्स में किसी नाम का उल्लेख होना स्वतः अपराध सिद्ध नहीं करता. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच और प्रमाण आवश्यक होते हैं. यदि किसी भी देश के नागरिक या अधिकारी के खिलाफ ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया अलग से चलती है.
आरोप और प्रत्यारोप के बीच तथ्य
वर्तमान स्थिति में यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में सामने आया है. राहुल गांधी ने सार्वजनिक मंच से सवाल उठाए हैं. हरदीप पुरी ने इन आरोपों को खारिज किया है. विदेश मंत्रालय ने भी संबंधित संदर्भों को अस्वीकार किया है. जब तक आधिकारिक जांच या प्रमाणित दस्तावेज सामने नहीं आते, इस विषय को दावों और प्रतिक्रियाओं के दायरे में ही देखा जा रहा है.





