कर्नाटक में विकास बैठक बनी अखाड़ा! BJP विधायक और कांग्रेस MLC भिड़े, हाथापाई की आई नौबत; पुलिस ने संभाला मामला- देखें VIDEO
कर्नाटक के बीदर में KDP बैठक के दौरान बीजेपी विधायक सिद्धू पाटिल और कांग्रेस MLC भीमराव पाटिल के बीच तीखी बहस हाथापाई की नौबत तक पहुंच गई. वन भूमि अतिक्रमण के मुद्दे पर विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। हालात बिगड़ने पर प्रभारी मंत्री ईश्वर खंड्रे ने बैठक स्थगित कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
Karnataka Bidar KDP meeting fight, BJP MLA Congress MLC clash viral video: कर्नाटक के बीदर जिले में शुक्रवार को उस वक्त राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब एक अहम सरकारी बैठक हंगामे और हाथापाई की कगार पर पहुंच गई. जिला पंचायत सभागार में आयोजित कर्नाटक डेवलपमेंट प्रोग्राम (KDP) की बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के दो जनप्रतिनिधि आपस में भिड़ गए. यह टकराव बीजेपी विधायक सिद्धू पाटिल और कांग्रेस एमएलसी भीमराव पाटिल के बीच हुआ. दोनों नेता हुमनाबाद विधानसभा क्षेत्र से जुड़े वन भूमि अतिक्रमण के मुद्दे पर बहस कर रहे थे, लेकिन देखते ही देखते चर्चा तीखी बहस में बदल गई और फिर हालात बेकाबू हो गए.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बहस के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए और बात चीख-पुकार व गाली-गलौज तक पहुंच गई. इस दौरान मौजूद लोग सकते में आ गए.
घटना का वीडियो आया सामने
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि दोनों नेता एक-दूसरे पर उंगली उठाकर चिल्ला रहे हैं. स्थिति तब और बिगड़ गई, जब कांग्रेस एमएलसी भीमराव पाटिल अपनी कुर्सी से उठकर बीजेपी विधायक की ओर बढ़े और हाथ उठाकर मारने की कोशिश की.
पुलिस ने आखिरी वक्त पर संभाला मामला
वीडियो में साफ दिखता है कि अगर समय रहते पुलिसकर्मी और अन्य नेता बीच में नहीं आते, तो बैठक पूरी तरह हाथापाई में बदल सकती थी. सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं को अलग किया.
मंत्री को करनी पड़ी बैठक स्थगित
इस हंगामे के बाद जिले के प्रभारी मंत्री ईश्वर खंड्रे को बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी. बैठक का माहौल पूरी तरह खराब हो चुका था.
राजनीति में गिरता स्तर?
इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि सरकारी मंचों पर जनप्रतिनिधियों का आचरण किस दिशा में जा रहा है. विकास से जुड़ी बैठक का इस तरह हिंसक टकराव में बदल जाना कर्नाटक की राजनीति के लिए शर्मनाक माना जा रहा है.





