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6 जनवरी को डीके शिवकुमार बनेंगे सीएम... कांग्रेस विधायक के दावे से कर्नाटक में आया सियासी भूचाल, अब क्या करेंगे सिद्धारमैया?

कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर काफी खींचतान चल रही है. रामनगर से कांग्रेस विधायक एचए इकबाल हुसैन ने 13 दिसंबर 2025 को बड़ा दावा किया कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार 6 जनवरी को मुख्यमंत्री बन जाएंगे और मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जगह लेंगे.

6 जनवरी को डीके शिवकुमार बनेंगे सीएम... कांग्रेस विधायक के दावे से कर्नाटक में आया सियासी भूचाल, अब क्या करेंगे सिद्धारमैया?
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( Image Source:  ANI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Published on: 14 Dec 2025 8:50 AM

कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल मची हुई है. कांग्रेस पार्टी के एक विधायक एचए इकबाल हुसैन ने शनिवार को एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार जल्द ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन जाएंगे और मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जगह लेंगे. विधायक हुसैन का कहना है कि यह बदलाव 6 जनवरी को हो सकता है. वे रामनगर से विधायक हैं और उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही. उनका मानना है कि शिवकुमार को राज्य का नेतृत्व करने का पूरा मौका मिलना चाहिए, क्योंकि वे इसके हकदार हैं.

पीटीआई न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हुसैन ने यह भी कहा कि '6 जनवरी को शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की 99 प्रतिशत संभावना है.' उन्होंने बार-बार अपना समर्थन दोहराया और कहा कि वे शिवकुमार के साथ खड़े हैं. जब उनसे पूछा गया कि 6 जनवरी की तारीख का क्या महत्व है, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. यह बस एक सामान्य तारीख है जो लोग चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'यह 6 या फिर 9 जनवरी भी हो सकती है. ये दो तारीखें हैं जो सामने आ रही हैं.' हुसैन पिछले कुछ दिनों से खुलकर शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं. एक दिन पहले भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी यह इच्छा जाहिर की थी.

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सत्ता मिलना किस्मत की बात है

इस बीच, दूसरी तरफ से भी कुछ दिलचस्प बयान आए हैं. केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और भाजपा के सांसद वी सोमन्ना ने कहा कि वे कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन दे रहे हैं. सोमन्ना ने तुमकुरु में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही. उन्होंने कहा कि सत्ता मिलना किस्मत की बात है और वे कभी नहीं सोचते थे कि परमेश्वर सिर्फ गृह मंत्री बनकर रह जाएंगे. सोमन्ना ने कहा, 'हम सब उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं न सिर्फ मैं, बल्कि तुमकुरु के लोग भी यही चाहते हैं.'

सोनिया गांधी से मुलाकात

जब उनसे डीके शिवकुमार के बारे में पूछा गया, जो मुख्यमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, तो सोमन्ना ने कहा कि वह बात गौण है. शिवकुमार क्या बनेंगे, यह उनके भाग्य पर निर्भर करता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अच्छा आचरण भाग्य से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है.अब सवाल यह है कि आखिर क्या चल रहा है? सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार आज, यानी 14 दिसंबर को दिल्ली में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात करने वाले हैं. यह बैठक राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच हो रही है.

'वोट चोर गद्दी छोड़'

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह मुलाकात नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक बड़ी रैली के बाद होगी. यह रैली पार्टी के 'वोट चोर गद्दी छोड़' अभियान के तहत आयोजित की जा रही है, जिसमें सत्ताधारी भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं. हालांकि, कुछ अपडेट्स से पता चलता है कि शिवकुमार दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि सिद्धारमैया कल यानी 15 दिसंबर को दिल्ली आएंगे. यह थोड़ा कन्फ्यूजन पैदा कर रहा है, लेकिन मुख्य बात यह है कि नेतृत्व को लेकर चर्चा होनी है.

ढाई-ढाई साल के लिए बांटा जाएगा सीएम पद

कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं और कांग्रेस के पास लगभग 140 विधायकों का मजबूत बहुमत है, इसलिए सरकार स्थिर है. लेकिन पिछले कुछ समय से नेतृत्व बदलाव की अफवाहें तेज हो गई हैं. कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया है. उसके बाद से खबरें आ रही हैं कि मुख्यमंत्री का पद ढाई-ढाई साल के लिए बांटा जा सकता है, ताकि पीढ़ीगत बदलाव हो सके. हालांकि, पार्टी या किसी नेता ने आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई व्यवस्था की पुष्टि नहीं की है.

सिद्धारमैया के खिलाफ कोई सीधा कदम नहीं

शिवकुमार ने कुछ दिन पहले एक 'गुप्त समझौते' का जिक्र किया था, लेकिन कोई डिटेल नहीं दी. अब तक, 63 साल के शिवकुमार ने 77 साल के सिद्धारमैया के खिलाफ कोई सीधा कदम नहीं उठाया है. वे दोनों मिलकर सरकार चला रहे हैं, लेकिन अंदरूनी खींचतान साफ नजर आ रही है. यह सारी स्थिति कर्नाटक की राजनीति को रोचक बना रही है. देखना होगा कि दिल्ली की बैठक से क्या निकलता है और क्या वाकई मुख्यमंत्री पद में कोई बदलाव होता है या नहीं. पार्टी के अंदर एकता बनाए रखना जरूरी है, वरना विपक्ष फायदा उठा सकता है.

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