'PM ने अयोध्या में कराया अधूरे राम मंदिर का निर्माण', BJP पर जमकर बरसे प्रमोद तिवारी, बोले- पता नहीं, मोदी जी की सीता कौन है
दिल्ली में कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बना. उन्होंने आरोप लगाया कि प्राण प्रतिष्ठा के समय मंदिर पूरा नहीं हुआ था. तिवारी ने प्राण प्रतिष्ठा में माता सीता की उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा.
अयोध्या के राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर निशाना साधा है. तिवारी ने राम मंदिर निर्माण का श्रेय बीजेपी को दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुआ. उन्होंने कहा कि जब मंदिर का निर्माण चल रहा था, उसी दौरान देश में संसदीय चुनाव भी हो रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मंदिर से ज्यादा चुनाव महत्वपूर्ण दिखाई दिया.
प्रमोद तिवारी ने कहा कि राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावे की चोरी नहीं हुई, बल्कि शिला पूजन के समय से ही चोरी शुरू हो गई थी. मैं खुद अवध क्षेत्र का रहने वाला हूं और 1985-90 के बीच मैं यूपी सरकार में टूरिज्म मंत्री था. मैंने राम जन्मभूमि के आंदोलन को बड़े करीब से देखा है. मैं ये नहीं कहता कि BJP में सभी 'चंदा चोर' हैं, लेकिन सारे 'चंदा चोर' BJP में हैं.
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि जब प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब मंदिर पूरी तरह तैयार नहीं था. अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करना ‘अशुभ’ है. प्रमोद तिवारी ने धार्मिक परंपराओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम द्वारा यज्ञ किए जाने के प्रसंग में भी सीता जी की मौजूदगी का उल्लेख मिलता है, लेकिन जब पीएम मोदी ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की, तो उन्हें वहां सीता जी नजर नहीं आई.
‘राम की सीता कौन थीं और मोदी जी की सीता कौन हैं?’
प्रमोद तिवारी ने पीएम मोदी से सीधे सवाल करते हुए कहा, “राम की सीता कौन थीं और मोदी जी की सीता कौन हैं?” कांग्रेस सांसद ने कहा कि इस सवाल का जवाब प्रधानमंत्री को खुद देना चाहिए. उनका यह बयान सामने आने के बाद राम मंदिर, प्राण प्रतिष्ठा और अयोध्या को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है.
प्रमोद तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या-क्या कहा?
- जब राम मंदिर बनाने के लिए आंदोलन चल रहा था, तो उसका नारा था- ''राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे.'' फिर जब यूपी में BJP की सरकार बनी तो मैंने पूछा कि मंदिर का निर्माण कब होगा. जवाब मिला- जब केंद्र में भी BJP की सरकार आ जाएगी.
- जब केंद्र में अटल जी की सरकार बनी, मैंने फिर यही सवाल पूछा. जवाब मिला- अभी रुक जाइए. सच्चाई ये है- BJP कभी नहीं चाहती थी कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो, वो सिर्फ राम मंदिर का मुद्दा चाहती थी. सच्चाई ये है कि राम मंदिर BJP ने नहीं बनवाया, ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बना.
- राम मंदिर बनने के समय लोकसभा का चुनाव था और नरेंद्र मोदी जी को चुनाव मंदिर से ज्यादा प्रिय था, इसलिए उन्होंने अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कर अशुभ काम किया. राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शंकराचार्यों को नहीं बुलाया गया था, जबकि पूजा उन्हीं से करवानी चाहिए थी.
- जब भगवान राम ने अश्वमेध यज्ञ किया था तो सीता माता की पत्थर की मूर्ति बनावकर बगल में रखकर यज्ञ किया था.. लेकिन जब मोदी जी पूजा कर रहे थे तो मुझे सीता जी कहीं नजर नहीं आई है. पता नहीं मोदी जी की सीता कौन है.
- BJP प्रभु श्री राम के नाम पर काफी पहले से लूट कर रही है. जब नरेंद्र मोदी अयोध्य गए, तो तैयारियों पर 112 करोड़ रुपए खर्च हुए. 5 से 10 गुना ज्यादा दाम पर फूल खरीदे, कुर्सियों का पैसा इतना ज्यादा था कि नई कुर्सियां आ जाती.
- श्री राम मंदिर ट्रस्ट में एक-एक आदमी को नरेंद्र मोदी ने चुना, मंदिर के कर्मचारी BJP से जुड़े हुए लोग रखे गए। तो मंदिर से 'चढ़ावा चोरी' होने पर नरेंद्र मोदी बच नहीं सकते. BJP 'चढ़ावा चोरी' को भुलाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उन्हें जवाब देना ही होगा. हमारी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में SIT जांच करे.
- अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के दौरान 2 करोड़ रुपए की जमीन खरीदकर, उसे 10 मिनट बाद 18 करोड़ रुपए में बेच दिया गया. मंदिर निर्माण के दौरान सात बड़े जमीनी सौदे हुए, जिसमें सर्किल रेट से 17 गुना अधिक रकम का भुगतान किया गया.
- राम मंदिर के लिए बने ट्रस्ट में साधु-संतों को बाहर कर, उसमें BJP-RSS के लोगों को रखा गया. राम मंदिर निर्माण में सैकड़ों करोड़ों रुपए की चोरी की गई, सोने-चांदी पिघलाकर बेचे गए, पैसा शेयर मार्केट में लगाया गया. करोड़ों लोगों की आस्था पर डकैती हुई. हम चाहते हैं कि लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
- जब श्री राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नरेंद्र मोदी ने किया, तो घोटाले की जवाबदेही कौन देगा ? मेरा मानना है कि जवाबदेही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की होती है. अगर सब ठीक है तो चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने इस्तीफा क्यों दिया?




