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Explainer: कृष्ण मोहन बने कार्यकारी महामंत्री, 3264 करोड़ के फंड का ब्योरा जारी, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर ट्रस्ट की बैठक में क्या हुआ?

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक हुई. बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए, कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया. ट्रस्ट ने भरोसा दिलाया कि दोषियों को सख्त सजा दिलाने के साथ पूरी व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाएंगे.

Explainer: कृष्ण मोहन बने कार्यकारी महामंत्री, 3264 करोड़ के फंड का ब्योरा जारी, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर ट्रस्ट की बैठक में क्या हुआ?
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Ram Mandir Trust meeting: अयोध्या में रविवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक हुई, जिसमें मंदिर के वित्तीय प्रबंधन, दान और हालिया विवादों पर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण और चढ़ावे से जुड़े फंड का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करते हुए बताया कि सभी वित्तीय लेन-देन पारदर्शी तरीके से किए गए हैं. पहले यह बैठक 11 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसे पहले ही आयोजित किया गया. बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, विभिन्न ट्रस्टी, संत-महात्मा और अयोध्या के जिलाधिकारी मौजूद रहे. ट्रस्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पूरे मामले पर गंभीरता से चर्चा की गई और आगे की कार्ययोजना तय की गई.

ट्रस्ट के मुताबिक, फंड जुटाने के अभियान और कॉर्पस डोनेशन से अब तक कुल 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. इनमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य पूंजीगत (कैपिटल) कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं. वहीं, स्थापना से लेकर 31 मार्च 2026 तक रामलला को 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला, जिसमें से 391 करोड़ रुपये मंदिर के संचालन और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर उपयोग किए गए हैं. ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि शेष राशि सुरक्षित रूप से बैंक खातों में जमा है.

रामलला को कितनी भेंट मिली?

बैठक में भगवान श्री रामलला को मिली वस्तु स्वरूप भेंटों का भी पूरा विवरण साझा किया गया. ट्रस्ट के अनुसार, अब तक कुल 2,926 वस्तु स्वरूप भेंटें प्राप्त हुई हैं. प्रत्येक भेंट का रिकॉर्ड उसकी प्राप्ति तिथि सहित एक रजिस्टर में सुरक्षित रखा गया है. इन सभी भेंटों का हर वर्ष एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म, जो इंटरनल ऑडिटर की भूमिका निभाती है, भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) भी करती है. ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यदि किसी दानदाता को अपनी भेंट के उपयोग या उसकी स्थिति के बारे में जानकारी चाहिए, तो वे ट्रस्ट के अधिकारियों से समय लेकर अयोध्या आ सकते हैं. ट्रस्ट की ओर से उन्हें संबंधित रिकॉर्ड और जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफा स्वीकार

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने बताया कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार इस्तीफा दिए जाने के बाद उसे स्वीकार करना ही था. ट्रस्ट ने उनके वर्षों के योगदान की सराहना करते हुए इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इसके बाद ट्रस्टी कृष्ण मोहन को नए महासचिव की नियुक्ति होने तक कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई.

कृष्ण मोहन बोले- सबसे पहले व्यवस्था की कमियां दूर करेंगे

कार्यकारी महामंत्री बनाए गए कृष्ण मोहन ने कहा कि पूरे घटनाक्रम से ट्रस्ट और करोड़ों रामभक्त आहत हैं. उन्होंने कहा कि प्रबंधन और निगरानी में जो कमियां थीं, उनका फायदा कुछ लोगों ने उठाया. अब उनकी पहली प्राथमिकता सभी खामियों को दूर करना होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो. मोहन ने भरोसा दिलाया कि दोषियों को कानून के मुताबिक सख्त सजा दिलाने की मांग ट्रस्ट पूरी मजबूती से करेगा.

ट्रस्ट का दावा- 2800 दान की वस्तुएं सुरक्षित

स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि सोशल मीडिया और राजनीतिक आरोपों में जिन आभूषणों और चढ़ावे के गायब होने की बातें कही जा रही हैं, उनके रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास सुरक्षित हैं. उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के पास लगभग 2800 दान की गई वस्तुओं का पूरा रजिस्टर मौजूद है. फिलहाल जिन पांच वस्तुओं को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी, उन्हें मीडिया के सामने नमूने के तौर पर दिखाया गया. महाराज ने कहा कि यदि किसी श्रद्धालु को किसी दान की वस्तु को लेकर संदेह है तो वह ट्रस्ट कार्यालय में समय लेकर स्वयं आकर उसका रिकॉर्ड देख सकता है.

अब पूरी व्यवस्था का होगा ओवरहॉल

स्वामी गोविंद देव गिरि ने साफ कहा कि भविष्य में पूरी व्यवस्था को नए सिरे से तैयार किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही या विवाद की गुंजाइश बिल्कुल खत्म हो जाए. उन्होंने कहा कि इस काम के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी और ऐसी प्रक्रिया बनाई जाएगी जिस पर कोई सवाल न उठा सके. उनका कहना था कि राम मंदिर की प्रतिष्ठा को जो नुकसान पहुंचा है, उसे पूरी तरह बहाल करना ट्रस्ट की जिम्मेदारी है.

SBI पर भी उठाए सवाल

स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि दान प्रबंधन की प्रक्रिया में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) भी जुड़ा हुआ था, इसलिए उसकी भी जिम्मेदारी बनती थी. उन्होंने कहा कि उनकी राय में इस मामले में एफआईआर ट्रस्ट की बजाय SBI को दर्ज करानी चाहिए थी क्योंकि निगरानी की जिम्मेदारी साझा थी. हालांकि ट्रस्ट ने स्वयं आगे बढ़कर शिकायत दर्ज कराई.

SIT जांच पर पूरा भरोसा

ट्रस्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच कर रहा है और दोषियों की गिरफ्तारी प्रशासन की जिम्मेदारी है. स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट चाहता है कि सभी आरोपी और उनके सहयोगी जल्द पकड़े जाएं और उन्हें कानून के अनुसार कड़ी सजा मिले. उन्होंने बताया कि 22 जुलाई को फिर ट्रस्ट की बैठक होगी. उम्मीद है कि तब तक SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी, जिसके आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे.

नई चयन समिति भी बनाई गई

ट्रस्ट ने भविष्य की नियुक्तियों और प्रशासनिक सुधारों के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. इस समिति में शामिल हैं- सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रदीप कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिरडी संस्थान के पूर्व प्रशासक सुरेश हवारे. यह समिति उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेकर ट्रस्ट को नाम सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम नियुक्तियां होंगी.

चंपत राय का बचाव भी किया

स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि वह पिछले 32 वर्षों से चंपत राय को जानते हैं. उनके मुताबिक चंपत राय की सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने अपने आसपास के कुछ लोगों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर लिया. उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन की शुरुआत से ही चंपत राय जुड़े रहे हैं और उनकी ईमानदारी पर उन्हें कोई संदेह नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इतनी बड़ी लापरवाही जरूर हुई कि गलत लोग लंबे समय तक उनके साथ बने रहे.

राजनीतिक साजिश का भी लगाया आरोप

स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, रामसेतु को नहीं मानते थे या कारसेवकों पर गोली चलाने वालों का समर्थन करते थे, वही लोग आज रामभक्ति की बात कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी के आरोपों को बहाना बनाकर कुछ लोग हिंदुत्व, रामभक्तों और संगठित हिंदू समाज के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना था कि यह केवल भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं बल्कि राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित एक बड़ी साजिश भी हो सकती है.

श्रद्धालुओं से अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील

ट्रस्ट ने सभी रामभक्तों से अपील की कि वे सोशल मीडिया या अफवाहों पर भरोसा न करें. यदि किसी को किसी दान या आभूषण को लेकर संदेह है तो वह सीधे ट्रस्ट कार्यालय आए, रिकॉर्ड देखे और स्वयं सच्चाई की पुष्टि करे. ट्रस्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था पर उसे पूरा भरोसा है और दोषियों को सजा जरूर मिलेगी.

VHP ने भी ट्रस्ट के फैसलों का समर्थन किया

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने कहा कि ट्रस्ट ने SIT जांच पर पूरा भरोसा जताया है. उन्होंने कहा कि सभी दान और आभूषण सुरक्षित हैं और यदि किसी श्रद्धालु को संदेह है तो वह ट्रस्ट से संपर्क कर खुद सत्यापन कर सकता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक अफवाहों और राजनीतिक आरोपों से बचें तथा यदि किसी के पास कोई सबूत है तो उसे जांच एजेंसी को सौंपें.

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