6 दिन तक जंतर-मंतर पर जारी रही पत्थरबाजी, प्रदर्शन के दौरान कितना हुआ नुकसान? 10 पॉइंट्स में जानें क्या-क्या हो रहे खुलासे
जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रोटेस्ट के बाद पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों की तरफ से आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, तंजर-मंतर के आस-पास 6 दिनों तक पत्थरबाजी जारी रही.
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर भले ही छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी का नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रोटेस्ट खत्म हो गया हो लेकिन विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुए नुकसान और घायल लोगों को लेकर लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं. जहां एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस प्रशासन और सरकार पर आरोप लगाए हैं तो वहीं हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब सुरक्षा अधिकारियों ने प्रदर्शन को लेकर बड़े दावे किए हैं.
अधिकारियों के मुताबिक जंतर-मंतर के आस-पास 6 दिनों तक पत्थरबाजी जारी रही. इस दौरान स्थिति को नियंत्रण करने के लिए पुलिस ने बहुत संयम बरता. अधिकारियों का दावा है कि कुछ राजनीतिक लोगों और संगठनों ने छात्रों के वास्तविक प्रदर्शन में प्रवेश कर कथित रूप से माहौल खराब किया. इस दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की बात भी सामने आई है.
अब सुरक्षा अधिकारियों ने क्या-क्या किए खुलासे?
1. घटनाक्रम से जुड़े सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान मध्य दिल्ली के कई इलाकों में लगातार पत्थरबाजी की घटनाएं दर्ज की गईं. अधिकारियों का कहना है कि पुलिस ने कार्रवाई करने से पहले कई बार चेतावनी दी और हालात को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित करने का प्रयास किया.
2. 20 जुलाई को स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब सीजेपी का संसद मार्च शुरू हुआ और संसद का सत्र भी चल रहा था. सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप भी लगे, लेकिन अधिकारियों ने दावा किया कि कार्रवाई लगातार चेतावनियों और हिंसक गतिविधियों के बाद की गई.
3. सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई को केवल एक घटना के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके अनुसार, कार्रवाई से पहले कथित तौर पर पत्थरबाजी, बैरिकेड तोड़ने का प्रयास, सुरक्षा क्षेत्र में घुसने की कोशिश, पुलिस और मीडिया कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया.
4. अधिकारियों के अनुसार, 20 जुलाई के संसद मार्च के बाद भी पत्थरबाजी की घटनाएं जारी रहीं और यह सिलसिला 25 जुलाई तक चला. इसके बाद सरकार द्वारा तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगें स्वीकार किए जाने के बाद सीजेपी ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की.
5. सुरक्षा दस्तावेज के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े तनाव का क्षेत्र केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं था. संसद के आसपास लगभग 2 किलोमीटर के क्षेत्र में कई जगहों पर घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें प्रमुख स्थान गोल डाक खाना, टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग, रेल भवन के पास रफी मार्ग बैरिकेड, जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस में एलआईसी बिल्डिंग के पास आउटर सर्कल, संसद मार्ग, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पास रायसीना रोड और रीगल बिल्डिंग क्षेत्र शामिल थे.
6. प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की सूची भी सामने आई है. दस्तावेज के अनुसार 110 बैरिकेड क्षतिग्रस्त हुए या गायब हुए, 171 रस्सियां खराब हुईं या लापता हुईं, वायरलेस सेट और बॉडी-वियर कैमरे प्रभावित हुए, 10 हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर खराब हुए, 2 पब्लिक एड्रेस सिस्टम और 15 लाउडस्पीकर क्षतिग्रस्त हुए, 10 अग्निशामक यंत्र, 4 वायर कटर और 1 एक्स-रे बैगेज स्कैनर को नुकसान पहुंचा.
7. रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा कर्मियों के कई उपकरण भी क्षतिग्रस्त हुए. जिसमें 355 हेलमेट, 285 बॉडी प्रोटेक्टर, 54 शील्ड, 10 टॉर्च, 24 प्राथमिक चिकित्सा किट और 12 कंबल शामिल है.
8. दस्तावेज में बताया गया है कि प्रदर्शन के दौरान 29 सरकारी वाहन प्रभावित हुए. इनमें कारें, बसें, मोटरसाइकिलें और टेंपो शामिल हैं. इसके अलावा एक पानी का टैंकर, डीटीसी बस और एक सार्वजनिक वाहन को भी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है.
9. सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रमों में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 244 पुलिसकर्मी घायल हुए और 209 नागरिकों को चोटें आईं. इन सभी मामलों को मेडिकल-लीगल केस (MLC) के रूप में दर्ज किया गया.
10. दिल्ली पुलिस की एक आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, चेहरे की पहचान तकनीक (Facial Recognition Technology) की मदद से कई लोगों की पहचान की गई. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सीजेपी संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा में शामिल 100 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान हुई, जिन पर हत्या जैसे गंभीर आरोपों का सामना करने की बात कही गई है.




