क्या एक साबुन बन सकता है तलाक की वजह? कैसे Dove और Lifebuoy साबुन ने तोड़ी एक कपल की शादी
भारत में तलाक के मामलों में अब ऐसे कारण भी सामने आ रहे हैं, जो लोगों को हैरान कर रहे हैं. साउथ की सीनियर एडवोकेट उमा रानी ने एक तेलुगु पॉडकास्ट में बताया कि एक शादीशुदा जोड़े का तलाक सिर्फ साबुन के विवाद पर हो गया. महिला डव साबुन इस्तेमाल करना चाहती थी, जबकि पति ने परिवार की परंपरा का हवाला देकर लाइफबॉय पर जोर दिया.
भारत में अब तक कई तलाक के मामले सामने आए है. जिसमें कुछ बेहद गंभीर मुद्दों पर हुए जैसे- रोज-रोज की मारपीट और दहेज़ उत्पीड़न. वहीं कुछ ऐसे मामले भी रहे कि जिसमें तलाक तो क्या लड़ाई करने का भी नहीं सोचा जा सकता. ऐसा ही एक मामला सामने आया जब साउथ की सीनियर एडवोकेट उमा रानी ने एक केस का जिक्र करते हुए बताया कि एक शादीशुदा जोड़े का तलाक सिर्फ डव साबुन की वजह से हो गया था. पॉडकास्टर शिवा कल्याणम यह बात सुनकर ही हैरान रह गए. उसने सवाल किया- क्या एक साबुन पर भी तलाक हो सकता है?. हालांकि यह एक तेलुगु पॉडकास्ट था.
जिसमें उमा रानी ने कहा, 'मेरे पास एक केस आया जिसमें एक लड़की ने कहा उसे अपने पति से तलाक चाहिए. जब मैंने उससे कारण पूछा तो उसने कहा, 'वह एक अच्छे और रिच परिवार से है. उसने पहले ही बताया दिया अपने पति को वो डव साबुन यूज करती है. लेकिन ससुराल में उसके पति ने उसे लाइफबॉय साबुन से ही नहाने को कहा.' एडवोकेट ने कहा, 'लड़की पहले तो इस बात से बहुत दुखी हुई और दो दिन तक नहाया ही नहीं यह सोचकर की पति उसके लिए डव साबुन ला देगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उसके पति ने बस यहीं कहा- मेरी पूरा परिवार लाइफबॉय साबुन से नहाता है इसलिए तुम्हें भी वहीं यूज करना पड़ेगा.'
साबुन पर तलाक
हालांकि पहले उमा रानी ने उस महिला को समझाने की कोशिश की क्योंकि तलाक के लिए आमतौर पर बड़े और गंभीर कारण चाहिए होते है. लेकिन महिला इस बात पर अड़ी रही की उसे जो चाहिए वह उसे ससुराल में नहीं दिया जा रहा है. उमा रानी ने आगे कहा, 'बड़ी और हैरानी वाली बात यह थी कि उस महिला की मां ने भी बेटी को समझाने के बजाए उसका साथ दिया.'
दो हिस्सों में बंटे यूजर्स
इस वीडियो के बाद कई यूजर्स को विश्वास ही नहीं हुआ कि आखिर कैसे डव साबुन तलाक की वजह बन सकता है. कुछ ने इस महिला की जिद्द को मूर्खतापूर्ण कहा और इसे शादी का मजाक बनाने जैसा बताया. वहीं कुछ लोगों ने इस मामले में महिला का साथ दिया. एक ने कहा, 'अगर आप खर्च नहीं उठा सकते तो किसी अमीर घराने की लड़की से शादी मत करो. यह कोई छोटी बात नहीं है क्योंकि उनमें से कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं है.' दूसरे ने कहा, 'सही डिसीजन लिया सोचो शुरुआत में उसे इतना एडजस्ट करने को कह रहे है आगे उस महिला का क्या होता।' एक ने कहा, 'अगर वह अभी साबुन नहीं खरीद सकता, तो भविष्य में या बच्चे होने पर वे उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे? सबसे अच्छा फैसला था.' एक अन्य ने कहा, 'डव साबुन इस मामले में अच्छा किरदार निभाया है उसकी वजह से पता चला आखिर उसका पति कितना कंट्रोलिंग था.'
छोटे-छोटे मुद्दों पर बढ़ता तलाक
हालांकि यह भारत का पहला ऐसा मामला नहीं है. 2025 में नवंबर तक महिला थाने में 2250 घरेलू विवाद के केस आए, जिनमें से करीब 650 मामले ऐसे थे जहां सुलह नहीं हुई और पति-पत्नी तलाक के लिए कोर्ट गए. कई मामलों में वजहें बहुत छोटी बताई गईं, जैसे:पत्नी को महंगे मेकअप के लिए पैसे न देने पर तलाक की मांग. टेढ़ी रोटी बनाने पर झगड़ा, पति का कुत्ते से ज्यादा प्यार करने पर विवाद. यहां 2022 से 2025 तक ऐसे मामलों में तेज बढ़ोतरी दिखी है. अन्य शहरों में ट्रेंड के रूप में हैदराबाद जैसी जगहों पर पुरानी रिपोर्ट्स (2017) में कहा गया था कि आधे से ज्यादा तलाक छोटे झगड़ों शहरी इलाकों में अब भी यही ट्रेंड जारी है.





