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BRICS समिट का एजेंडा क्या? चीन-ईरान की मौजूदगी पर सस्पेंस, मोदी के सामने बड़ी चुनौती

14 और 15 मई को नई दिल्ली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी. BRICS समिट 2026 में एजेंडा, शामिल देश, चीन-ईरान की भूमिका और पीएम मोदी के सामने कूटनीतिक चुनौतियों की पूरी जानकारी पढ़ें। धीरेंद्र कुमार मिश्रा

BRICS Summit 2026 Narendra Modi,
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( Image Source:  ANI )

वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरण और ईरान (इजरायल) अमेरिका वॉर के बीच इस बार BRICS विदेश मंत्रियों की समिट काफी अहम मानी जा रही है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह मंच कूटनीति की बड़ी परीक्षा बन सकता है. एक तरफ पश्चिमी देशों के साथ संतुलन बनाए रखना है, तो दूसरी ओर चीन और ईरान जैसे देशों के साथ रिश्तों को भी साधना है. इस बार समिट में आर्थिक सहयोग, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दे केंद्र में रह सकते हैं. खास बात यह है कि चीन और ईरान की भागीदारी को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है, जिससे इस बैठक की अहमियत और बढ़ गई है. पीएम मोदी के लिए यह बैठक इसलिए भी चुनौती है कि ईरान चाहता है कि ब्रिक्स की बैठक में वॉर शुरू करने के लिए अमेरिका के खिलाफ प्रस्ताव पारित हो.

BRICS समिट कब और कहां होगी?

इस बार BRICS समिट 14 और 15 मई 2026 में नई दिल्ली में होगी. बैठक में सभी सदस्य देशों के शामिल होने की संभावना है. हालांकि, ईरान और चीन के विदेश मंत्री, इसमें शामिल होंगे या नहीं, इसकी सूचना आधिकारिक रूप से नई दिल्ली को नहीं मिली है. जहां तक चीन की बात है तो वो हर बार अंतिम समय आकर इस मसले पर फैसला लेता है. ईरान चाहता है कि भारत ब्रिक्स बैठक में अमेरिका इजरायल के खिलाफ वॉर थोपने के लिए निंदा प्रस्ताव लाए. इससे नई दिल्ली एक नाजुक कूटनीतिक स्थिति में आ गई है, क्योंकि सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं.

भारत पश्चिम एशिया संकट पर आम सहमति बनाने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है. भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ब्रिक्स सदस्य देश वर्तमान स्थिति में सीधे तौर पर शामिल हैं और सदस्य देशों के बीच मतभेदों के कारण समूह के लिए आम सहमति बनाना मुश्किल हो गया है.

BRICS में कितने देश और कौन-कौन?

BRICS अब सिर्फ 5 देशों का समूह नहीं रहा. इसमें Brazil, Russia, India, China और South Africa के अलावा नए सदस्य भी जुड़े हैं, जिनमें इंडोनेशिया, Saudi Arabia, UAE, Egypt, Iran और Ethiopia शामिल हैं.

किसने दी सहमति, कौन अब भी सस्पेंस में?

भारत, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने बैठक में भाग लेने की पुष्टि कर दी है. वहीं चीन के विदेश मंत्री की उपस्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. ईरान की ओर से भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, जिससे समिट की दिशा पर असर पड़ सकता है.

इस बार BRICS बैठक अहम क्यों?

दुनिया इस समय कई बड़े संकटों से जूझ रही है. यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट तनाव की वजह से पूरी दुनिया आर्थिक अस्थिरता के दौर में है. ऐसे में BRICS एक वैकल्पिक वैश्विक मंच के रूप में उभर रहा है. भारत के लिए यह मौका है कि वह अपनी भूमिका को और मजबूत करे और वैश्विक दक्षिण की आवाज बने.

ब्रिक्स कब से अस्तित्व में है?

BRICS का औपचारिक गठन 2009 में हुआ था. इसका पहला शिखर सम्मेलन 16 जून 2009 को Yekaterinburg (रूस) में आयोजित किया गया था. शुरुआत में यह समूह BRIC (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन) के नाम से बना था. बाद में 2010 में South Africa इसके साथ जुड़ा, जिसके बाद इसका नाम BRICS हो गया.

यह समूह दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है और आर्थिक सहयोग, विकास और वैश्विक संतुलन पर काम करता है. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में आधार और यूपीआई जैसे भारतीय मॉडल शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार उभरती अर्थव्यवस्थाओं की प्रमुख मांग रही है. यह बैठक भारत के लिए वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक क्षमता दिखाने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है. इसके माध्यम से भारत न केवल अपने नेतृत्व को सुदृढ़ करेगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी अहम भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ेगा.

नरेंद्र मोदी
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