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एक मिसाइल, कई निशाने- कितनी खास है भारत की MIRV तकनीक, जिसने भारत को US और China की बराबरी में ला खड़ा किया?

भारत ने MIRV तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अग्नि-5 मिसाइल का टेस्ट किया. जानें यह तकनीक कितनी खास है और कैसे इससे भारत अमेरिका और चीन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हुआ.

एक मिसाइल, कई निशाने- कितनी खास है भारत की MIRV तकनीक, जिसने भारत को US और China की बराबरी में ला खड़ा किया?
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( Image Source:  @DRDO )

भारत ने एक बार फिर अपनी रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन करते हुए उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. शनिवार को रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस परीक्षण में मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे एक ही मिसाइल से कई परमाणु वारहेड अलग-अलग लक्ष्यों पर दागे जा सकते हैं. यह क्षमता सैकड़ों किलोमीटर तक फैले दुश्मन के ठिकानों को एक साथ निशाना बनाने में मदद करती है.

स्वदेशी रूप से विकसित Agni-5 मिसाइल का यह परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा स्थित Dr APJ Abdul Kalam Island से किया गया. इसे भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान मिसाइल को कई पेलोड के साथ उड़ाया गया, जिन्हें हिंद महासागर क्षेत्र में फैले अलग-अलग लक्ष्यों की ओर टारगेट किया गया.

MIRV तकनीक क्या है?

MIRV यानी Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle ऐसी तकनीक है, जिसमें एक मिसाइल कई वारहेड लेकर जाती है और हर वारहेड अलग-अलग लक्ष्य पर हमला कर सकता है. Agni-5 MIRV में अनुमानित तौर पर 4 से 5 वारहेड ले जाने की क्षमता बताई जाती है. वारहेड मिसाइल का वह विनाशकारी हिस्सा होता है जिसमें बारूद या फिर न्यूक्लियर भरा होता है. आसान भाषा में समझें तो मिसाइल एक टारगेट अनेक, यानी एक तीर से पांच निशाने.

किन देशों के पास है यह क्षमता?

भारत के अलावा यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, रूस, चीन और अमेरिका भी इस तकनीक से लैस हैं.

भारत के लिए कितनी अहम है यह उपलब्धि?

हालांकि आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया गया है कि अग्नि-5 के MIRV संस्करण में कितने वारहेड लगाए जा सकते हैं, लेकिन इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार यह संख्या चार या पांच हो सकती है. रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि यह उपलब्धि देश की रक्षा तैयारियों को “बेहद मजबूत” बनाएगी. इस टेस्ट के बाद भारत दुनिया की सुपर पावर कहे जाने वाले देशों के साथ आ खड़ा हुआ है.

पहली बार कब हुआ था टेस्ट?

भारत ने मार्च 2024 में पहली बार अग्नि-5 मिसाइल का MIRV तकनीक के साथ परीक्षण किया था. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस ऐतिहासिक परीक्षण को “मिशन दिव्यास्त्र” नाम दिया था. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया, जिनके पास MIRV मिसाइल सिस्टम तैनात करने की क्षमता है.

कितनी खास है अग्निन-5 मिसाइल?

  • अग्नि-5 मिसाइल तीन चरणों वाले ठोस ईंधन इंजन पर आधारित है और इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक है. MIRV तकनीक वाली मिसाइलें पारंपरिक एकल वारहेड वाली मिसाइलों की तुलना में अधिक प्रभावी और विनाशकारी मानी जाती हैं.
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO द्वारा विकसित अग्नि सीरीज में अग्नि-1 (700 किमी), अग्नि-2 (2,000 किमी), अग्नि-3 (3,000 किमी) और अग्नि-4 (4,000 किमी) भी शामिल हैं.
  • अग्नि-5 MIRV प्रणाली में स्वदेशी एवियोनिक्स और उच्च सटीकता वाले सेंसर लगाए गए हैं. 2024 के परीक्षण का नेतृत्व DRDO की एक महिला वैज्ञानिक ने किया था, जिसमें अन्य महिला वैज्ञानिक भी शामिल थीं.

भारत के पास कितनी ताकत?

भारत के पास जमीन, हवा और समुद्र- तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता है. अप्रैल में भारतीय नौसेना ने अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridaman को विशाखापट्टनम में सेवा में शामिल किया. यह कदम देश की परमाणु त्रयी (न्यूक्लियर ट्रायड) को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है. अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के अलावा भारत भी उन देशों में शामिल है, जिनके पास पनडुब्बी से परमाणु हथियार दागने की क्षमता है.

भारत के पास कितने वॉर हेड?

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 तक भारत के पास करीब 180 परमाणु वारहेड हैं. वहीं चीन के पास लगभग 600 और पाकिस्तान के पास करीब 170 वारहेड मौजूद हैं.

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