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अपनी मर्जी से प्रॉस्टिट्यूशन करने वालों को नहीं कर सकते गिरफ्तार! सुप्रीम कोर्ट की पुलिस को दो टूक

सेक्स वर्क को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है. अदालत ने कहा है कि यदि कोई बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करता है, तो सिर्फ इसी आधार पर उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

अपनी मर्जी से प्रॉस्टिट्यूशन करने वालों को नहीं कर सकते गिरफ्तार! सुप्रीम कोर्ट की पुलिस को दो टूक
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अपनी मर्जी से प्रॉस्टिट्यूशन करना गैरकानूनी नहीं

( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 2 Jun 2026 4:48 PM IST

भारत में सेक्स वर्क को लेकर अक्सर लोगों के मन में भ्रम रहता है. बहुत से लोग मानते हैं कि सेक्स वर्क करना पूरी तरह गैरकानूनी है, लेकिन कानून की तस्वीर थोड़ी अलग है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करती है, तो सिर्फ इसी वजह से उसे अपराधी नहीं माना जा सकता.

अदालत ने पुलिस को भी सख्त मैसेज दिया है कि ऐसी महिलाओं को बेवजह परेशान न किया जाए. कोर्ट का कहना है कि उन्हें भी बाकी नागरिकों की तरह सम्मान और गरिमा के साथ जीने का पूरा अधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यदि कोई बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करता है, तो उसे अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. अदालत के अनुसार, केवल इस वजह से किसी को हिरासत में लेना, गिरफ्तार करना या सुधार गृह भेजना सही नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि सेक्स वर्कर्स को भी देश के अन्य नागरिकों की तरह सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है.. उन्हें संविधान द्वारा दिए गए सभी मूल अधिकार प्राप्त हैं.

कब होगा अपराध?

अदालत ने साफ किया कि अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करना और किसी को मजबूर करके देह व्यापार में धकेलना, दोनों अलग बातें हैं. अगर किसी व्यक्ति को धोखा देकर, दबाव डालकर या जबरदस्ती सेक्स वर्क के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह अपराध है. ऐसे मामलों में इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट यानी ITPA लागू होता है और सख्त कार्रवाई की जाती है.

ITPA कानून क्या कहता है?

भारत में 1956 में इमोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट बनाया गया था. इस कानून में कई गतिविधियों को अपराध माना गया है.

  • देह व्यापार के लिए मकान या जगह देना अपराध है.
  • सेक्स वर्कर की कमाई पर निर्भर रहना अपराध माना जाता है.
  • किसी को बहला-फुसलाकर या मजबूर करके देह व्यापार में लाना अपराध है.
  • स्कूल, मंदिर या अन्य सार्वजनिक और धार्मिक स्थानों के 200 मीटर के दायरे में सेक्स वर्क करना भी कानून के खिलाफ है.

सेक्स वर्कर्स के अधिकारों पर कोर्ट का जोर

बुद्धदेव कर्माकर बनाम पश्चिम बंगाल सरकार मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सेक्स वर्कर्स भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है. अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई थी कि कई मामलों में पुलिस का बर्ताव उनके प्रति संवेदनशील नहीं होता, जिससे उनके आत्मसम्मान और गरिमा पर नकारात्मक असर पड़ता है.

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