Vadh 2 Review: स्लो-बर्न क्राइम थ्रिलर, संजय मिश्रा-नीना गुप्ता ने फिर जीता दिल; जानें बिना स्पॉइलर के फिल्म प्लॉट
संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की फिल्म 'वध 2' एक जेल आधारित स्लो-बर्न क्राइम थ्रिलर है, जो नैतिकता और न्याय के सवाल उठाती है.फिल्म को एक्स पर शानदार रिव्यू मिल रहे हैं, हालांकि कुछ दर्शकों ने इसे लेकर कड़ी आलोचना भी की है.
Vadh 2 Review: 'वध 2' (Vadh 2) फिल्म 6 फरवरी 2026 को थिएटर्स में रिलीज़ हुई है. यह संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की जोड़ी की नई क्राइम-थ्रिलर है, जिसे जसपाल सिंह संधू ने लिखा और डायरेक्ट किया है. यह 2022 की फिल्म 'वध' का सीक्वल नहीं है, बल्कि स्पिरिचुअल सीक्वल या इसी तरह की थीम वाली नई कहानी है. फिल्म जेल के अंदर सेट है, जहां एक प्रिजन गार्ड और एक इनमेट के बीच अनोखा बॉन्ड बनता है.
नैतिक दुविधा, छिपी सच्चाई और उसके परिणामों पर आधारित यह एक स्लो-बर्न थ्रिलर है, जिसमें प्लेटोनिक लव, बदला, अपराध और जेल की कड़वी हकीकत दिखाई गई है. संजय मिश्रा और नीना गुप्ता नए किरदारों में हैं, साथ ही कुमुद मिश्रा, अमित के. सिंह जैसे कलाकार हैं. फिल्म पॉजिटिव रिव्यू मिल रहा है. एक्स हैंडल पर फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे है.
एक्स यूजर्स का रिएक्शन
@nitinnsethi ने लिखा, 'वध 2 ध्यान आकर्षित करने के लिए शोर नहीं मचाती. यह अपने दर्शकों पर भरोसा करते हुए, अपनी कहानी की परतें धीरे-धीरे खोलती है. यह एक धीमी गति से आगे बढ़ने वाला क्राइम थ्रिलर है, जो स्क्रिप्टिंग की बदौलत आगे बढ़ती है, न कि स्टार पावर की बदौलत.'
@Gaurav_5599 ने लिखा, 'बेहतरीन एक्टर के लिए #Vadh2 देखें. मैं उनकी कला और उनके व्यक्तित्व का बहुत बड़ा फैंस हूं. आइए #Vadh2 #SanjayMishra #NeenaGupta जैसी दमदार और विषय-प्रधान फिल्मों का समर्थन करें.'
एक ने लिखा, 'जब एक्टर सिनेमा के लिए बोलते हैं, तो आप सुनते हैं. संजय मिश्रा और नीना गुप्ता के दम पर बड़े पर्दे का अनूठा जादू फिर से जीवंत हो उठता है, और #Vadh2 सिनेमाघरों में देखने के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है. जसपाल सिंह संधू द्वारा लिखित और निर्देशित तथा लव रंजन और अंकुर गर्ग द्वारा निर्मित, यह फिल्म उन कहानियों के बारे में है जिन्हें सिर्फ देखा नहीं जाना चाहिए, बल्कि महसूस किया जाना चाहिए.
हालांकि एक रिव्यू बेहद निगेटिव रहा. एक ने लिखा, 'मैं शायद दवाइयों की सलाह मान लूं, लेकिन फ़िल्म रिव्यू नहीं. इस फ़िल्म में छिपे दुष्प्रचार को कोई कैसे नहीं देख सकता? यह बेहद घटिया और घिनौनी फ़िल्म है. ऐसी फ़िल्म कभी अच्छी नहीं हो सकती, जब उसमें जबरदस्ती बातें थोपी जा रही हों.'
बिना मेजर स्पॉइलर के फिल्म प्लॉट
फिल्म की कहानी शिवपुरी जेल (मध्य प्रदेश) में सेट है. यहां दो मुख्य किरदार हैं शंभूनाथ मिश्रा (शंभु) संजय मिश्रा द्वारा निभाया गया एक लो-रैंकिंग जेल कांस्टेबल/गार्ड, जो रिटायरमेंट के करीब है. वो सिस्टम से थका हुआ, लोन के बोझ तले दबा हुआ आदमी है. अपनी छोटी-मोटी कमाई बढ़ाने के लिए वो जेल के अंदर सब्जियां उगाकर बाहर बेचता है. उसका बेटा विदेश में है और संपर्क में नहीं आता, जिससे वो अकेला और मजबूर महसूस करता है. वहीं मंजू सिंह नीना गुप्ता द्वारा निभाई गई एक महिला कैदी, जिसे डबल मर्डर के आरोप में 28 साल की सजा हुई है वो कहती है कि वो बेकसूर है. अब उसकी सजा खत्म होने वाली है, और वो बाहर की दुनिया से डर रही है क्योंकि जेल में ही उसकी आदत हो गई है. शंभु और मंजू के बीच एक अनोखा, प्लेटोनिक इमोशनल बॉन्ड बनता है. वो जेल की दीवार के दोनों तरफ रहते हैं, छोटे-छोटे छेद या मुलाकातों से बात करते हैं, एक-दूसरे की छोटी-मोटी जरूरतें पूरी करते हैं जैसे शंभु मंजू के लिए देशी शराब या सामान पहुंचाता है. ये रिश्ता दोनों की अकेलेपन और दुखों को कम करता है.
क्या है कहानी का ट्विस्ट
कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब जेल में एक नया खूंखार कैदी आता है केशव (भूरी भैया) (अक्षय डोगरा), जो एक पावरफुल पॉलिटिशियन का भाई/रिश्तेदार है. वो जेल के अंदर ही आतंक मचाता है. बूढ़ों को पीटता है, जानवरों पर अत्याचार करता है, और एक युवा कैदी नैना (योगिता बिहानी) पर भी नजर रखता है, जो बेकसूर फंसाई गई है. एक रात कुछ ऐसा होता है कि केशव रहस्यमयी तरीके से गायब हो जाता है. इससे जेल में हड़कंप मच जाता है. जांच शुरू होती है, जिसमें कई लोग संदिग्ध बनते हैं जैसे जेलर प्रकाश सिंह (कुमुद मिश्रा), अन्य अधिकारी, और शंभु-मंजू का रिश्ता भी जांच के दायरे में आता है. फिल्म नैतिक दुविधा (moral dilemma), सच छिपाने की मजबूरी, बदला, जेल सिस्टम की क्रूरता, बुढ़ापे की अकेलापन, और न्याय के सवाल उठाती है. ये एक स्लो-बर्न क्राइम थ्रिलर है, जहां एक्शन कम है, लेकिन सस्पेंस, ट्विस्ट और परफॉर्मेंस से बांधे रखती है. क्लाइमेक्स में बड़े रिवील्स हैं, जो सोचने पर मजबूर करते हैं कि 'वध' क्या होता है हत्या या न्याय? कुल मिलाकर, ये पहली फिल्म 'वध' से अलग कहानी है (सिर्फ किरदारों के नाम और एक्टर्स वही हैं, रिलेशन नहीं), लेकिन थीम्स जैसे न्याय, मजबूरी और नैतिकता एक जैसी हैं.
.....





