कैसे कट रहे है तिहाड़ में Rajpal Yadav के दिन? मेन्यू के हिसाब से खाना-समय के साथ उठना; नहीं मिला रहा VIP ट्रीटमेंट
बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव 9 करोड़ रुपये के पुराने चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं. वे आम कैदी की तरह जीवन जीते हुए कैदियों को अपनी फिल्मों के मजेदार डायलॉग सुनाकर माहौल हल्का कर रहे हैं.
बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन और एक्टर राजपाल यादव (Rajpal Yadav) इन दिनों दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. उनके फैंस और जेल के अन्य कैदी उन्हें देखकर बहुत खुश हो रहे हैं. जेल प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, राजपाल यादव को जेल नंबर-2 में रखा गया है. शुरुआत में पहले 24 घंटे वे काफी शांत और चुपचाप रहे, लेकिन अब वे धीरे-धीरे अपनी पुरानी वाली मस्ती में आ गए हैं.
वे जेल के कैदियों को खूब हंसाते हैं, कैदी जब उनसे कहते हैं तो वे अपनी पुरानी फिल्मों के मजेदार कॉमेडी सीन और डायलॉग सुनाने लगते हैं. ठहाके लगते हैं, माहौल हल्का-फुल्का हो जाता है. राजपाल यादव बिल्कुल आम कैदी की तरह ही रह रहे हैं, कोई नखरे या स्पेशल व्यवहार नहीं कर रहे, यह सब इसलिए हुआ क्योंकि एक पुराने चेक बाउंस के मामले में उन्हें जेल आना पड़ा.
क्या है मामला?
यह मामला लगभग 9 करोड़ रुपये का है. साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए कुछ लोगों से लोन लिया था, लेकिन उसे समय पर चुकता नहीं कर पाए. चेक बाउंस होने पर कई केस दर्ज हुए और कोर्ट ने सजा सुनाई. फरवरी 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्होंने 5 फरवरी को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया. कोर्ट ने उनकी जमानत की अर्जी भी खारिज कर दी है, इसलिए फिलहाल वे जेल में ही रहेंगे. जेल में पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हो गई. उनके ढेर सारे फैंस और दोस्त मदद के लिए आगे आए. कुछ लोग पैसे देने की पेशकश कर रहे हैं, कुछ उनकी हालत पर दुख जता रहे हैं.
कैसे कट रहे है जेल में दिन?
जेल के अंदर राजपाल यादव की दिनचर्या बिल्कुल सामान्य कैदियों जैसी है. सुबह उन्हें बैरक से बाहर निकलने दिया जाता है. वे फ्रेश होते हैं, फिर जेल की तरफ से चाय और नाश्ता मिलता है. दिन भर जेल के अंदर ही रहते हैं. शाम को 7 बजे रात का खाना मिलता है. रात 10 बजे तक वे सो जाते हैं और सुबह 5-6 बजे के आसपास उठ जाते हैं.
क्या रहता है मेन्यू में?
उन्होंने बाहर से कोई स्पेशल सुविधा या VIP ट्रीटमेंट मांगने की कोशिश नहीं की है. खाना-पीना भी जेल के नियमित मेन्यू के हिसाब से ही मिलता है- दाल, सब्जी, रोटी, चावल वगैरह. जेल मैनुअल के सारे नियमों का पालन वे पूरी तरह कर रहे हैं, जैसे सुबह समय पर उठना, हाजिरी देना, साफ-सफाई करना आदि. कोई ढील नहीं मिल रही है.
क्या बोला कैदियों से?
कैदी उन्हें देखते ही खुश हो जाते हैं. दिन भर कई कैदी उनकी झलक पाने या पास आने की कोशिश करते रहते हैं. जैसे ही वे नजर आते हैं, सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. राजपाल यादव अपनी बैरक के साथियों से खुलकर बात करते हैं. वे बेझिझक बताते हैं कि जेल आने की वजह क्या थी, वे कहते हैं कि उनकी नीयत कभी बेईमानी करने की नहीं थी, लेकिन हालात ऐसे बने कि उन्हें सलाखों के पीछे आना पड़ा. वे कैदियों को यह भी बताते हैं कि अच्छे समय में सब साथ देते हैं, लेकिन मुश्किल वक्त में अकेला छोड़ देते हैं. उनकी बातें सुनकर कैदी उन्हें और ज्यादा पसंद करने लगे हैं. कुल मिलाकर, तिहाड़ जेल में राजपाल यादव अपनी कॉमेडी से माहौल हल्का रख रहे हैं, लेकिन साथ ही जेल के सख्त नियमों का भी पूरा पालन कर रहे हैं.





