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डॉक्टर बनने का था सपना, फिर 10 हजार रुपये में शुरू किया बिजनेस, बिलेनियर किरण मजूमदार-शॉ ऐसे बनीं Biocon की बॉस

डॉक्टर बनने का सपना पूरा न होने पर किरण मजूमदार-शॉ ने हार नहीं मानी और महज 10 हजार रुपये से अपना बिजनेस शुरू किया. कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने Biocon को एक बड़ी कंपनी बनाया.

Kiran Mazumdar Shaw
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कौन हैं किरण मजूमदार शॉ
( Image Source:  x-@kiranshaw )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 30 March 2026 4:03 PM IST

डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली किरण मजूमदार-शॉ की जिंदगी ने एक अलग मोड़ लिया, जब उन्हें स्कॉलरशिप नहीं मिल पाई. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय नया रास्ता चुना और फर्मेंटेशन साइंस की पढ़ाई कर अपने करियर की नई शुरुआत की. यही फैसला आगे चलकर उनकी सफलता की नींव बना.

Hurun 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, किरण मजूमदार-शॉ 3.4 अरब डॉलर की मालकिन हैं. वह दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं की लिस्ट में 37वें स्थान पर हैं. महज 10 हजार रुपये से छोटे से गैरेज में बिजनेस शुरू करने वाली किरण ने तमाम चुनौतियों का सामना किया. फिर भी अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने Biocon को एक बड़ी बायोफार्मा कंपनी बना दिया और आज वह एक सफल बिलेनियर के रूप में जानी जाती हैं.

कौन हैं किरण मजूमदार-शॉ?

किरण मजूमदार-शॉ भारत की जानी-मानी उद्योगपति और बायोकॉन कंपनी की फाउंडर हैं. उनका जन्म बेंगलुरु में हुआ और उन्होंने अपने करियर में एक अलग रास्ता चुना. शुरुआत में उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें दूसरी दिशा में आगे बढ़ने के लिए इंस्पायर किया.

मेलबर्न यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई

किरण के पिता ब्रूमास्टर थे, जिन्होंने उन्हें फर्मेंटेशन साइंस पढ़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने मेलबर्न यूनिवर्सिटी से इस विषय में पढ़ाई की और अपनी कक्षा में टॉप किया. जहां वह अपनी क्लास में अकेली महिला थी. हालांकि, भारत लौटने पर उन्हें कई जगह नौकरी नहीं मिली, क्योंकि क्योंकि ब्रूइंग को "पुरुषों का काम" माना जाता था.

स्कॉटलैंड में की नौकरी

खुद को साबित करने के लिए दृढ़ किरण ने स्कॉटलैंड में नौकरी कर ली, जहां उनकी मुलाक़ात Biocon के संस्थापक से हुई. उन्होंने इसमें एक अवसर देखा और Biocon के विज़न को भारत लाने का फ़ैसला किया.

10 हजार रुपये से शुरू किया बिजनेस

लगातार असफलताओं के बावजूद किरण ने हार नहीं मानी. 25 साल की उम्र में उन्होंने महज 10,000 रुपये से एक छोटे से गैरेज में बायोकॉन की शुरुआत की. उस समय न तो बैंकों ने उनका साथ दिया और न ही निवेशकों ने उन पर भरोसा जताया. लेकिन उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदलते हुए अपने बिजनेस को आगे बढ़ाया.

आज की बड़ी पहचान

किरण मजूमदार-शॉ ने बायोकॉन को भारत की अग्रणी बायोफार्मा कंपनी बना दिया. उनकी कंपनी ने एंजाइम्स के प्रोडक्शन और निर्यात में नई राह दिखाई. आज वह एक सफल सेल्फ-मेड अरबपति हैं और उनकी संपत्ति अरबों में आंकी जाती है. उनका सफर यह साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती.


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