अमेरिकी वीजा के लिए लंबा होता जा रहा भारतीयों का इंतजार, कोविड से पहले लगते थे 42 दिन, अब 1 साल तक का हुआ वेट, क्या है वजह?
भारतीयों के लिए अमेरिकी वीजा इंटरव्यू का इंतजार बढ़कर 346 दिन तक पहुंच गया है. जानें वीजा वेट बढ़ने की वजह, अलग-अलग शहरों का वेटिंग टाइम और कितनी है फीस.
अमेरिका का वीजा लेने की तैयारी कर रहे भारतीयों के लिए परेशानी बढ़ गई है. एक तरफ वीजा इंटरव्यू के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ वीजा लेने की लागत भी बढ़ गई है. अमेरिकी सरकार की ऑडिट एजेंसी Government Accountability Office (GAO) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में भारत में नॉन-इमिग्रेंट वीजा के लिए इंटरव्यू का औसत इंतजार 346 दिन रहा है.
वहीं बात करें कोविड से पहले की को यह औसत सिर्फ 42 दिन था. यानी अब भारतीय आवेदकों को इंटरव्यू के लिए आठ गुना से भी ज्यादा समय इंतजार करना पड़ रहा है. आखिर क्या है इसके पीछे की वजह? 10 Points में समझते हैं.
आखिर क्यों लग रहा है इतना वक्त?
वित्त वर्ष 2025 में भारत में नॉन-इमिग्रेंट वीजा के लिए करीब 1.45 मिलियन यानी 14.5 लाख आवेदन आए. इन्हें संभालने के लिए सिर्फ 68 कांसुलर अधिकारी तैनात थे. 68 अधिकारियों और 14.5 लाख आवेदनों के हिसाब से एक कांसुलर अधिकारी पर औसतन करीब 21,401 आवेदन आए. GAO की जांच में यह सबसे ज्यादा अधिकारियों के वर्कलोड में से एक था.
उधर, अमेरिका में विजिटर वीजा के मामलों की तादाद वित्त वर्ष 2019 में 92 लाख थी, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 1.17 करोड़ हो गई. यानी महामारी से पहले के स्तर की तुलना में मांग काफी बढ़ गई.
क्या अधिकारियों की कम हो रही तादाद?
जब वीजा की मांग बढ़ रही थी, उसी दौरान नॉन-इमिग्रेंट वीजा पर काम करने वाले कांसुलर अधिकारियों की संख्या कम हो गई. वित्त वर्ष 2024 में इन अधिकारियों की संख्या 1,342 थी, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर 904 रह गई. रिपोर्ट के मुताबिक, हायरिंग फ्रीज और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की वजह से यह संख्या कम हुई. इसके साथ ही अमेरिका में विजिटर वीजा इंटरव्यू का औसत इंतजार भी वित्त वर्ष 2019 के 26 दिन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 201 दिन हो गया.
भारत पर क्यों पड़ रहा है ज्यादा असर?
GAO ने बताया कि भारत और मैक्सिको में इंटरव्यू के लिए इंतजार चीन और ब्राजील की तुलना में ज्यादा रहा. रिपोर्ट में मांग के मुकाबले कर्मचारियों की संख्या को इसका एक अहम कारण बताया गया है. भारत में आवेदनों की संख्या ज्यादा थी, जबकि उन्हें संभालने के लिए उपलब्ध स्टाफ कम था.
17 सितंबर को अपडेट किए गए अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में B1/B2 वीजा के लिए अभी भी लंबी अपॉइंटमेंट कतारें हैं. ये वीजा मुख्य रूप से बिजनेस विजिट और टूरिज्म के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.
किस शहर के लोगों को कितना औसतन वक्त लगता है?
- हैदराबाद: करीब 12 महीने
- मुंबई: करीब 11.5 महीने
- नई दिल्ली: करीब 10 महीने
- चेन्नई: करीब 7.5 महीने
- कोलकाता: करीब 6.5 महीने
ये समय पक्की डेडलाइन नहीं हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, नए अपॉइंटमेंट स्लॉट नियमित रूप से जारी किए जाते हैं. जिन लोगों की पहले से अपॉइंटमेंट बुक है, वे दोबारा चेक करके उपलब्ध होने पर पहले की तारीख चुन सकते हैं.
क्या हर वीज़ा कैटेगरी में इतना लंबा इंतेजार?
लंबा इंतजार सभी अमेरिकी वीजा कैटेगरी के लिए समान नहीं है. F, M और J कैटेगरी के स्टूडेंट और एक्सचेंज विजिटर वीजा के लिए भारतीय कांसुलेट में इंतजार काफी कम है. हाल के आंकड़ों में चेन्नई में यह समय आधे महीने से भी कम, जबकि मुंबई में करीब 2.5 महीने तक था. इसी तरह H, L, O, P और Q जैसी वर्क से जुड़ी वीजा कैटेगरी में भी आमतौर पर B1/B2 की तुलना में कम इंतजार है, हालांकि कुछ जगहों पर इनमें भी देरी बढ़ी है.
अमेरिकी वीजा की फीस कितनी है?
B1/B2 विजिटर वीजा के लिए मौजूदा स्टैंडर्ड एप्लिकेशन प्रोसेसिंग फीस 185 डॉलर है. यही 185 डॉलर की फीस कई अन्य नॉन-पिटीशन आधारित वीजा कैटेगरी, जैसे F, M और J के लिए भी लागू है. वहीं H, L, O और P जैसे पिटीशन आधारित वीजा की एप्लिकेशन फीस 205 डॉलर है.
इसके अलावा अमेरिकी कांग्रेस ने 2025 के इमिग्रेशन कानून के तहत नॉन-इमिग्रेंट वीजा आवेदकों के लिए 250 डॉलर की नई Visa Integrity Fee का प्रावधान किया है. कानून के अनुसार यह फीस दूसरी अधिकृत वीजा फीस के अतिरिक्त होगी और वित्त वर्ष 2026 से इसमें महंगाई के हिसाब से सालाना बदलाव का प्रावधान भी है.




