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Hum Auratein Azaad Hain: एक सुट्टा दो चाय, मर्द जात हाय-हाय...DU में क्यों गूंज रहे ये नारे? देखिए सोशल में बवाल मचाने वाले 8 VIDEO

दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्राएं ‘Hum Auratein Azaad Hain’ मार्च क्यों कर रही हैं? जानें ‘रेपिस्ट को अंदर करो’ और ‘1 कचौरी, 2 समोसा’ नारों का मतलब.

Hum Auratein Azaad Hain: एक सुट्टा दो चाय, मर्द जात हाय-हाय...DU में क्यों गूंज रहे ये नारे? देखिए सोशल में बवाल मचाने वाले 8 VIDEO
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दिल्ली यूनिवर्सिटी की सड़कों पर इन दिनों कुछ ऐसे नारे सुनाई दे रहे हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर खूब ध्यान खींचा है. हाथों में पोस्टर, जुबान पर 'आज़ादी' और नारों में गुस्सा...महिला छात्राओं के मार्च का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कोई कह रहा है- 'हम औरतें आजाद हैं', तो कोई नारा लगा रहा है- 'रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं.'

इन प्रदर्शनों का सबसे ज्यादा चर्चित हिस्सा बने हैं कुछ मजेदार लेकिन तीखे स्लोगन. '1 कचौरी, 2 समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा' और 'गली-गली में शोर है, मर्द जात चोर है' एक चाय दो समोसा इन मर्दों का क्या भरोसा. जैसे नारे सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. लेकिन सवाल सिर्फ इन नारों का नहीं है. आखिर दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्राएं सड़कों पर क्यों उतर रही हैं? इस प्रदर्शन की शुरुआत किस घटना के बाद हुई और छात्राओं की मांग क्या है?

DU की छात्राएं क्यों कर रही हैं मार्च?

दिल्ली यूनिवर्सिटी की महिला छात्रों ने इस महीने 'Hum Auratein Azaad Hain' बैनर के तहत कई मार्च निकाले हैं. इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से महिला और क्वीर प्रतिभागियों की भागीदारी रही है. इन मार्चों का संदर्भ दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क के पास एक 17 वर्षीय लड़की के कथित गैंगरेप की घटना से जुड़ा बताया जा रहा है. इस घटना के बाद छात्राओं ने महिलाओं की सुरक्षा, हिंसा और महिलाओं पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज उठाई.

'हम औरतें आजाद हैं' क्यों बना प्रदर्शन का चेहरा?

'Hum Auratein Azaad Hain' इन मार्चों का प्रमुख नारा है. मिरांडा हाउस, कमला नेहरू कॉलेज, लेडी श्री राम कॉलेज और गार्गी कॉलेज से जुड़ी छात्राओं के प्रदर्शनों में यह नारा देखने-सुनने को मिला है. इसके साथ ही 'आजादी, आजादी', 'डर के आगे आजादी' और 'पिंजरा तोड़ना नहीं छोड़ेंगे' जैसे नारे भी लगाए गए. इन नारों का संदेश महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आवाजाही या आजादी पर रोक लगाने के बजाय हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग से जुड़ा है.

‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं’ क्यों वायरल है?

प्रदर्शन में सबसे ज्यादा चर्चा जिन नारों की हो रही है, उनमें एक है- ‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं.’ इस नारे के जरिए प्रदर्शनकारी छात्राएं यह सवाल उठा रही हैं कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आजादी और आवाजाही पर प्रतिबंध क्यों लगाया जाए. उनकी मांग है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी महिलाओं पर पाबंदी लगाने के बजाय अपराध करने वालों पर कार्रवाई के जरिए सुनिश्चित की जाए.

‘1 कचौरी, 2 समोसा...’ वाले नारे में क्या है?

सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा शेयर किए जा रहे नारों में यह भी शामिल है.‘1 कचौरी, 2 समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा.’ इसके अलावा एक और नारा है- ‘एक सुत्ता, दो चाय, मर्द जात हाय-हाय.’ यानी प्रदर्शन में गंभीर मुद्दों के साथ व्यंग्य, तंज और पॉप-कल्चर वाली भाषा का भी इस्तेमाल किया गया है. यही वजह है कि मार्च के वीडियो और पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आए.

‘हमारी स्कर्ट नहीं है छोटी, इन मर्दों की सोच है छोटी’

महिलाओं के कपड़ों को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी प्रदर्शन में सवाल उठाए गए. एक पोस्टर पर लिखा था- ‘हमारी स्कर्ट नहीं है छोटी, इन मर्दों की सोच है छोटी.’ इसी तरह ‘बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो’ जैसे संदेश भी दिखाई दिए. इन नारों के जरिए प्रदर्शनकारी उस सोच पर सवाल उठा रही हैं जिसमें महिलाओं की सुरक्षा को उनके कपड़ों, बाहर निकलने के समय या लोकेशन से जोड़कर देखा जाता है. ‘Girls just wanna have fundamental rights’ भी चर्चा में. मार्च में हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी कई नारे दिखाई दिए. इनमें- ‘Girls just wanna have fundamental rights’ और ‘We should not need a protest to feel safe’ जैसे मैसेज शामिल हैं. एक अन्य पोस्टर में लिखा था- ‘Make Delhi Safe Again.’ यानी प्रदर्शन में महिलाओं की सुरक्षा के साथ उनके संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाया गया.

Nirbhaya केस का जिक्र क्यों आया?

प्रदर्शन के दौरान 16 दिसंबर 2012 के दिल्ली गैंगरेप और हत्या मामले का भी संदर्भ देखने को मिला. कुछ पोस्टरों पर लिखा गया- ‘Nothing changed since Dec 16, 2012’ और ‘Nirbhayas are still happening in India.’ इन नारों के जरिए प्रदर्शनकारी छात्राएं महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे की ओर ध्यान खींच रही हैं.

'चुप रहना अब बंद करो... हल्ला बोल' का क्या मतलब?

प्रदर्शन में एक और नारा सुनाई दिया- ‘चुप रहना अब बंद करो... हल्ला बोल! हल्ला बोल!’ इसका संदेश महिलाओं को हिंसा और असुरक्षा के मुद्दे पर चुप न रहने और अपनी आवाज उठाने के आह्वान से जुड़ा है. सोशल मीडिया के लिए प्रदर्शन करने के आरोप पर भी जवाब इन प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठाया गया कि क्या युवा सिर्फ Instagram Reels बनाने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं? वहीं कुछ पोस्टरों पर ‘बस बहुत हो गया’, ‘Cute नहीं, क्रांति है हम’ और ‘मामा ने एक महिला को पाला है, कायर को नहीं’ जैसे संदेश भी देखने को मिले.

आखिर इन प्रदर्शनों की मुख्य मांग क्या है?

पूरे प्रदर्शन को देखें तो इसके केंद्र में तीन बड़े मुद्दे दिखाई देते हैं-महिलाओं की सुरक्षा, महिलाओं की स्वतंत्रता और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई. प्रदर्शनकारी छात्राएं यह सवाल उठा रही हैं कि किसी अपराध के बाद महिलाओं की आवाजाही, कपड़ों या जीवनशैली पर प्रतिबंध लगाने के बजाय अपराध करने वालों पर कार्रवाई क्यों न हो. यही वजह है कि ‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं’ जैसे नारे इस पूरे आंदोलन का सबसे सीधा संदेश बनकर सामने आए हैं.

DU से सोशल मीडिया तक क्यों पहुंचा मामला?

नारों की भाषा, पोस्टरों की डिजाइन और Gen-Z शैली के संदेशों ने इन प्रदर्शनों को सोशल मीडिया पर खूब चर्चा दिलाई है. ‘1 कचौरी, 2 समोसा...’, ‘हम औरतें आजाद हैं’, ‘रेपिस्ट को अंदर करो...’ जैसे स्लोगन छोटे वीडियो और पोस्ट के जरिए तेजी से शेयर किए जा रहे हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी नारे या वीडियो का वायरल होना अपने आप में प्रदर्शन की व्यापकता या उसके प्रभाव का स्वतंत्र प्रमाण नहीं है. इन मार्चों का मुख्य मुद्दा महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर छात्राओं की आवाज है.

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