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E20 से कम हुआ माइलेज तो गडकरी बोले- हम ऐसे चेक नहीं कर सकते, जानें किन-किन तरीकों से चेक कर सकते हैं गाड़ी का एवरेज: Detail

E20 पेट्रोल से माइलेज कम होने के विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कार का सही माइलेज आम लोग खुद नहीं माप सकते. जानिए डीलर की डायग्नोस्टिक मशीन क्या जांचती है, फुल-टैंक मेथड कितना सटीक है और E20 पेट्रोल पर सरकार ने माइलेज को लेकर क्या स्वीकार किया है.

E20 से कम हुआ माइलेज तो गडकरी बोले- हम ऐसे चेक नहीं कर सकते, जानें किन-किन तरीकों से चेक कर सकते हैं गाड़ी का एवरेज: Detail
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समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी6 Mins Read

Updated on: 14 July 2026 10:13 AM IST

देशभर में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि आम कार मालिक अपनी गाड़ी का सही माइलेज खुद नहीं माप सकते. उन्होंने कहा कि वाहन की वास्तविक फ्यूल एफिशिएंसी का सही आकलन केवल कंपनी के अधिकृत डीलर के पास मौजूद मशीन से ही किया जा सकता है.

सोमवार को ABP News को दिए एक इंटरव्यू में गडकरी से एक पत्रकार ने शिकायत की कि सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए E20 पेट्रोल पर स्विच करने के बाद उनकी कार का माइलेज शहर में 11 किलोमीटर प्रति लीटर से घटकर 7 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया है. इस पर गडकरी ने पूछा कि यह माइलेज कैसे मापा गया.

क्या बोले नितिन गडकरी?

पत्रकार ने बताया कि उन्होंने अपनी 2023 में खरीदी गई कार, जो संभवतः E20 ईंधन के मुताबिक है, उसके डैशबोर्ड पर दिख रहे माइलेज के आधार पर यह आंकड़ा देखा है. इस पर नितिन गडकरी ने कहा कि डैशबोर्ड देखकर सही माइलेज नहीं मापा जा सकता. उन्होंने कहा, "आप और मैं कार का सही माइलेज नहीं जांच सकते. कार का माइलेज केवल कंपनी के अधिकृत डीलर की मशीन से ही जांचा जा सकता है."

गडकरी लंबे समय से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का समर्थन करते रहे हैं और उन्होंने एक बार फिर कहा कि सटीक फ्यूल एफिशिएंसी की जानकारी अधिकृत परीक्षण उपकरणों से ही मिल सकती है.

क्या सरकार ने भी माना, E20 पेट्रोल से माइलेज घट सकता है?

यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार ने हाल ही में स्वीकार किया है कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से फ्यूल एफिशिएंसी में 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. पिछले सप्ताह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम से जुड़े सवालों के जवाब में एक दस्तावेज जारी किया.

इसमें सरकार ने माना कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के कारण माइलेज कम हो सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि किसी ईंधन का मूल्यांकन केवल माइलेज के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए. मंत्रालय ने कहा, "यह सही है कि कुछ वाहनों में फ्यूल एफिशिएंसी 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है, लेकिन माइलेज ही एकमात्र मानक नहीं है."

देशभर में कब से लागू हुआ E20 पेट्रोल?

केंद्र सरकार ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से 1 अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है. हालांकि, इस फैसले के बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने की शिकायत की है. ऑटोमोबाइल उद्योग के कुछ वर्गों ने भी पुराने वाहनों में E20 पेट्रोल के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए हैं.

कैसे मांपा जाता है माइलेज?

रिपोर्ट के अनुसार, घर पर कार का माइलेज पूरी तरह सटीक तरीके से मापना संभव नहीं है, लेकिन इसका काफी भरोसेमंद अनुमान लगाया जा सकता है. आधुनिक कारें इंजन में जाने वाले ईंधन, तय की गई दूरी और इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) से मिलने वाले डेटा के आधार पर फ्यूल एफिशिएंसी का अनुमान लगाती हैं. डैशबोर्ड पर दिखाई जाने वाली माइलेज रीडिंग एक अनुमान होती है, लेकिन सामान्य तौर पर यह फुल-टैंक विधि से निकाले गए वास्तविक आंकड़ों से लगभग 2 से 5 प्रतिशत तक के अंतर में रहती है.

क्या है फुल टैंक मेथड़?

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, वास्तविक परिस्थितियों में माइलेज मापने का सबसे भरोसेमंद तरीका फुल-टैंक मेथड माना जाता है. इसमें पहले टैंक पूरी तरह भरवाया जाता है, फिर ट्रिप मीटर रीसेट किया जाता है. सामान्य तरीके से गाड़ी चलाने के बाद अगली बार टैंक फुल कराया जाता है और तय की गई दूरी को भरे गए ईंधन की मात्रा से विभाजित कर माइलेज निकाला जाता है.

डीलर की मशीन क्या जांचती है?

कंपनी के अधिकृत डीलर के पास मौजूद डायग्नोस्टिक मशीन सिर्फ फ्यूल माइलेज नहीं दिखाती. यह इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) से विस्तृत जानकारी पढ़ती है और यह जांचती है कि फ्यूल इंजेक्टर, ऑक्सीजन सेंसर, एयर फ्लो सेंसर जैसे पुर्जे सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं.

यह मशीन इंजन से जुड़ी तकनीकी खराबियों का पता लगाने और ECU की सेटिंग की जांच करने में भी मदद करती है, जिससे यह समझा जा सकता है कि कहीं किसी तकनीकी समस्या की वजह से ईंधन की खपत तो नहीं बढ़ रही.

हालांकि, यह मशीन हर तरह की वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों में मिलने वाले माइलेज को सीधे नहीं मापती. वास्तविक फ्यूल एफिशिएंसी ट्रैफिक, शहर या हाईवे पर ड्राइविंग, एयर कंडीशनर का इस्तेमाल, टायर का दबाव, ड्राइविंग स्टाइल और वाहन पर मौजूद भार जैसे कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है.

गडकरी के दावे को लेकर क्या कहती है रिपोर्ट?

रिपोर्ट के अनुसार, व्यवहारिक रूप से कार का ऑनबोर्ड डिस्प्ले माइलेज का एक उपयोगी अनुमान देता है, जबकि फुल-टैंक मेथड सही में फ्यूल एफिशिएंसी का अपेक्षाकृत सटीक आकलन करने का तरीका माना जाता है.

वहीं, कंपनी के अधिकृत डीलर की डायग्नोस्टिक मशीन का मकसद वाहन में मौजूद मैकेनिकल या इलेक्ट्रॉनिक समस्याओं की पहचान करना होता है, जो ईंधन की खपत को प्रभावित कर सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वाहन के माइलेज का आकलन करने का यह अकेला तरीका नहीं माना जाता.

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