जंग में तेहरान की नई रणनीति: पहले सैन्य ठिकाने, अब डेटा सेंटर्स को भी बना रहा निशाना- क्या बड़ा खेल खेल रहा है Iran?

खाड़ी क्षेत्र में जंग का रूप अब बदलता नजर आ रहा है. पहले अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने वाला ईरान अब डेटा सेंटर्स पर भी वार कर रहा है. क्या यह सिर्फ बदले की कार्रवाई है या डिजिटल युद्ध की बड़ी रणनीति?

( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )
Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On :

US-Iran-Israel War: मंगलवार को खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी डेटा सेंटर भी ईरान के हमलों के निशाने पर आ गए. ईरान, जो पहले से अमेरिकी ठिकानों और अरब देशों के कारोबारी हितों पर हमला कर रहा है, उसने संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) के डेटा सेंटरों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए.

ये हमले अचानक नहीं थे, बल्कि रणनीति के तहत किए गए थे. अक्सर कहा जाता है कि डेटा नया तेल है. अगर डेटा को नया तेल माना जाए, तो डेटा सेंटर उसकी रिफाइनरी जैसे हैं. इसके नुकसान पहुंचाना यानी उस देश के बिजनेस को भारी नुकसान पहुंचाने जैसा है.

ईरान डेटा सेंटर्स को क्यों बना रहा है निशाना?

ईरान का यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त कार्रवाई में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे. इन हमलों में ईरान के रक्षा कमांड और कंट्रोल सेंटर को भी नष्ट करने की बात सामने आई. माना जा रहा है कि ईरान की सहयोगी यूनिट्स पहले से तय निर्देशों के अनुसार काम कर रही हैं और डेटा सेंटर मुमकिन है कि पहले से संभावित टारगेट की लिस्ट में शामिल थे.

डेटा सेंटर बनाने में अरबों डॉलर का निवेश लगता है. इसी वजह से वे युद्ध के समय बड़े निशाने बन जाते हैं, क्योंकि किसी देश के कारोबारी ढांचे को कमजोर करना युद्ध की मुख्य रणनीति होती है.

बड़े टेक्नोलॉजी ठिकानों को निशाना बनाने के पीछे तीन संभावित कारण बताए जा रहे हैं. पहला कारण व्यापारिक निवेश को नुकसान पहुंचाना हो सकता है. दूसरा कारण सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होने वाली सूचनाओं को प्रभावित करना हो सकता है. तीसरा कारण उन दर्जनों कंपनियों को प्रभावित करना हो सकता है जो इन डेटा सेंटरों पर निर्भर हैं.

हमले में एआई का इस्तेमाल क्या इसी वजह से बनाया निशाना?

अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों की योजना बनाने में एंथ्रोपिक की क्लॉड एआई तकनीक का इस्तेमाल किया था. विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के उपयोग से लक्ष्यों को जल्दी और सटीक तरीके से चुना जा सका. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने पहले 12 घंटों में ईरान के लगभग 900 ठिकानों पर हमला किया, जो एआई उपकरणों के बिना लगभग असंभव माना जा रहा है.

आधुनिक सेनाएं खुफिया जानकारी जुटाने, संचार करने और लक्ष्यों का विश्लेषण करने के लिए डेटा सेंटरों पर निर्भर रहती हैं, अमेरिका ने क्लॉड एआई का इस्तेमाल खुफिया आकलन, लक्ष्य पहचान और युद्ध की स्थिति का आकलन करने में किया.

डेटा सेंटर्स पर हमले का असर क्या हुआ?

अमेजन वेब सर्विसेज ने बताया कि ईरान ने यूएई में उसके क्लाउड यूनिट पर हमला किया गया. बहरीन में एक अन्य डेटा सेंटर के पास हुए विस्फोट से भी कुछ नुकसान हुआ. इन हमलों के कारण AWS को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जैसे बिजली कटना और ढांचे को नुकसान. इसके चलते कंपनी को अपने कुछ हिस्सों को बंद करना पड़ा. हालांकि कंपनी के आधिकारिक बयान के अनुसार नुकसान सीमित रहा.

अमेजन ने अपने उन ग्राहकों को सलाह दी जो प्रभावित क्लाउड सेवा का इस्तेमाल कर रहे थे कि वे अपना डेटा सुरक्षित कर लें, क्योंकि मरम्मत का काम जारी है. डेटा सेंटर बड़े निवेश का केंद्र होते हैं, उदाहरण के तौर पर, माइक्रोसॉफ्ट ने 2026 से 2029 के बीच यूएई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर ढांचे के विस्तार के लिए लगभग 8 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है.

ईरान के हमले के बाद मंगलवार को प्रीमार्केट ट्रेडिंग में अमेजन के शेयर लगभग 2.7 प्रतिशत गिर गए. टेक कंपनियों ने मध्य पूर्व में भारी निवेश किया है और यह हमला उनके भरोसे को हिला सकता है.

Similar News