5 सालों से जेल में, अब फिर हुई 7.5 साल की सज़ा, कौन हैं नोबेल प्राइज विनर नर्गिस मोहम्मदी, जिनसे घबराता है ईरान!

नोबेल प्राइज विनर नर्गिस मोहम्मदी को ईरान ने सात साल चार महीनों की सज़ा सुनाई है. नर्गिस ईरान के फैसलों के खिलाफ लगातार आवाज़ बुलंद करती आई हैं.;

( Image Source:  X-@baphometx and @khamenei_ir )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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Who is Narges Mohammadi: ईरान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नर्गिस मोहम्मदी को एक बार फिर कड़ी सजा का सामना करना पड़ा है. उनके वकील के मुताबिक, ईरान की एक अदालत ने उन्हें अतिरिक्त सात साल 5 महीने की जेल की सजा सुनाई है.

कौन हैं नर्गिस मोहम्मदी?

नर्गेस मोहम्मदी महिलाओं के अधिकारों और ईरान में राजनीतिक दमन के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाती रही हैं. ईरानी सरकार उन पर विरोध प्रदर्शनों को संगठित करने और राज्य के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगाती है. जबकि मोहम्मदी और उनके समर्थक इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि उन्हें शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों की सजा दी जा रही है.

  • नर्गिस मोहम्मदी का जन्म 21 अप्रैल 1972 को हुआ था और वह ईरानी जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. वह डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (DHRC) की उपाध्यक्ष हैं, जिसका नेतृत्व नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी करती हैं.
  • नर्गेस मोहम्मदी ने क़ज़विन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से फिज़िक्स की पढ़ाई की और बाद में एक पेशेवर इंजीनियर के तौर पर काम किया. कॉलेज के दिनों से ही नर्गेस मोहम्मदी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय थीं.
  • उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में लेख लिखे और एक राजनीतिक छात्र समूह की बैठकों में भाग लेने के कारण दो बार गिरफ्तार भी की गईं. विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सुधारवादी अख़बारों में पत्रकार के तौर पर काम किया. इस दौरान उन्होंने राजनीतिक विषयों पर आधारित निबंधों की एक किताब भी लिखी, जिसका शीर्षक था "द रिफॉर्म्स, द स्ट्रैटेजी एंड द टैक्टिक्स".
  • वह साल 2023 में लागू किए गए हिजाब और शालीनता कार्यक्रम की भी खुलकर आलोचना करती रही हैं. मई 2016 में तेहरान की एक अदालत ने उन्हें 'लीगाम' नाम के कथित अवैध संगठन की स्थापना और संचालन के आरोप में 16 साल की जेल की सजा सुनाई थी. हालांकि वर्ष 2020 में उन्हें रिहा किया गया, लेकिन 2021 में उन्हें फिर से जेल भेज दिया गया.
  • अक्टूबर 2023 में, जब वह अब भी जेल में थीं, तब नर्गेस मोहम्मदी को ईरान में महिलाओं पर हो रहे दमन के खिलाफ लगातार संघर्ष करने और मानवाधिकार व स्वतंत्रता के लिए उनके प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस फैसले को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और पुरस्कार की आलोचना की.

नर्गिस की क्या है गलती?

उनके वकील मोस्तफा नीली ने सोशल मीडिया पर बताया कि उत्तर-पूर्वी ईरान के मशहद शहर की एक अदालत ने मोहम्मदी को 'इकट्ठा होने और साजिश रचने' के आरोप में छह साल और कैंपेन एक्टिविटीज में शामिल होने के मामले में डेढ़ साल की अतिरिक्त सजा सुनाई है.

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कौन हैं नर्गिस मोहम्मदी?

परिचय

  • जन्म: 21 अप्रैल 1972
  • ईरान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता
  • महिलाओं के अधिकारों और राजनीतिक दमन के खिलाफ मुखर आवाज
  • डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (DHRC) की उपाध्यक्ष

शिक्षा और शुरुआती करियर

  • क़ज़विन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से फिज़िक्स की पढ़ाई
  • पेशे से इंजीनियर रहीं
  • कॉलेज के दिनों से ही सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय

पत्रकारिता और लेखन

  • सुधारवादी अख़बारों में पत्रकार के तौर पर काम
  • महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में लेख
  • राजनीतिक निबंधों की पुस्तक: "The Reforms, the Strategy and the Tactics"

ईरानी सरकार से टकराव

  • विरोध प्रदर्शनों को संगठित करने और राज्य के खिलाफ प्रचार के आरोप
  • मोहम्मदी और समर्थकों का कहना: शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों की सजा
  • 2023 में लागू हिजाब और शालीनता कार्यक्रम की खुली आलोचना

गिरफ्तारी और सज़ा

मई 2016 16 साल की जेल सज़ा (लीगाम संगठन से जुड़े आरोप)
2020 जेल से रिहाई
2021 दोबारा जेल भेजी गईं
हालिया सज़ा 6 साल + 1.5 साल अतिरिक्त सज़ा

कब और क्यों हुई गिरफ्तारी?

  • दिसंबर में मशहद शहर में शोक सभा में शामिल होने के दौरान गिरफ्तारी
  • वकील खोसरो अलीकोर्दी की याद में आयोजित कार्यक्रम
  • ईरानी अधिकारियों का दावा: उकसाने वाले बयान
  • परिवार का आरोप: गिरफ्तारी के दौरान मारपीट, बाद में अस्पताल ले जाया गया

नोबेल शांति पुरस्कार 2023

  • अक्टूबर 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित
  • ईरान में महिलाओं पर दमन के खिलाफ संघर्ष के लिए पुरस्कार
  • उस समय भी नर्गिस मोहम्मदी जेल में थीं
  • ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस फैसले की आलोचना की

कब हुईं थी नर्गिस गिरफ्तार?

53 साल की नर्गिस मोहम्मदी को दिसंबर में उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वह वकील खोसरो अलीकोर्दी की याद में आयोजित एक शोक सभा में शामिल हुई थीं. अलीकोर्दी उसी महीने अपने ऑफिर में मरे हुए पाए गए थे. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि इस कार्यक्रम के दौरान मोहम्मदी ने उकसाने वाले बयान दिए थे. हालांकि, उनके परिवार का कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया.

क्या बोला नर्गेस फाउंडेशन

नर्गेस फाउंडेशन, जो उनके समर्थन में काम करता है, उन्होंने शनिवार को हुई अदालत की सुनवाई को 'ढोंग' करार दिया है. फाउंडेशन के मुताबिक, मोहम्मदी ने 2 फरवरी को भूख हड़ताल शुरू की थी. वकील मोस्तफा नीली ने बताया कि खराब स्वास्थ्य के चलते उन्हें तीन दिन पहले फिर से अस्पताल ले जाया गया था, जिसके बाद दोबारा हिरासत में भेज दिया गया. नीली के मुताबिक जब मोहम्मदी गिरफ्तारी के दौरान हुई घटनाओं को फोन पर बताने लगीं, तो कॉल अचानक काट दी गई.

नर्गेस मोहम्मदी के पति तागी रहमानी ने बीबीसी से बातचीत में इस सजा को “क्रूर और बेहद अन्यायपूर्ण” बताया. उन्होंने कहा कि मोहम्मदी ने अदालत में अपना बचाव करने से इनकार कर दिया क्योंकि उनका मानना है कि न्यायपालिका की कोई वैधता नहीं है. रहमानी के मुताबिक,"उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा और किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए."

मोहम्मदी 2021 से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में 13 साल की सजा काट रही हैं, जिन आरोपों को वह लगातार नकारती रही हैं. दिसंबर 2024 में उन्हें इलाज के लिए एविन जेल से कुछ समय के लिए रिहा किया गया था, लेकिन बाद में दोबारा जेल लौटने की उम्मीद जताई गई थी.

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