Iraq से लिया सबक! एक-एक कर खत्म हुए नेता, लेकिन नहीं दब रहा Iran? US-Israel के खिलाफ इस रणनीति का कर रहा इस्तेमाल

Iran War: टॉप लीडर्स के मारे जाने के बाद भी ईरान क्यों नहीं टूटा और लगातार पलटवार कैसे कर रहा है? क्या ‘मोज़ेक डिफेंस’ रणनीति ने जंग को ऐसा बना दिया है, जहां हर हमले के बाद दुश्मन और मजबूत होकर सामने आता है और अंत दूर होता जाता है?

( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )
Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On :

Iran War News: 2003 में जब अमेरिका ने बगदाद के फिरदौस स्क्वायर में सद्दाम हुसैन की मूर्ति गिराई थी, तो इराक की सेना लगभग एक ही रात में बिखर गई थी. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सद्दाम का शासन एक 'टॉप-डाउन' पिरामिड की तरह था, जिसमें ऊपर का हिस्सा हटते ही नीचे का ढांचा बिना आदेश और अधिकार के रह गया और पूरा सिस्टम ढह गया.

लेकिन 2026 में दुनिया इसका उल्टा देख रही है ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारेजानी और वरिष्ठ कमांडर कासिम सुलेमानी जैसे शीर्ष नेताओं की मौत के बाद भी ईरान की व्यवस्था नहीं टूटी है.

क्या है ईरान की रणनीति?

टॉप नेताओं के जाने के बाद भी ईरान लगातार जवाबी हमले कर रहा है, युद्ध के दायरे को बढ़ा रहा है और पूरे क्षेत्र में दबाव बनाए हुए है. इसकी वजह है एक खास रणनीति, जिसे तेहरान ने दो दशकों में तैयार किया है, जिसे 'मोज़ेक डिफेंस' कहा जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध के शुरुआती हफ्तों में इज़राइल ने 'डिकैपिटेशन स्ट्राइक' यानी शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई. 17 मार्च को अली लारेजानी की हत्या को अंतिम झटका माना गया था. लारेजानी, खामेनेई की मौत के बाद हालात संभाल रहे थे.

ईरान पर अटैक करने के बाद क्या बोले थे नेतन्याहू?

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी, लेकिन लगातार प्रयास से ईरान की व्यवस्था को कमजोर किया जा सकता है. वहीं इज़राइली रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने लारेजानी की मौत को वास्तविक नेता का अंत बताया था.

हालांकि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इन मौतों की पुष्टि करते हुए साफ कहा कि सिस्टम अभी भी कायम है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संस्थाएं इतनी मजबूत हैं कि किसी एक व्यक्ति के होने या न होने से फर्क नहीं पड़ता.

ईरान में किस तरह का है सिस्टम?

  • ईरान में एक तय “सक्सेशन सिस्टम” है, जिसके तहत लारेजानी के डिप्टी ने कुछ ही घंटों में पूरी जिम्मेदारी संभाल ली. युद्ध का सिस्टम रुका नहीं, बल्कि अगले स्तर पर शिफ्ट हो गया.
  • मोज़ेक डिफेंस क्या है? रिपोर्ट के मुताबिक यह सिर्फ युद्ध की रणनीति नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को इस तरह तैयार करना है कि नेतृत्व खत्म होने पर भी देश लड़ता रहे. 2000 के दशक में आईआरजीसी के कमांडर जनरल मोहम्मद अली जाफरी के तहत इस सिद्धांत को विकसित किया गया था.
  • इसमें ईरान की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया है, जो बिना केंद्रीय आदेश के भी काम कर सकते हैं. इसका मूल विचार यह है कि अगर दुश्मन सिर काट दे, तो शरीर खुद सोच सके, लड़ सके और जिंदा रह सके.
  • इसी के तहत आईआरजीसी को 31 प्रांतीय कमांड में बांटा गया. हर प्रांत एक “टाइल” की तरह काम करता है. अगर तेहरान पर हमला हो जाए या कम्युनिकेशन खत्म हो जाए, तो हर प्रांतीय कमांडर अपने स्तर पर स्थानीय सर्वोच्च नेता की तरह फैसले ले सकता है.
  • उन्हें केंद्रीय आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ता. वे अपने स्तर पर मिसाइल हमले शुरू कर सकते हैं. हर प्रांत के पास ईंधन, खाना और दवाइयों का अलग स्टॉक होता है, ताकि राजधानी घिरने पर भी बाकी देश प्रभावित न हो.
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाखों स्थानीय स्वयंसेवक भी इस सिस्टम का हिस्सा हैं, जो बिना किसी आदेश के शहरी युद्ध लड़ सकते हैं. यहां तक कि अगर सैटेलाइट सिस्टम या कमांड सेंटर नष्ट हो जाएं, तब भी पहले से तय योजनाएं अपने आप चलती रहती हैं.
  • इस सिस्टम को 'हेडलैस हाइड्रा' कहा जा रहा है. यानी एक सिर कटे तो कई नए सिर सक्रिय हो जाते हैं. पारंपरिक युद्ध में नेतृत्व खत्म होने से युद्ध खत्म हो जाता है, लेकिन इस मॉडल में नेताओं की मौत से सिस्टम और फैल जाता है.
  • इस सिस्टम में किसी एक कमांडर की मौत से खालीपन नहीं बनता, बल्कि तुरंत दूसरा कमांडर जिम्मेदारी संभाल लेता है. किसी एक कमांड सेंटर के नष्ट होने से ऑपरेशन रुकता नहीं, बल्कि दूसरे हिस्सों में शिफ्ट हो जाता है.
  • ईरान की यह रणनीति कम लागत में दुश्मन को ज्यादा नुकसान पहुंचाने पर भी आधारित है. उदाहरण के तौर पर, शहीद ड्रोन की कीमत 20,000 से 50,000 डॉलर के बीच होती है, जबकि उन्हें रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाली THAAD और Patriot मिसाइलें लाखों डॉलर की होती हैं.

क्या है ईरान का एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस

इसके अलावा, ईरान अपने सहयोगी समूहों, जिन्हें “एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” कहा जाता है, के जरिए युद्ध को और फैलाता है. इन समूहों को भी काफी हद तक स्वतंत्रता दी गई है, जिससे कम्युनिकेशन टूटने पर भी हमले जारी रहते हैं. इससे पश्चिमी देशों के लिए चुनौती और बढ़ जाती है. पहले उन्हें एक नेता पर नजर रखनी होती थी, लेकिन अब 31 अलग-अलग कमांडरों पर नजर रखनी पड़ रही है, जिनकी अपनी रणनीतियां हैं. इससे अगला कदम अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है.

इराक युद्ध से ईरान ने कैसे लिया सबक?

2003 के इराक युद्ध से एक सबक मिला था कि पिरामिड सिस्टम को गिराना आसान होता है. लेकिन 2026 में यह साफ हो गया है कि “मोज़ेक सिस्टम” को तोड़ना लगभग असंभव है. ईरान ने अमेरिका के इराक और अफगानिस्तान अभियानों से सीख लेकर यह मॉडल बनाया. जहां इराक में नेतृत्व खत्म होते ही सेना बिखर गई थी, वहीं ईरान ने ऐसा सिस्टम बनाया है जो नेतृत्व के बिना भी चलता रहे.

क्या इस सिस्टम को कैसे रोका जा सकता है?

पारंपरिक युद्ध में एक केंद्रीय नेतृत्व होता है, जो युद्ध रोकने का फैसला ले सकता है. लेकिन मोज़ेक डिफेंस में यह 'ऑफ स्विच' साफ नहीं है. अगर राजनीतिक नेतृत्व युद्ध रोकना भी चाहे, तो अलग-अलग यूनिट्स को एक साथ रोकना मुश्किल हो सकता है. इससे युद्ध को खत्म करना और कठिन हो जाता है.

Similar News