जहां से सबसे ज्यादा गैस लेता है भारत, ईरान ने वहीं किया हमला; अब LPG के रेट छुएंगे आसमान- समझें पूरा गणित

ईरान ने बुधवार शाम रास लाफान गैस हब पर मिसाइल दागी, जो कतर का सबसे बड़ा गैस प्रोसेसिंग और निर्यात केंद्र है. इसका सीधा असर अब भारत पर देखने को मिलने वाला है.

Iran Attack Qatar

(Image Source:  AI: Sora )
Edited By :  विशाल पुंडीर
Updated On : 19 March 2026 9:34 AM IST

Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है. ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच खाड़ी क्षेत्र के अहम ऊर्जा ठिकाने निशाने पर आ गए हैं. ताजा घटनाक्रम में ईरान ने कतर के प्रमुख गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिसाइल हमला कर स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है.

इस हमले के बाद न सिर्फ मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है. खासकर तब, जब कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर है. इससे पहले इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला किया था, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है.

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रास लाफान गैस हब पर हमला क्यों?

ईरान ने बुधवार शाम रास लाफान गैस हब पर मिसाइल दागी, जो कतर का सबसे बड़ा गैस प्रोसेसिंग और निर्यात केंद्र है. इसके बाद कतर के एलएनजी प्लांट में आग लग गई, जिससे उत्पादन और सप्लाई पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है. रास लाफान कॉम्प्लेक्स कतर की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. यहां हुए हमले ने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?

1. भारत के कुल एलएनजी आयात का करीब 47% हिस्सा कतर से आता है

2. हर साल भारत लगभग 27 मिलियन टन LNG आयात करता है.

3. इसमें से 12-13 मिलियन टन कतर से आता है.

ऐसे में कतर की गैस सप्लाई बाधित होने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है.

भारत किन देशों से करता है गैस आयात?

1. कतर- 47%

2. यूएई- 24%

3. अमेरिका- 11%

4. इसके अलावा Oman, Angola और Nigeria से भी आयात होता है

क्या भारत में बढ़ेगी गैस की कीमत?

देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर को लेकर चिंता बढ़ती दिख रही है, हालांकि सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल कोई कमी नहीं है लेकिन अगर कतर की गैस सप्लाई प्रभावित होती है, तो भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. एलएनजी की कीमतों में उछाल का सीधा असर एलपीजी यानी घरेलू रसोई गैस पर भी पड़ सकता है. अगर कतर से सस्ती गैस मिलना बंद हुआ, तो भारत को महंगे विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है.

कच्चे तेल की कीमतों पर कितना असर?

इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर किए गए हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है. इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है. हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude की कीमत में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 108.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. यह उछाल दर्शाता है कि बाजार में आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है.

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