Operation Epic Fury क्या है? आसान भाषा में समझें ईरान पर अमेरिकी ‘सीक्रेट प्लान’ की कहानी
Israel Vs Iran War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-इजरायल के ‘सीक्रेट प्लान’ की चर्चा तेज है. यह रणनीति सैन्य, साइबर और कूटनीतिक दबाव का मिश्रण मानी जा रही है. अमेरिका ने इस प्लान का नाम Operation Epic Fury रखा है.
Israel Vs Iran War : “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” (Operation Epic Fury) को लेकर चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि यह नाम कथित तौर पर अमेरिका की किसी संभावित या हालिया सैन्य रणनीति/एक्शन से जोड़ा जा रहा है, खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में. फिलहाल, एपिक फ्यूरी का मतलब इजरायल का अमेरिका का ईरान के खिलाफ तेज और घातक कार्रवाई से लिया जा रहा है. आइए, इसे 10 प्वाइंट में डिटेल में समझते हैं.
1. “एपिक फ्यूरी” का अर्थ क्या है?
“Epic Fury” दो शब्दों से मिलकर बना है. Epic यानी बेहद बड़ा, ऐतिहासिक या निर्णायक, और Fury यानी तीव्र क्रोध या आक्रामकता. सैन्य संदर्भ में यह नाम एक ऐसे ऑपरेशन को दर्शाता है जो बड़े पैमाने पर, तेज और निर्णायक कार्रवाई का संकेत देता है, ताकि विरोधी को मजबूत संदेश दिया जा सके.
2. यह नाम चर्चा में क्यों?
ईरान और इजरालय के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बाद 28 फरवरी को अमेरिका की सैन्य गतिविधियों और ईरान-समर्थित समूहों पर हमलों की खबरों के बीच Operation Epic Fury नाम चर्चा में है. ईरान हमले के बाद से मीडिया और रणनीतिक विश्लेषकों के बीच यह शब्द तेजी से सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा है.
3. यह आधिकारिक ऑपरेशन है या कोडनेम?
अक्सर अमेरिकी सेना अपने ऑपरेशन्स को कोडनेम देती है, जैसे Operation Desert Storm या Operation Enduring Freedom. उसी तरह अब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जारी आपरेशन को “Epic Fury” नाम दिया है. इसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ तेज, आक्रामक और घातक कार्रवाई को अंजाम देना है.
4. अमेरिका ऐसे नाम क्यों चुनता है?
Pentagon आमतौर पर ऐसे नाम चुनता है जो सैनिकों का मनोबल बढ़ाएं और रणनीतिक संदेश भी दें. “Epic Fury” जैसा नाम विरोधियों को चेतावनी देने और घरेलू स्तर पर ताकत का प्रदर्शन करने के लिए चुना जा सकता है.
5. इजरायल-ईरान तनाव से इसका कनेक्शन क्या?
इजरायल और ईरान के बीच छाया युद्ध (proxy war) लंबे समय से चल रहा है. अगर अमेरिका इस क्षेत्र में किसी ऑपरेशन को “Epic Fury” जैसा नाम देता है, तो यह संकेत हो सकता है कि वह इजरायल के समर्थन में ईरान या उसके सहयोगियों के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहा है.
6. मिडिल ईस्ट में रणनीतिक संदेश तो नहीं?
इस तरह का नाम पूरे मध्य-पूर्व (Middle East) में एक संदेश देता है कि अमेरिका किसी भी हमले या उकसावे का जवाब बड़े और निर्णायक तरीके से देगा. यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव (psychological deterrence) बनाने का भी तरीका है.
7. हमले में एयरस्ट्राइक या साइबर ऑपरेशन शामिल हैं?
आधुनिक अमेरिकी ऑपरेशन्स में केवल बमबारी ही नहीं, बल्कि साइबर हमले, ड्रोन स्ट्राइक और स्पेशल फोर्स मिशन भी शामिल होते हैं. “Epic Fury” जैसा नाम यह संकेत दे सकता है कि यह बहुआयामी (multi-domain) ऑपरेशन है. जमीन, हवा और साइबर स्पेस तीनों में.
8. हमले का वैश्विक संदेश क्या है?
ऐसे ऑपरेशन नामों का उपयोग घरेलू राजनीति में भी होता है. अमेरिका की सरकार अपने नागरिकों को यह दिखाना चाहती है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सख्त है. साथ ही, वैश्विक स्तर पर यह संदेश जाता है कि अमेरिका अभी भी एक प्रमुख सैन्य शक्ति है.
9. क्या यह युद्ध की शुरुआत का संकेत है?
हर बड़े नाम वाला ऑपरेशन युद्ध का संकेत नहीं होता. कई बार ये सीमित कार्रवाई (limited strike) या चेतावनी के तौर पर होते हैं. “Epic Fury” भी संभवतः पूर्ण युद्ध नहीं, बल्कि एक मजबूत जवाब या रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकता है.
10. भविष्य में इसका क्या असर हो सकता है?
अगर “Epic Fury” जैसे ऑपरेशन वास्तविक रूप से लागू होते हैं, तो ईरान और उसके सहयोगियों की प्रतिक्रिया तेज हो सकती है, जिससे इजरायल और पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है. इससे वैश्विक तेल कीमतों, कूटनीतिक समीकरणों और सुरक्षा स्थिति पर भी बड़ा असर पड़ सकता है.
अमेरिका-इजरायल का ‘सीक्रेट प्लान’ क्या है?
अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग के तहत एक ऐसे प्लान की चर्चा है, जिसका मकसद ईरान की सैन्य और क्षेत्रीय ताकत को सीमित करना है. इसे मल्टी-लेयर रणनीति माना जा रहा है. माना जा रहा है कि यह प्लान सीधे ईरान पर हमला करने के बजाय उसके प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे मिलिशिया नेटवर्क) को कमजोर करने पर फोकस करता है, ताकि बिना फुल-स्केल वॉर के उसकी ताकत घटाई जा सके. इजरायल पहले भी सीमित एयरस्ट्राइक करता रहा है. इस प्लान में ड्रोन और प्रिसिजन स्ट्राइक के जरिए रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें अमेरिका की तकनीकी मदद अहम हो सकती है.
आधुनिक युद्ध में साइबर हमले अहम भूमिका निभाते हैं. माना जा रहा है कि ईरान की सैन्य और न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को डिजिटल तरीके से बाधित करने की रणनीति भी इस प्लान का हिस्सा हो सकती है. दरअसल, अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर यह संकेत देना चाहता है कि किसी भी बड़े संघर्ष की स्थिति में वह तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार है.
विश्लेषकों के मुताबिक यह प्लान सीधे युद्ध की घोषणा नहीं, बल्कि “deterrence strategy” है. यानी विरोधी को डराकर पीछे हटने पर मजबूर करना. अगर यह प्लान एक्टिव होता है, तो ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ेगा, जिसका असर तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर पड़ सकता है.