Iran Vs Israel and USA: क्या इस हमले में ईरानी सेना प्रमुख Amir Hatami और Gholam Hossein की हो गई मौत?
तेहरान में हुए हवाई हमलों के बाद ईरान के सेना प्रमुख आमिर हातमी और न्यायपालिका प्रमुख मोहसिनी-एजेई की मौत के दावे सामने आए हैं. हालांकि अब तक किसी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
Amir Hatami and Gholam Hossein
(Image Source: Sora_ AI )ईरानी और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान के रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख मेजर जनरल Amir Hatami उन प्रमुख हस्तियों में शामिल थे जिन्हें देश पर हुए पहले हवाई हमलों के दौरान निशाना बनाया गया. हालांकि इन दावों की पुष्टि स्टेट मिरर हिंदी नहीं करका है. अभी तक न तो ईरान के अधिकारियों और न ही इजरायली सेना ने सार्वजनिक रूप से यह साफ किया है कि जनरल Amir Hatami सीधे तौर पर हमले का लक्ष्य थे या नहीं.
शनिवार को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद राजधानी तेहरान में जोरदार विस्फोटों की खबरें सामने आईं. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद स्थित इलाके से धुआं उठता देखा गया. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों का सटीक निशाना क्या था.
क्या हमले में ईरान के गुलाम हुसैन की हो गई मौत?
इसी के साथ आगे दावा किया जा रहा है कि ईरान की न्यायपालिका प्रमुख गुलाम-हुसैन मोहसिनी-एजेई भी मारे जाने की खबर है. उन्होंने हज़ारों प्रदर्शनकारियों को मौत की सज़ा सुनाई थी. तेहरान धमाकों के बाद अब एक और बड़ा दावा सामने आ रहा है. सोशल मीडिया और कुछ अनौपचारिक सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि ईरान की न्यायपालिका प्रमुख Gholam-Hossein Mohseni-Ejei भी इस हमले में मारे गए हैं. हालांकि, इस दावे की अब तक किसी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है.
मेजर जनरल Amir Hatami कौन?
मेजर जनरल Amir Hatami को जून 2025 में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने सेना प्रमुख नियुक्त किया था. उन्होंने मेजर जनरल अब्दोलरहीम मौसवी की जगह ली, जिन्हें जनरल मोहम्मद बाघेरी की हत्या के बाद सशस्त्र बलों का चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया था.
यह पद संभालने के बाद जनरल हातमी ईरान की नियमित सेना 'आर्टेश' के प्रमुख बने. आर्टेश, ईरान की सशस्त्र सेनाओं की दो मुख्य शाखाओं में से एक है, जबकि दूसरी शाखा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) है.
क्या जनरल हातमी की भूमिका उन्हें बड़ा रणनीतिक लक्ष्य बनाती है?
ईरान की सैन्य कमान संरचना में उनकी वरिष्ठ भूमिका को देखते हुए, किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई में उन्हें निशाना बनाना देश की कमान व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश माना जा सकता है. वे सर्वोच्च नेता के सेना मामलों के सलाहकार भी हैं, जिससे उनकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है.
अमेरिका और इजरायल के खिलाफ उनका रुख क्या रहा है?
31 जनवरी 2026 को बढ़ते तनाव के बीच जनरल हातमी ने अमेरिका और इजरायल को सीधी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और किसी भी दुश्मन की गलती से दुश्मनों की अपनी सुरक्षा और पूरे इलाके की स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी. उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान की परमाणु तकनीक स्वदेशी और स्थायी है. वैज्ञानिकों या ढांचे को निशाना बनाने से भी तकनीकी ज्ञान 'ख़त्म नहीं किया जा सकता.
उनका सैन्य और राजनीतिक करियर कैसा रहा है?
1966 में जंजान में जन्मे जनरल हातमी ने 14 वर्ष की आयु में ईरान-इराक युद्ध के दौरान बसीज स्वयंसेवी बलों में शामिल होकर अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की. 1980 के दशक में चले आठ वर्षीय युद्ध में उन्होंने व्यापक भूमिका निभाई, जिसमें ‘ऑपरेशन मर्साद’ जैसी कार्रवाइयाँ भी शामिल थी. 2017 से 2021 तक वे राष्ट्रपति हसन रूहानी की सरकार में रक्षा मंत्री रहे. उनकी नियुक्ति इसलिए भी उल्लेखनीय रही क्योंकि दो दशकों से अधिक समय बाद वे पहले ऐसे रक्षा मंत्री थे जो नियमित सेना से आए थे; इससे पहले यह पद प्रायः IRGC अधिकारियों के पास रहा था.
मिसाइल और रक्षा नीति में उनकी क्या भूमिका रही?
रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया. अधिकारियों के अनुसार उन्होंने मिसाइल केंद्रित रक्षा सिद्धांत को बढ़ावा दिया और खोर्रमशहर व फतेह जैसी बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों के विकास की निगरानी की. यह सब उस दौर में हुआ जब ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा था.