राजशाही की वापसी! ईरान के प्रदर्शनों में दिखा शेर–सूर्य वाला झंडा, खामेनेई शासन के लिए क्या है इसका संदेश?

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच शेर–सूर्य (Lion and Sun) वाला झंडा एक बार फिर चर्चा में है. खोर्रमाबाद और तेहरान समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने यह झंडा लहराकर सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei के नेतृत्व वाले इस्लामिक शासन को खुली चुनौती दी है. शेर–सूर्य झंडा 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान की राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक था. आज इसका दोबारा सड़कों पर दिखना केवल सांस्कृतिक गर्व नहीं, बल्कि मौजूदा सत्ता के खिलाफ असंतोष और बदलाव की मांग का संकेत माना जा रहा है.;

( Image Source:  X/TRobinsonNewEra )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 9 Jan 2026 8:57 AM IST

ईरान के खोर्रमाबाद शहर के मुख्य चौराहे पर जब प्रदर्शनकारियों ने शेर–सूर्य वाला झंडा लहराया, तो यह सिर्फ एक दृश्य नहीं था, बल्कि एक गहरे राजनीतिक संदेश का संकेत था. यह झंडा ईरान की उस पहचान की याद दिलाता है जो 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले अस्तित्व में थी. मौजूदा हालात में इसे फहराना सीधे तौर पर इस्लामिक शासन को चुनौती देने के तौर पर देखा जा रहा है. यही वजह है कि इस प्रतीक ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा है.

राजधानी तेहरान में प्रदर्शन तेजी से उग्र हुए हैं. बढ़ती महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों की सख्ती से नाराज़ लोग सड़कों पर उतर आए हैं. ये प्रदर्शन सीधे सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की अगुवाई वाले इस्लामिक सिस्टम के खिलाफ हैं. “आजादी, आजादी” जैसे नारे यह दिखाते हैं कि असंतोष सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक भी है.

सरकार की घबराहट उजागर

जैसे-जैसे रात में प्रदर्शन तेज हुए, ईरानी सरकार ने इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं बंद कर दीं. राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के नेतृत्व वाली सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी. यह कदम बताता है कि सत्ता सूचना के प्रसार से डर रही है. इतिहास गवाह है कि जब सरकारें प्रतीकों और नारों से डरने लगती हैं, तो संकट गहरा होता है.

निर्वासित युवराज का असर

इन प्रदर्शनों में कुछ लोग निर्वासित युवराज Reza Pahlavi के आह्वान से प्रेरित भी दिखे. कई जगहों पर पूर्व शाह के समर्थन में नारे लगे. ऐसा कुछ, जो पहले मौत की सजा तक दिला सकता था. आज इन नारों का सुनाई देना यह दिखाता है कि गुस्सा कितना गहरा है. शेर–सूर्य का झंडा इसी बदले हुए मिज़ाज का दृश्य प्रतीक बन गया है.

शेर–सूर्य का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अर्थ

शेर और सूर्य (Shir-o-Khorshid) ईरान की प्राचीन फारसी सभ्यता से जुड़ा प्रतीक है. शेर शक्ति, साहस और राजसी संप्रभुता का संकेत देता है, जबकि सूर्य प्रकाश, न्याय और दैवीय व्यवस्था का प्रतीक माना जाता है. यह चिन्ह सदियों तक ईरान की शाही पहचान का केंद्र रहा. इसीलिए आज भी कई ईरानी इसे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं.

शाही ध्वज से इस्लामी प्रतीक तक का सफर

1979 की इस्लामी क्रांति से पहले तक शेर–सूर्य ईरान के राष्ट्रीय ध्वज का मुख्य हिस्सा था. क्रांति के बाद इसे हटाकर वर्तमान ध्वज में ‘अल्लाह’ का प्रतीक शामिल किया गया. लेकिन प्रतीक हटने के बावजूद उसकी स्मृति खत्म नहीं हुई. आज जब यह झंडा फिर सड़कों पर दिखता है, तो वह बीते ईरान की याद और मौजूदा शासन के प्रति असंतोष दोनों को साथ लेकर आता है.

संस्कृति या सत्ता-विरोध?

विश्लेषकों का मानना है कि शेर–सूर्य का झंडा फहराना केवल राजशाही की वापसी की मांग नहीं है. यह इस्लामिक शासन के वैचारिक ढांचे को अस्वीकार करने का प्रतीक भी है. प्रदर्शनकारी यह जताना चाहते हैं कि उनकी पहचान सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भी है. यही वजह है कि यह झंडा सत्ता के लिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है.

आज का ईरान और कल का सवाल

आज ईरान की सड़कों पर दिख रहा शेर–सूर्य का झंडा एक सवाल खड़ा करता है कि क्या देश अपनी पुरानी पहचान की ओर लौटना चाहता है, या यह सिर्फ गुस्से का प्रतीक है? जवाब अभी साफ नहीं है. लेकिन इतना तय है कि यह झंडा अब केवल इतिहास का अवशेष नहीं रहा, बल्कि मौजूदा आंदोलन का सबसे तेज़ और साहसी प्रतीक बन चुका है.

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