Pakistan की निकली हवा, अब आगे आया Russia; क्या Putin के पास है Middle East का Peace Plan?

Vladimir Putin ने Iran और Israel-US के बीच जारी जंग में मध्यस्थता की पेशकश की है. एक तरह जहां Donald Trump सैन्य दबाव बढ़ा रहे हैं, वहीं रूस कूटनीतिक समाधान की कोशिश कर रहा है. दूसरी तरफ, Pakistan की मध्यस्थता की भूमिका कमजोर पड़ गई है.

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच मध्यस्थ बनना चाहते हैं पुतिन

(Image Source:  Sora_ AI )

Russia on Iran Israel US War Mediation: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच 28 फरवरी से जंग जारी है. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच रूस की एंट्री ने समीकरण बदल दिए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया संबोधन में ईरान पर कड़े रुख के साथ-साथ शांति की बात भी की थी. अमेरिका चाहता है कि ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखे और अपनी सैन्य गतिविधियों को कम करे. वहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक उसे सुरक्षा की ठोस गारंटी और युद्ध के नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता. इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आधिकारिक तौर पर मध्यस्थता की पेशकश की है.

रूस ने कहा है कि वह ईरान और इजरायल के बीच शांति बहाली के लिए 'सब कुछ' करने को तैयार है. पुतिन इस समय सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और मिस्र के नेताओं के संपर्क में हैं. रूस खुद को अमेरिका के विकल्प के रूप में पेश कर रहा है, ताकि वह इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर सके. पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान यह दावा कर रहा था कि वह ईरान और अमेरिका के बीच मुख्य मध्यस्थ है. उसने अमेरिका का 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का प्रभाव अब कम हो रहा है, क्योंकि ईरान ने पाकिस्तान के जरिए आए प्रस्तावों को 'अत्यधिक' बताकर खारिज कर दिया है. अब ईरान सीधे रूस और चीन जैसे बड़े देशों से बात करना पसंद कर रहा है.


पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पेशकश करते हुए क्या कहा था?

  • पाकिस्तान ने ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष में मध्यस्थता (Mediation) की पेशकश करते हुए खुद को एक 'राजनयिक पुल' (Diplomatic Bridge) के रूप में पेश किया. विदेश मंत्री इशाक डार ने 30 मार्च 2026 को कहा था कि पाकिस्तान को आने वाले दिनों में दोनों पक्षों (अमेरिका और ईरान) के बीच 'सार्थक बातचीत की मेजबानी और सुविधा' प्रदान करने में सम्मानित महसूस होगा.
  • पाकिस्तान ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान दोनों ने ही पाकिस्तान की मध्यस्थता क्षमता पर 'विश्वास' व्यक्त किया है.
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इस युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और क्षेत्र की स्थिरता बुरी तरह प्रभावित हो रही है. इसलिए पाकिस्तान तनाव कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है.
  • पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने अमेरिका का 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव (जिसमें युद्धविराम और परमाणु केंद्रों को बंद करने की शर्तें थीं) ईरान तक पहुंचाया है.
  • पाकिस्तान ने तर्क दिया कि उसके ईरान और खाड़ी देशों (सऊदी अरब आदि) दोनों के साथ कामकाजी संबंध हैं, जो उसे इस क्षेत्र में एक विशिष्ट मध्यस्थ बनाते हैं.


हालांकि, 2 अप्रैल 2026 की ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि इन प्रयासों में 'बाधाएं' (Obstacles) आ रही हैं. ईरान ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली किसी भी सीधी बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया और पाकिस्तान के इन प्रयासों को उसके 'अपने निजी प्रयास' बताया.

रूस ने क्या कहा?

  • डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन के बाद रूस ने मध्य पूर्व (Middle East) में शांति बहाली के लिए अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का स्पष्ट संकेत दिया. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने 2 अप्रैल 2026 को कहा कि रूस ईरान संघर्ष को सुलझाने में अपना योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है.
  • पेसकेव ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन क्षेत्रीय नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं. उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की और मॉस्को में मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती की मेजबानी की, ताकि तनाव कम करने के राजनयिक रास्तों पर चर्चा की जा सके.
  • रूस का मुख्य उद्देश्य इस सैन्य स्थिति को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण मार्ग (peaceful course) पर लाना है.
  • रूस ने अमेरिका और इजरायल से अनुरोध किया है कि ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र से रूसी कर्मचारियों (लगभग 200 लोग) को सुरक्षित निकालने के लिए अस्थायी युद्धविराम (ceasefire) सुनिश्चित किया जाए.
  • ईरान ने भी संकेत दिया है कि वह अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष में रूस को एक मध्यस्थ के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार है.
  • ट्रंप द्वारा नाटो से हटने की संभावित धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए पेसकोव ने कहा कि रूस नाटो को एक 'शत्रुतापूर्ण गठबंधन' (hostile alliance) के रूप में देखता है.


संक्षेप में, रूस अब इस संकट में एक बड़े पावर ब्रोकर की तरह उभर रहा है, जो अमेरिका के सैन्य दबाव के मुकाबले कूटनीतिक समाधान पेश कर रहा है.

ईरान की 4 बड़ी शर्तें (रूस के जरिए)

रूस में ईरान के राजदूत ने शांति के लिए चार प्रमुख मांगें रखी हैं;

  • हमले पूरी तरह बंद हों
  • भविष्य में युद्ध न होने की गारंटी मिले
  • नुकसान का हर्जाना दिया जाए
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के अधिकार का सम्मान हो



फिलहाल कूटनीति की गेंद रूस के पाले में है. जहां अमेरिका दबाव की राजनीति कर रहा है, वहीं पुतिन खुद को एक 'शांतिदूत' के रूप में स्थापित कर रहे हैं. पाकिस्तान इस पूरी तस्वीर से धीरे-धीरे बाहर होता दिख रहा है.

ट्रंप ने राष्ट्र को कब संबोधित किया?

ट्रंप ने 1 अप्रैल 2026 (भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह) को व्हाइट हाउस के क्रॉस हॉल से राष्ट्र के नाम अपना पहला प्राइम-टाइम संबोधन दिया. यह भाषण ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) के एक महीना पूरा होने पर दिया गया था.


ट्रंप ने अपने संबोधन में क्या कहा?

  • ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के खिलाफ युद्ध अपने अंतिम चरण में है. यह अगले 2 से 3 हफ्तों में समाप्त हो सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने 'मुख्य रणनीतिक लक्ष्यों' को पूरा करने के करीब है.
  • ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना (Navy) पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. उनकी वायुसेना व सैन्य नेतृत्व (IRGC) को भारी नुकसान पहुंचाया गया है.
  • ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका अगले कुछ हफ्तों में ईरान पर 'बेहद भीषण हमला' करेगा और उसे 'पाषाण युग' (Stone Age) में वापस भेज देगा.
  • ट्रंप ने दोहराया कि वह ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे. उन्होंने दावा किया कि बी-2 (B-2) हमलावरों द्वारा ईरान के परमाणु स्थलों को "नष्ट" (Obliterated) कर दिया गया है.
  • ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अन्य देशों से साहस दिखाने और इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त होने पर यह मार्ग प्राकृतिक रूप से खुल जाएगा.
  • ट्रंप ने अमेरिकी जनता से इस युद्ध को भविष्य के लिए एक 'निवेश' के रूप में देखने को कहा, ताकि आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रह सकें.
  • संबोधन के दौरान ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी ईरान के साथ बातचीत चल रही है, हालांकि ईरान ने किसी भी औपचारिक वार्ता से इनकार किया है


ट्रंप के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव की शर्तें क्या-क्या हैं?

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव (15-point Peace Plan) भेजा गया. यह प्रस्ताव मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी सैन्य गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया है. इसके  अनुसार;

  • ईरान के नतांज (Natanz), इस्फहान (Isfahan) और फोर्डो (Fordow) परमाणु केंद्रों को पूरी तरह से बंद करना होगा.
  • ईरान की धरती पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) पर स्थायी रोक लगानी होगी.
  • वर्तमान यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना या नष्ट करना होगा.
  • ईरान को अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या और उनकी मारक क्षमता को सीमित करना होगा.
  • क्षेत्रीय सहयोगी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) को वित्तीय मदद और हथियार देना बंद करना होगा.
  • स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए तुरंत खोलना होगा.
  • प्रस्ताव में चर्चा के लिए 30 दिनों के अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) की बात कही गई है.


ईरान को बदले में क्या मिलेगा? (Assurances to Iran)

  • ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) को पूरी तरह से हटा लिया जाएगा.
  • ईरान के बुशहर (Bushehr) नागरिक परमाणु संयंत्र में बिजली उत्पादन के लिए अमेरिका तकनीकी सहायता प्रदान करेगा.
  • संयुक्त राष्ट्र के उस तंत्र (Snapback mechanism) को खत्म किया जाएगा जिससे प्रतिबंध दोबारा लग सकते हैं.


ईरान ने इस प्रस्ताव को 'अनुचित और अधिकतमवादी' (Maximalist) बताकर खारिज कर दिया है. ईरान का कहना है कि वह अपनी शर्तों पर युद्ध खत्म करेगा, जिसमें हमलों की स्थायी समाप्ति और युद्ध के नुकसान का हर्जाना शामिल है. 

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