Iran के 1000 पाउंड यूरेनियम पर US की टेढ़ी नजर, लेकिन कैसे करेगा हासिल? Trump ने तैयार किया खतरनाक प्लान
Donald Trump के निर्देश पर अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्जे की हाई-रिस्क सैन्य योजना बनाई है. इस मिशन में हजारों सैनिक और जमीनी ऑपरेशन शामिल हो सकते हैं. ईरान ने अमेरिका का प्रस्ताव ठुकरा दिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है.
ट्रंप ने तैयार किया ईरान के परमाणु भंडार को कब्जे में लेने का प्लान
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर United States Military ने Iran के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को कब्जे में लेने के लिए खतरनाक प्लान तैयार किया है. The Washington Post की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ऑपरेशन आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे जोखिम भरे मिशनों में से एक हो सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का लक्ष्य ईरान के भीतर मौजूद करीब 1000 पाउंड अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित करना है. यह कोई सामान्य हवाई हमला नहीं होगा, बल्कि दुश्मन क्षेत्र के अंदर जाकर बड़े पैमाने पर जमीनी सैन्य अभियान चलाना होगा.
इस मिशन को लिए अमेरिका को क्या करना होगा?
इस मिशन के लिए अमेरिकी सेना को:
- ईरान के अंदर प्रवेश करना होगा
- खुदाई के लिए भारी उपकरण ले जाने होंगे
- अस्थायी रनवे बनाना होगा
- भारी कार्गो विमानों से यूरेनियम निकालना होगा
बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन में सैकड़ों से लेकर हजारों सैनिक शामिल हो सकते हैं. यह कई हफ्तों तक चल सकता है. इतने बड़े जमीनी अभियान का मतलब होगा कि अमेरिकी सैनिक लंबे समय तक ईरान की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य प्रतिक्रिया के जोखिम में रहेंगे. इससे सीधा सैन्य टकराव और बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है.
ट्रंप ने क्या कहा ?
हाल ही में Donald Trump ने अपने संबोधन में कहा था कि जंग जल्द खत्म हो सकती है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अगले 2 से 3 हफ्तों तक सैन्य ऑपरेशन जारी रखेगा.
अमेरिका का 15-पॉइंट प्रस्ताव क्या है?
अमेरिका ने हाल ही में ईरान को 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव दिया था, जिसमें ईरान से अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम सौंपने की मांग, परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण और संघर्ष खत्म करने की शर्तें शामिल थीं. ट्रंप ने इस यूरेनियम को 'न्यूक्लियर डस्ट' बताया था.
हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जंग शुरू होने से पहले ईरान यूरेनियम समृद्धि स्तर कम करने को तैयार था, लेकिन पूरी तरह सौंपने को नहीं. यह घटनाक्रम मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकता है और संभावित रूप से बड़े सैन्य संघर्ष का कारण बन सकता है.