क्या अब समुद्र में होगी रूस-अमेरिका के बीच जंग? Russia ने तेल टैंकर के पास तैनात की पनडुब्बी; चुप नहीं बैठेंगे ट्रंप!

Russia-America Tension: अमेरिका और रूस के बीच समुद्र में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. एक पुराने और जर्जर तेल टैंकर को लेकर शुरू हुआ मामला अब अंतरराष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन का रूप ले चुका है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने इस टैंकर की सुरक्षा के लिए पनडुब्बी और अन्य नौसैनिक जहाज तैनात किए हैं.;

( Image Source:  X/ @TRUMP_ARMY_ @iluminatibot @SA_Defensa )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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Russia-America Tension: अमेरिका और रूस के बीच समुद्र में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. एक पुराने और जर्जर तेल टैंकर को लेकर शुरू हुआ मामला अब अंतरराष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन का रूप ले चुका है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने इस टैंकर की सुरक्षा के लिए पनडुब्बी और अन्य नौसैनिक जहाज तैनात किए हैं.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह टैंकर प्रतिबंधित तेल व्यापार से जुड़े एक गुप्त नेटवर्क का हिस्सा है. भले ही जहाज इस समय खाली हो, लेकिन इसके इर्द-गिर्द हो रही गतिविधियों ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है और यही वजह है कि अमेरिकी तटरक्षक बल लगातार इसका पीछा कर रहा है.

प्रतिबंधित तेल व्यापार और टैंकर का विवाद

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि रूस ने एक पुराने तेल टैंकर, जिसे पहले 'बेला 1' के नाम से जाना जाता था उसकी सुरक्षा के लिए एक पनडुब्बी और अन्य नौसैनिक पोत तैनात किए हैं. यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिका इस जहाज को प्रतिबंधित तेल शिपमेंट से जोड़कर देख रहा है.

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, खाली और जंग लगा हुआ यह टैंकर दो सप्ताह से अधिक समय से वेनेजुएला के पास मौजूद है और प्रतिबंधित तेल टैंकरों को निशाना बनाकर लगाए गए अमेरिकी दबाव से बचने की कोशिश कर रहा था. हालांकि यह जहाज वेनेजुएला में डॉक कर तेल लोड करने में असफल रहा, लेकिन इसके बावजूद यह अमेरिका की निगरानी में बना रहा.

अमेरिकी कोस्ट गार्ड की कार्रवाई

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इस टैंकर का अटलांटिक महासागर तक पीछा किया. अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि यह जहाज रूस से जुड़े तेल समेत काले बाजार के तेल की तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एक बड़े गुप्त बेड़े का हिस्सा हो सकता है. दिसंबर में हालात तब और गंभीर हो गए जब जहाज के चालक दल ने अमेरिकी अधिकारियों द्वारा जहाज पर चढ़ने के प्रयास का विरोध किया और टैंकर को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ले गया.

नाम और झंडा बदला

कोस्ट गार्ड के पीछा करने के बाद चालक दल ने जहाज के बाहरी हिस्से पर रूसी झंडा बना दिया, उसका नाम बदलकर मेरिनेरा रख दिया और उसका पंजीकरण रूस में करवा लिया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना निरीक्षण या मानक औपचारिकताओं के मॉस्को द्वारा इस जहाज को अपने ध्वज के तहत पंजीकृत करने की अनुमति देना एक असामान्य कदम है. यह अमेरिका द्वारा रूस से जुड़े तेल व्यापारिक जहाजों पर की जा रही कार्रवाई को लेकर रूस की बढ़ती चिंता को दर्शाता है.

रूस का विरोध और अमेरिका की प्रतिक्रिया

कई अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रूस ने औपचारिक रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका से टैंकर का पीछा करना बंद करने का अनुरोध किया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह स्थिति पर चिंता के साथ नजर रख रहा है. वहीं, सरकारी मीडिया ने इस घटना को एक नागरिक पोत के साथ अमेरिकी हस्तक्षेप के रूप में पेश किया है. व्हाइट हाउस ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन अमेरिकी सेना की दक्षिणी कमान ने स्पष्ट किया कि वह इस क्षेत्र से गुजरने वाले प्रतिबंधित जहाजों और व्यक्तियों के खिलाफ खड़े होने के लिए तैयार है.

वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी कोस्ट गार्ड अब भी टैंकर का पीछा कर रहे हैं जहाज फिलहाल पूर्वी अटलांटिक में आइसलैंड से लगभग 300 मील दक्षिण में है और जहाज-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक यह उत्तरी सागर की ओर बढ़ रहा है.

वेनेजुएला पर बढ़ता अमेरिकी दबाव

इसी बीच, व्हाइट हाउस वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रहा है. अमेरिकी प्रशासन ऊर्जा कंपनियों से संपर्क कर रहा है ताकि वेनेजुएला अपने तेल क्षेत्र को अमेरिकी निवेश और विशेषज्ञता के लिए और अधिक खोलने पर विचार करे. एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला के ऊर्जा भविष्य पर चर्चा के लिए प्रमुख अमेरिकी तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शुक्रवार को एक बैठक तय की गई है

तेल कीमतें और अमेरिका की खपत

एपी रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में तेल की कीमत लगभग 56 डॉलर प्रति बैरल है. इस हिसाब से ट्रंप प्रशासन द्वारा तय की गई मात्रा की कीमत करीब 2.8 अरब डॉलर तक हो सकती है. तुलनात्मक रूप से, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खपत करता है. इसका मतलब है कि वेनेजुएला को होने वाला यह ट्रांसफर अमेरिका की लगभग ढाई दिन की तेल आपूर्ति के बराबर होगा.

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