आतंकियों को पनाह देता है पाकिस्तान! लश्कर आतंकी ने खोली पाक सेना की पोल, कहा- प्रोग्राम के लिए करते हैं इनवाइट

पाकिस्तान एक बार फिर आतंकवाद के समर्थन को लेकर बेनकाब हुआ है. पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तानी सेना से खुले संबंध स्वीकार किए हैं. सेना के कार्यक्रमों में न्योता, भारत को धमकी और ऑपरेशन सिंदूर पर बयान ने पाकिस्तान के आतंक-समर्थन की सच्चाई उजागर कर दी है. जानिए पूरा मामला और इसके रणनीतिक मायने.;

( Image Source:  X/RitamMarathi )
Edited By :  नवनीत कुमार
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पाकिस्तान पर लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि उसकी सेना और आतंकी संगठनों के बीच गहरा गठजोड़ है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वह भले ही इन आरोपों से इनकार करता रहा हो, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले खुलासे उसकी पोल खोलते रहे हैं. अब एक बार फिर ऐसे सबूत सामने आए हैं, जिन्होंने इन आरोपों को और मजबूत कर दिया है. यह खुलासा सीधे तौर पर दिखाता है कि आतंकवाद और सत्ता के गलियारों के बीच की दूरी सिर्फ कागजों तक सीमित है.

पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने खुद इस गठजोड़ को स्वीकार किया है. उसने खुलासा किया कि उसे नियमित रूप से पाकिस्तानी सेना के कार्यक्रमों में बुलाया जाता है. इतना ही नहीं, सैनिकों के जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए भी उसे औपचारिक निमंत्रण मिलता है. यह बयान उस दावे की पुष्टि करता है कि आतंकियों को वहां संरक्षण हासिल है.

हाफिज सईद के संगठन का खुला इकबाल

सैफुल्लाह कसूरी, कुख्यात आतंकी हाफिज सईद के नेतृत्व वाले संगठन का डिप्टी चीफ है. ऐसे व्यक्ति का सेना के मंचों पर खुलेआम मौजूद होना कई सवाल खड़े करता है. यह सिर्फ वैचारिक समर्थन नहीं, बल्कि सक्रिय सहयोग का संकेत देता है. जब कोई आतंकी नेता खुद मंच से यह कहे कि उसे सेना बुलाती है, तो पाकिस्तान की ‘आतंक से दूरी’ की दलील खोखली नजर आती है.

बच्चों के सामने जहर, भारत को धमकी

हैरानी की बात यह है कि कसूरी ने ये बातें पाकिस्तान के एक स्कूल में बच्चों को संबोधित करते हुए कहीं. उसने दावा किया कि उसकी मौजूदगी से भारत डरता है और खुलेआम भड़काऊ बयान दिए. मासूम बच्चों के सामने इस तरह की भाषा इस्तेमाल करना बताता है कि किस तरह कट्टरपंथ की सोच नई पीढ़ी में भरी जा रही है. यह सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि भविष्य के लिए ज़हर बोने जैसा है.

ऑपरेशन सिंदूर पर कबूलनामा और पलटवार

कसूरी इससे पहले यह भी स्वीकार कर चुका है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया. हालांकि, उसने उल्टा दावा किया कि आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर भारत ने “गलती” की. उसने कश्मीर को लेकर संगठन के एजेंडे को दोहराया और कहा कि यह मिशन कभी खत्म नहीं होगा. यह बयान आतंक के इरादों को साफ तौर पर उजागर करता है.

‘मास्टरमाइंड’ होने पर गर्व

एक रैली के दौरान कसूरी ने यह भी कहा कि पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताए जाने के बाद वह दुनिया भर में मशहूर हो गया है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर में दिए गए इस बयान ने उसकी मानसिकता को उजागर कर दिया. किसी आतंकी हमले में निर्दोषों की मौत पर शर्मिंदा होने के बजाय, वह इसे अपनी पहचान और शोहरत बता रहा है. यह आतंक को महिमामंडित करने की खतरनाक सोच को दिखाता है.

भारत की जवाबी कार्रवाई

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी. इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इसके बाद भारत ने आतंक के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया. यह संदेश साफ था कि अब हमले का जवाब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा.

चार दिन तक था तनाव

7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया. चार दिनों तक चले इस सैन्य तनाव के बाद 10 मई को दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ. लेकिन सैफुल्लाह कसूरी जैसे बयानों ने दिखा दिया कि जमीन पर हालात अभी भी गंभीर हैं. जब तक आतंक और सत्ता का गठजोड़ खत्म नहीं होता, तब तक शांति सिर्फ एक औपचारिक शब्द बनी रहेगी.

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