क्या 24 घंटे के अंदर ही टूट जाएगा सीजफायर? ईरान की चेतावनी से मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव

ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अगर दक्षिणी लेबनान में सैन्य गतिविधियां नहीं रुकती हैं, तो इजरायल की राजधानी तेल अवीव को निशाना बनाया जा सकता है. इस बयान के बाद सीजफायर को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

Iran Israel war Ceasefire

(Image Source:  X/ @MarioNawfal )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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बुधवार 8 अप्रैल को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर का एलान कर दिया. सीजफायर को लेकर ईरान ने अमेरिका के सामने 10 शर्तें भी रखी है. फिलहाल 2 हफ्तों के लिए सीजफायर है. हालांकि इजरायल ने सीजफायर को लेकर नाराजगी दिखाई थी, क्योंकि ईरान द्वारा 10 शर्तों में से एक है कि लेबनान में हमलें रोके जाए. जिसके लिए इजरायल कतई राजी नहीं है. सीजफायर के बाद भी इजरायल ने लेबनान में हमला किया. जिसके बाद ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक कड़ी चेतावनी जारी कर स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अगर दक्षिणी लेबनान में सैन्य गतिविधियां नहीं रुकती हैं, तो इजरायल की राजधानी तेल अवीव को निशाना बनाया जा सकता है. इस बयान के बाद सीजफायर को लेकर नई बहस छिड़ गई है. जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या 24 घंटे के अंदर ही सीजफायर टूट जाएगा?

क्या है ईरान की चेतावनी?

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा "अगर दक्षिणी लेबनान में गोलीबारी कुछ ही घंटों में नहीं रुकती है, तो वायु और मिसाइल इकाई तेल अवीव पर बमबारी करेगी." यह बयान ऐसे समय में आया है जब यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका-ईरान युद्धविराम लेबनान पर लागू होता है या नहीं.

लेबनान को लेकर अलग-अलग दावे क्यों?

युद्धविराम के दायरे को लेकर अलग-अलग पक्षों के बीच विरोधाभास बना हुआ है. जहां शहबाज शरीफ का कहना है कि इस दो सप्ताह के सीजफायर में लेबनान भी शामिल है, वहीं बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने इसे खारिज कर दिया है. इजरायल का स्पष्ट रुख है कि यह समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता और वह वहां अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रख सकता है.

क्या हिजबुल्लाह ने रोके हमले?

हिजबुल्लाह ने बुधवार तड़के उत्तरी इजरायल और लेबनान में इजरायली सैनिकों पर हमले रोक दिए थे. यह कदम पहले घोषित युद्धविराम के अनुरूप माना जा रहा है. हालांकि, संगठन की ओर से औपचारिक बयान आने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें वह अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा और इजरायल के दावों का जवाब देगा.

क्या है इजरायल का रुख?

इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम फैसले का समर्थन तो किया है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि यह लेबनान पर लागू नहीं होगा. इजरायली सरकार ने दक्षिणी लेबनान के एक शहर के लिए नया निकासी आदेश जारी किया है, जो यह संकेत देता है कि वहां सैन्य अभियान जारी रह सकता है.

इजरायल ने कहा है कि वह अमेरिका के फैसले का समर्थन तभी करेगा, जब ईरान तुरंत जलडमरूमध्य खोले और क्षेत्र में हमले बंद करे. साथ ही इजरायल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अमेरिका के उन प्रयासों के साथ है, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु, मिसाइल या आतंकवादी खतरा न बने.

कब होगी अगली बातचीत?

तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. ईरान ने घोषणा की है कि अमेरिका के साथ अगली वार्ता 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होगी. इस बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा, जो इस पूरे संघर्ष में एक अहम कड़ी बनकर उभरा है.

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