कई आए और कई गए, एक्सपर्ट ने बताई कैसी और कितनी पुरानी है ईरानी सभ्यता, जिसे एक रात में खत्म करने चले थे Donald Trump?
5000 साल पुरानी ईरानी सभ्यता आज भी जिंदा है. जानिए इसका इतिहास, सांस्कृतिक ताकत और क्यों Donald Trump जैसे बयानों के बावजूद इसे खत्म करना आसान नहीं. इस सभ्यता को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट.
ईरानी सभ्यता लगभग 5000 साल से ज्यादा पुरानी, बहु-स्तरीय और बेहद लचीली सभ्यता है, जो सिर्फ इतिहास नहीं बल्कि आज भी जिंदा हकीकत है. साम्राज्य टूटे, हमले हुए, सत्ता बदली, लेकिन इसकी पहचान नहीं मिटी. यही कारण है कि जब कोई इसे 'खत्म' करने की बात करता है, तो इतिहास खुद इसका जवाब देता है. 'सभ्यताएं, बम और तलवार से नहीं मिटतीं, वे समय के साथ बदलती हैं, लेकिन हमेशा जिंदा रहती हैं. इस बात को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नहीं समझ पाए. ईरानी सभ्यता को 24 घंटे के अंदर ध्वस्त करने की चेतावनी दे दी. हुआ क्या, ईरान ने ट्रंप के सामने 10 मांगे रख दी और कहा कि इसे पूरा होने के बाद जंग का समाधान निकलेगा. अपने देश के आंतरिक और वैश्विक दबावों के आगे झुकते हुए ईरान की मांगों पर एक तरह हामी भरते हुए उन्होंने 14 दिनों के लिए युद्ध विराम की घोषणा कर दी, इसकी जिसकी पुष्टि ईरान के विदेश के मंत्री ने की.
अहम सवाल यह है कि क्या कोई राष्ट्र क्या, या कोई सुपरपावर सभ्यता को खत्म कर सकता है. इस पर दिल्ली विश्वविद्यालय इतिहास के प्रोफेसर अजीत कुमार क्या कहना है, जानिए डिटेल में.
जानें, कैसे पनपती है सभ्यता और संस्कृति?
इतिहास के प्रोफेसर अजीत कुमार का कहना है कि ईरानी सभ्यता दुनिया की सबसे प्राचीन और निरंतरता वाली सभ्यताओं में से एक है, जिसकी जड़ें लगभग 5 से 7 हजार वर्ष पुरानी हैं. हालांकि, कुछ पुस्तकों में इसे 5000 साल पुराना बताया गया है. उन्होंने कहा कि करीब 3200 ईसा पूर्व प्रोटो-एलामाइट काल से लेकर 2700 ईसा पूर्व एलामाइट साम्राज्य तक, ईरान के जाग्रोस पर्वतीय क्षेत्र में मानव बस्तियां विकसित हो चुकी थीं. 750 ईसा पूर्व फारसी जनजातियों के बसने के बाद 550 ईसा पूर्व साइरस महान (साइरस द ग्रेट) ने अकमेनिड साम्राज्य की नींव रखी, जो विश्व का पहला वृहद साम्राज्य बना, जिसने मध्य एशिया, मेसोपोटामिया, अनातोलिया और मिस्र तक विस्तार किया.
इसके बाद अचेमेनिड, पार्थियन, सासानिड काल से गुजरते हुए ईरान इस्लामी युग में भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में कामयाब रहा. यह सभ्यता केवल राजवंशों की नहीं, बल्कि ज्ञान, कला, वास्तुकला और दार्शनिक परंपराओं की अमर विरासत है, जो आज भी फारसी भाषा, कविता और सांस्कृतिक गौरव के रूप में भी जीवित है.
प्रोफेसर अजीत कुमार के मुताबिक , 'कोई भी सभ्यता और संस्कृति साझेपन से पनपती और बिगड़ती है. दुनिया की सभ्यताओं के पतन के विभिन्न कारण रहे हैं. युद्ध से कोई भी सभ्यता या संस्कृति पूरी तरह नष्ट नहीं हो सकती. हां, युद्ध में किसी की हार और जीत हो सकती है.'
क्या 'प्रेसर पॉलिटिक्स' है ट्रंप की चेतावनी?
डीयू के प्रोफेसर ने आगे कहा कि 7 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तीखे और चेतावनी भरे बयान जारी किए, जिनमें उन्होंने कहा कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने पर सहमत नहीं हुआ तो “एक पूरी सभ्यता आज रात नष्ट हो जाएगी, जो कभी वापस नहीं लाई जा सकेगी.” ट्रंप यही नहीं रुके, उन्होंने आगे चेतावनी दी कि “पूरी देश को एक रात में समाप्त किया जा सकता है.” यहां तक कि उन्होंने पावर प्लांट्स व ब्रिजेस को निशाना बनाने की भी धमकी दी.
उनका यह यह बयान वर्तमान अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आया. ट्रंप के इस बयान का मकसद ईरान पर दबाव डालकर होर्मुज जलडमरूमध्य खुलवाना था, जो विश्व के तेल व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है. ट्रंप की यह आक्रामक रणनीति पुरानी ‘अधिकतम दबाव’ नीति का ही विस्तार है, जिसमें वे ईरान को परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और इजरायल के साथ संघर्ष के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, 'यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़बोलापन है, जिससे ईरान डरने और झुकने को मजबूर नहीं है. जब जनता वहां की सत्ता के साथ हो तो किसी राष्ट्र को वहां की राजनीति और संस्कृति को बदलने की बात करना बेईमानी होगी. असली बात है वहां के अकूत तेल भंडार पर नियंत्रण और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बे रोकटोक आवाजाही तय करना है. ईरान की ओर से भी स्पष्ट है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए दृढ़ है और ऐसे बयानों को “व्यक्तित्व का प्रतिबिंब” मानकर खारिज कर रहा है.
इतिहास गवाह है कि ईरानी सभ्यता बार-बार चुनौतियों से उबरकर मजबूत हुई है. इसलिए, कूटनीति और संवाद ही ऐसे जटिल संघर्षों का स्थायी समाधान हो सकता है, जिसमें भारत जैसे विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका और भी प्रासंगिक हो जाती है.'
क्या सच में 5000 साल पुरानी है ईरानी सभ्यता?
ईरान की सभ्यता दुनिया की सबसे प्राचीन और लगातार जीवित रहने वाली सभ्यताओं में गिनी जाती है. इसके टाइम पीरियड को लेकर इतिहासकारों की राय अलग-अलग है. इस सभ्यता की शुरुआत लगभग 3000 ईसा पूर्व मानी जाती है, जब Elam नाम की सभ्यता दक्षिण-पश्चिम ईरान में विकसित हुई. यह वह दौर था जब दुनिया में सभ्यता का शुरुआती विकास हो रहा था, लेकिन ईरान की खासियत यह रही कि यहां सभ्यता का प्रवाह कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. समय के साथ साम्राज्य बदले, शासक बदले, लेकिन सांस्कृतिक निरंतरता बनी रही. इसी वजह से इतिहासकार ईरान को “कंटीन्यूअस सिविलाइजेशन” यानी निरंतर चलने वाली सभ्यता मानते हैं.
क्या ईरान कभी दुनिया का पहला सुपरपावर रहा है?
छठी शताब्दी ईसा पूर्व में Cyrus the Great ने Achaemenid Empire की स्थापना की, जिसे इतिहास का पहला “मल्टी-नेशनल” साम्राज्य कहा जाता है. यह साम्राज्य एशिया, अफ्रीका और यूरोप तक फैला हुआ था. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों को सम्मान दिया जाता था. “साइरस सिलेंडर” को दुनिया के शुरुआती मानवाधिकार दस्तावेजों में गिना जाता है, जिसमें लोगों को अपनी आस्था और जीवन जीने की आजादी दी गई थी. यह मॉडल आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की नींव जैसा माना जाता है.
क्या भाषा और साहित्य ने ईरान को अमर बना दिया?
ईरानी सभ्यता की असली ताकत उसकी भाषा और साहित्य में छिपी है. फारसी भाषा ने न केवल ईरान, बल्कि भारत, मध्य एशिया और ओटोमन साम्राज्य तक गहरा प्रभाव डाला. Shahnameh, जिसे Ferdowsi ने लिखा, दुनिया की सबसे लंबी महाकाव्य रचनाओं में से एक है. इसमें ईरान के इतिहास, राजाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का वर्णन मिलता है. मुगल काल में भारत की दरबारी भाषा भी फारसी रही, जिससे भारतीय संस्कृति पर भी इसका गहरा असर पड़ा. यही साहित्यिक ताकत ईरान की पहचान को सदियों तक जिंदा रखती रही.
विज्ञान और ज्ञान में ईरान ने दुनिया को क्या दिया?
ईरान ने केवल संस्कृति ही नहीं, बल्कि ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में भी दुनिया को बहुत कुछ दिया. Avicenna (इब्न सीना) ने चिकित्सा और दर्शन में ऐसे ग्रंथ लिखे, जो यूरोप में सैकड़ों साल तक पढ़ाए जाते रहे. वहीं Omar Khayyam ने गणित और खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया. खासकर कैलेंडर सुधार में. फारसी विद्वानों ने दवा, गणित और दर्शन को नई दिशा दी, जिसका असर आज भी आधुनिक विज्ञान में दिखाई देता है.
Zoroastrianism ने ईरानी पहचान को आकार दिया?
ईरान की प्राचीन पहचान Zoroastrianism से जुड़ी रही है, जो दुनिया के सबसे पुराने एकेश्वरवादी धर्मों में से एक है. इसमें अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष की अवधारणा प्रमुख है. बाद में 7वीं सदी में इस्लाम आया, लेकिन ईरान ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह नहीं छोड़ा. उसने इस्लाम को अपने रंग में ढाल लिया, यही वजह है कि ईरानी इस्लाम का स्वरूप अन्य देशों से अलग नजर आता है.
इतने हमलों के बावजूद Iran खत्म क्यों नहीं हुआ?
ईरान का इतिहास कई बड़े आक्रमणों से भरा पड़ा है. इनमें Alexander the Great का हमला भी शामिल है. अरब और मंगोलों का आक्रमण भी हुआ. हर बार साम्राज्य बदले, लेकिन ईरान की भाषा, संस्कृति और पहचान खत्म नहीं हुई. इसका कारण इसकी लचीलापन है. ईरान ने हर बाहरी प्रभाव को अपनाया, लेकिन अपनी मूल पहचान को बचाए रखा. यही वजह है कि यह सभ्यता हर संकट के बाद और मजबूत होकर उभरी.