Iran Israel War : Trump की 10 गलतियां, जिसके चलते अपने घर में बेगाने हुए US प्रेसिडेंट

Iran Israel War के बीच Donald Trump की लोकप्रियता क्यों गिर रही है? जानें उनकी 10 बड़ी गलतियां- महंगाई, युद्ध, पेट्रोल कीमतें और वोटर्स की नाराजगी का पूरा विश्लेषण.

File Photo: Donald Trump Credit: ANI

Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 27 March 2026 5:28 PM IST

Donald Trump के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद उनकी लोकप्रियता लगातार गिर रही है, जो उनके लिए राजनीतिक खतरे का संकेत बनती जा रही है. महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और खासकर Iran के साथ चल रहे युद्ध ने आर्थिक चिंताओं को और गहरा कर दिया है. इस बीच सामने आए Ipsos के सर्वे के मुताबिक, अर्थव्यवस्था को संभालने को लेकर ट्रंप की अनुमोदन रेटिंग 43% से गिरकर 35% और फिर 29% तक पहुंच गई. वहीं, युद्ध के तीन हफ्तों के भीतर पेट्रोल की कीमतें लगभग $4 प्रति गैलन हो गईं, जिससे जनता में असंतोष बढ़ा.

बीबीसी ने राजनीतिक विश्लेषक Nate Silver के हवाले से बताया कि ट्रंप की कुल अप्रूवल रेटिंग 52% से घटकर करीब 40% रह गई है. यह गिरावट खासतौर पर निर्दलीय मतदाताओं के बीच बढ़ती नाराजगी को दिखाती है, जो 2024 में उनकी जीत का बड़ा कारण थे.

हालांकि, रिपब्लिकन समर्थक अभी भी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं. करीब 86% ईरान में सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं, लेकिन आम मतदाताओं में यह समर्थन काफी कम है.आर्थिक दबाव, बढ़ती कीमतें और युद्ध का असर ट्रंप की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर रहा है, खासकर तब जब मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं. जानें ट्रंप ने ऐसी कौन सी 10 गलियां की, जिसकी वहज से वो मिडिल ईस्ट तो छोड़िए अपने घर में भी घिरते जा रहे हैं.

1. ईरान युद्ध शुरू करने में दिखाई जल्दबाजी

मिडिल ईस्ट वॉर में Iran के साथ टकराव में जल्दी सैन्य कदम उठाने से ट्रंप पर “गैर जरूरी युद्ध शुरू करने का आरोप लगा. इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा और अमेरिकी जनता में डर पैदा हुआ कि देश लंबे युद्ध में फंस सकता है. इसने खासकर युवा और उदार मतदाताओं को उनसे दूर कर दिया.

2. महंगाई पर नियंत्रण करने में रहे विफल

बढ़ती कीमतें और जीवन-यापन की लागत पर ठोस नियंत्रण न कर पाना बड़ी कमजोरी बना. ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के एक महीने में तीन डॉलर बढ़ गया है. रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने से मध्यम वर्ग प्रभावित हुआ. आर्थिक मोर्चे पर असंतोष ने सीधे उनकी अप्रूवल रेटिंग को गिराया.

3. पेट्रोल कीमतों में उछाल

युद्ध के बाद ईंधन कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिससे आम जनता की जेब पर असर पड़ा. लोग इसे सरकार की रणनीतिक असफलता मानने लगे. ऊर्जा नीति पर स्पष्ट योजना न होने से ट्रंप की आर्थिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए.

4. वोटर्स के भरोसे को नहीं रखा कायम

2024 में जीत दिलाने वाले इंडिपेंडेंट और वोटर्स धीरे-धीरे दूर होने लगे. उनकी नीतियों को अधिक ध्रुवीकरण करने वाला माना गया. संतुलित नेतृत्व की कमी और आक्रामक राजनीतिक शैली ने मध्यमार्गी मतदाताओं को असहज किया.

5. लोगों को आक्रामक विदेश नीति पसंद नहीं

ट्रंप की “हार्ड पावर” आधारित विदेश नीति ने कई मोर्चों पर तनाव बढ़ाया. सहयोगियों के बजाय टकराव की रणनीति अपनाने से अमेरिका की वैश्विक छवि प्रभावित हुई. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा कम हुआ और घरेलू स्तर पर आलोचना बढ़ी.

6. आर्थिक मोर्चों पर लिए गलत फैसले

Ipsos जैसे सर्वे में उनकी आर्थिक हैंडलिंग पर भरोसा लगातार गिरा. 40% से नीचे जाती रेटिंग ने संकेत दिया कि लोग उनकी आर्थिक नीतियों से संतुष्ट नहीं हैं. खासकर टैरिफ लागू करने को लेकर उन्होंने जो मनमाने रवैये अपनाए, वो लोगों को पसंद नहीं आए. यह किसी भी राष्ट्रपति के लिए सबसे बड़ा खतरे का संकेत होता है.

7. सियासी ध्रुवीकरण को नहीं रोक पाना

ट्रंप की बयानबाजी और नीतियों ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच खाई और गहरी कर दी. इससे bipartisan समर्थन खत्म होता गया. नतीजतन, वे केवल अपने कोर वोट बैंक तक सीमित होते दिखे. उनके समर्थक उनसे दूर होते रहे. उन्होंने ब्लैक और व्हाइट के बीच भी भेद को बढ़ावा दिया.

8. मिडटर्म चुनाव को गंभीरता न लेना

आगामी चुनावों के लिए स्पष्ट रणनीति और मैसेजिंग की कमी दिखी. आर्थिक मुद्दों पर डिफेंसिव रुख और युद्ध पर आक्रामकता का मिश्रण मतदाताओं को भ्रमित कर रहा है. इससे पार्टी के प्रदर्शन पर भी असर पड़ सकता है. न्यूयॉर्क सिटी मेयर चुनाव सहित कई अन्य चुनावों में रिपब्लिकन की हार ने अमेरिकी जनता को निराश किया.

9. जनता से कनेक्ट कम होना

जमीनी मुद्दों की बजाय बड़े राजनीतिक और सैन्य फैसलों पर फोकस ने आम जनता से दूरी बढ़ाई. रोजमर्रा की परेशानियों - जैसे नौकरी पर महंगाई को लेकर कम संवाद से लोगों को लगा कि सरकार उनकी समस्याओं से कट गई है.

10. लगातार विवादों में बने रहना

दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में मिलने वाला राजनीतिक समर्थन (honeymoon phase) ट्रंप लंबे समय तक बनाए नहीं रख पाए. जल्दी विवादों और कठिन फैसलों में उलझने से शुरुआती भरोसा तेजी से गिर गया, जो बाद में संभालना मुश्किल हो गया. उन्होंने हर मोर्चे पर विवाद को गंभीर से न हीं लिया. मामला एलन मस्क विवाद का हो या कनाडा, ईयू या टैरिफ के मसले पर विवाद. हर मसले पर वो अपनी जिद पर अड़े रहे.

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