हो गया साफ! ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने को भारत ने बनाया था निशाना, एक्सपर्ट ने कहा - भर-भर के हैं सबूत
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर साइट किराना हिल्स पर हमला किा था. ये दावा एक एक्सपर्ट ने किया है. उनका कहना है कि इसके बाद ही पाकिस्तान अपने घुटनों पर आ गया था.;
India Attacked on Nuclear Site of Pak: ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्या कोई एक ऐसा हमला था जिसने पाकिस्तान को भारत के साथ युद्धविराम की दिशा में कदम बढ़ाने पर मजबूर किया? इस सवाल पर लंबे समय से बहस होती रही है. अब दुनिया के जाने-माने एविएशन इतिहासकार और सैन्य विश्लेषक टॉम कूपर ने इस मुद्दे पर बड़ा दावा किया है.
भारतीय वायुसेना ने भले ही किराना हिल्स पर हमले से इनकार किया हो, लेकिन कूपर का कहना है कि पाकिस्तान के अहम न्यूक्लियर स्टोरेज साइट में से एक और पूर्व न्यूक्लियर टेस्ट साइट रहे किराना हिल्स को निशाना बनाया गया था. उनके मुताबिक, उस वक्त तक पाकिस्तान खत्म हो चुका था
क्या होले एविएशन इतिहासकार?
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टॉम कूपर ने कहा कि यह ऐसा टारगेट था जिस पर हमला करके एक साफ संदेश दिया जा सकता था, और इससे कोई नुकसान भी नहीं होता. उनके मुताबिक यह संदेश था कि भारत जहां चाहे, जब चाहे और जितनी मात्रा में चाहे, हमला करने की क्षमता रखता है.
क्या पाकिस्तान ने की सीज़फार की कोशिश?
उन्होंने हमले के समय और कूटनीतिक गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि उसी दौरान इस्लामाबाद वॉशिंगटन और नई दिल्ली से संपर्क कर रहा था और सीजफायर की कोशिश कर रहा था. कूपर ने कहा कि भले ही पाकिस्तान ने सीधे तौर पर भीख नहीं मांगी, लेकिन घटनाक्रम से साफ था कि वह संघर्ष रोकना चाहता था.
क्या हमले का है कई सबूत?
जब उनसे पूछा गया कि उनके पास क्या प्रमाण हैं, तो कूपर ने कहा कि एक नहीं बल्कि कई सबूत मौजूद हैं. उन्होंने पाकिस्तान में शूट किए गए वीडियो का हवाला दिया, जिनमें मिसाइलों के धुएं की लकीरें दिखाई देती हैं जो नीचे की ओर गिरते हुए पहाड़ी इलाके में टकराती नजर आती हैं.
न्यूक्लियर साइट के किस प्वाइंट पर हुआ हमला?
उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी वायुसेना की 4091वीं स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से उठता धुआं भी इस बात का संकेत देता है कि पहले रडार को निशाना बनाया गया ताकि जवाबी कार्रवाई की क्षमता कमजोर हो, और उसके बाद अंडर ग्राउंड स्थलों के कम से कम दो एंट्री गेट को हिट किया गया.
पाकिस्तान के लिए कितना अहम है किराना हिल्स?
कूपर के मुताबिक किराना हिल्स पाकिस्तान के परमाणु प्रोग्राम का अहम हिस्सा रहा है, जहां 20 से 24 गैर-क्रिटिकल परमाणु परीक्षण किए गए थे. उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य स्थल नहीं है. उनका दावा है कि उस समय पाकिस्तान का ऑपरेशन बुनयान-उन-मरसूस, जो ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में शुरू किया गया था, पूरी तरह नाकामयाब हो चुका था.
कूपर ने कहा कि अमेरिका की एक एटॉमिक साइंटिस्ट्स बुलेटिन में इस जगह को न्यूक्लियर साइट के तौर पर कैटेग्रइज किया है, और भारतीय विश्लेषकों ने भी यही निष्कर्ष निकाला है. उनके मुताबिक वहां करीब 40 मजबूत शेल्टर, दो मेंटेनेंस सुविधाएं और 50 से ज्यागा अंडरग्राउंड एंट्री गेट मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि यह कोई मनोरंजन स्थल नहीं बल्कि परीक्षण और भंडारण से जुड़ा परमाणु परिसर है. भले ही वहां रिएक्टर न हो, इसका मतलब यह नहीं कि वहां परमाणु हथियार नहीं हैं.
टॉप ने क्या उठाया अहम सवाल?
उन्होंने यह भी कहा कि सरगोधा, जो पाकिस्तानी वायुसेना का अहम अड्डा है, किराना हिल्स के पास मौजूद है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आसपास कोई स्टॉक फैसिलिटी नहीं है तो वहां एफ-16 स्क्वाड्रन को परमाणु हथियार ले जाने के लिए क्यों ट्रेन किया जा रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर में किन हथियारों का हुआ इस्तेमाल?
भारत ने पाकिस्तान की तरफ सु-30 विमानों से ब्रह्मोस और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं, जैगुआर विमानों से रैम्पेज लॉन्च की गईं और राफेल से स्कैल्प मिसाइलें इस्तेमाल की गईं. कूपर ने भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली की खास तौर पर सराहना की. उनके मुताबिक इस प्रणाली ने न केवल रक्षात्मक रूप से काम किया बल्कि बहुत तेजी से आक्रामक कार्रवाई समन्वित करने में भी मदद की.