क्या अब हद में रहेगा बांग्लादेश का PM? 10 प्वाइंट्स में समझिए जुलाई चार्टर, जिस पर मचा है पड़ोस में पंगा

बांग्लादेश में जुलाई चार्टर को लेकर बवाल मचा हुआ है. जमात-ए-इस्लामी ने आरोप लगाया है कि तारिक रहमान इस चार्टर को अपनाना नहीं चाहते हैं, इसके विरोध में विपक्ष ने शपथ लेने से इंकार कर दिया और देश भर में विरोध प्रदर्शन की धमकी दी. सीधे तौर पर जुलाई चार्टर सरकार के मनचाहे फैसलों पर लगाम लगाने का काम करता है.;

( Image Source:  X- @bdbnp78 )
Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 18 Feb 2026 9:14 AM IST

What is July Charter: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर टकराव के हालात बने हुए हैं. नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में सत्ता संभालने के बाद मंगलवार को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए. विवाद की वजह बना हालिया जनमत संग्रह (रेफरेंडम) से जुड़ा एक शपथ पत्र. रेफरेंडम में सरकार कोई भी फैसला लेने से पहले जनता की राय वोटिंग के जरिए लेती है.

ऐसा मना जा रहा है कि अगर अगर जुलाई चार्टर पर अमल किया जाता है, तो तारिक रहमान की पावर सीमित हो जाएगी और वह अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही ये चार्टर विपक्ष को पावर देने का भी काम करता है.

क्या है मामला?

दरअसल, बीते रोज BNP के चुने हुए सांसदों ने संसद सदस्य के तौर पर शपथ ली, लेकिन उन्होंने संविधान सुधार परिषद (Constitution Reform Council) में सेवा देने से जुड़ी अलग शपथ लेने से इनकार कर दिया. ये काउंसिल अंतरिम प्रशासन के जरिए लाए गए एक प्रस्ताव का हिस्सा है, जिसमें रेफरेंडम की बात की गई है.

इसी बात से जमात-ए-इस्लामी के सदस्य नाराज़ हो गए और विरोध में अपनी शपथ ही नहीं ली और देश भर में प्रदर्शन की चेतावनी दे दी. हालांकि BNP ने साफ किया कि वह जुलाई नेशनल चार्टर को लागू करेगी.

बीएनपी सांसद ने क्या कहा?

BNP के स्थायी समिति सदस्य और कॉक्स बाजार-1 से सांसद सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि पार्टी जुलाई नेशनल चार्टर को उसी रूप में लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जैसा कि राजनीतिक दलों के बीच सहमति से हस्ताक्षरित दस्तावेज में तय हुआ था.उन्होंने यह बयान संसद भवन में संसदीय दल की पहली बैठक के बाद दिया.

10 प्वाइंट्स में समझिए क्या है जुलाई नेशनल चार्टर 2025

  1. जुलाई नेशनल चार्टर 2025 देश के संविधान में बदलाव के लिए प्रस्तावित सुधार पैकेज है.
  2. यह चार्टर अगस्त 2024 में शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद तैयार किया गया था.
  3. इसमें जनमत संग्रह को अपनाने की बात की गई है. यानी अगर सरकार कोई भी फैसला लेती है तो उसे पहले जनता से वोटों के जरिए पास कराना होगा.
  4. जुलाई नेशनल चार्टर को लागू करने के लिए एक अलग और विशेष निकाय (काउंसिल) बनाया जाएगा, जिसे संविधान सुधार परिषद कहा जाएगा. इस परिषद की जिम्मेदारी होगी कि जनमत संग्रह में जिन संवैधानिक बदलावों को मंजूरी मिली है, उन्हें तय समयसीमा के भीतर अमल में लाया जाए. चार्टर के मुताबिक, परिषद अपनी पहली बैठक होने के बाद 180 कार्य दिवस (यानी कामकाजी दिन) के अंदर इन सुधारों की प्रक्रिया पूरी करेगी..
  5. इसका नाम 2024 के जुलाई आंदोलन के नाम पर रखा गया, जिसके बाद राजनीतिक बदलाव हुआ था और शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी.
  6. इसमें 100 सीटों वाला एक उच्च सदन बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी सीटें पार्टियों के राष्ट्रीय वोट प्रतिशत के आधार पर तय होंगी.
  7. कोई भी व्यक्ति अनिश्चितकाल तक प्रधानमंत्री नहीं रह सकेगा. जुलाई नेशनल चार्टर में प्रस्ताव है कि प्रधानमंत्री के पद पर रहने की अवधि (टर्म) की एक तय अधिकतम संख्या निर्धारित की जाएगी.
  8. जुलाई चार्टर में संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की बात कही गई है.
  9. इसके साथ ही इसमें विपक्ष के नेता को डिप्टी स्पीकर और संसदीय समितियों की अध्यक्षता देने का प्रावधान भी शामिल है.
  10. इस चार्टर में राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ाने का प्रस्ताव भी. राष्ट्रपति के अधिकारों को और मजबूत करने की बात कही गई है.

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