फाइटर जेट बेचकर IMF से छुटकारा दिन में सपना देखने के बराबर, आसिफ के बयान पर दुनिया भर में छिछालेदर

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि फाइटर जेट बेचकर देश IMF से लोन लेना बंद कर देगा. वहीं, पाकिस्तान के ही अर्थशास्त्री और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान पर इतना कर्ज है कि जेएफ-17 थंंडर बेचने भर से उसका चुकता नहीं हो सकता. इसलिए, रक्षा मंत्री का बयान 'दिन में सपना देखने जैसा है.' जानिए इस दावे के पीछे की पाकिस्तान की आर्थिक हकीकत.;

( Image Source:  Haroon Gill ®️ @HaroonSmt )
Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 8 Jan 2026 6:38 PM IST
पाकिस्तान की डांवाडोल अर्थव्यवस्था के बीच रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक बयान दुनियाभर में हेडलाइंस में है. उन्होंने दावा किया कि अगर पाकिस्तान अपने लड़ाकू विमानों का निर्यात बढ़ाता है तो उसे भविष्य में IMF से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हालांकि, इस दावे पर पाकिस्तान के ही एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'दिन में सपना देखने जैसा' करार दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट्स बेचकर पाकिस्तान अपनी गहरी आर्थिक मुश्किलों से वाकई बाहर निकल सकता है?

ख्वाजा आसिफ का बयान क्या है?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि इस्लामाबाद को फाइटर जेट्स के रिकॉर्ड ऑर्डर मिल रहे हैं और छह महीने बाद उसे IMF की फाइनेंशियल मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने कहा कि यह भारत के साथ चार दिन की छोटी लड़ाई के बाद हुआ है. सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ जेट्स के बदले लोन की डील पर विचार कर रहा है. जानें, आसिफ के दावे के मुकाबले पाकिस्तान पर पब्लिक कर्ज कितना है?

दरअसल, पाकिस्तान को IMF की एक शर्त के कारण अपनी फ्लैग-कैरियर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा था. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के दावों के अनुसार, छह महीने बाद मल्टीनेशनल फाइनेंशियल बॉडी की मदद की जरूरत नहीं पड़ सकती है. मंत्री के दावे पाकिस्तान को मिल रहे रक्षा ऑर्डर में बढ़ोतरी के बाद आए हैं, जिसमें चीन में बना एक फाइटर जेट भी शामिल है. हालांकि, पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और जेट के प्रोडक्शन में उसकी भूमिका को देखते हुए, आसिफ के दावे सिर्फ ख्याली पुलाव जैसे लगते हैं.

जिओटीवी से बात करते हुए ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि मई 2025 में भारत के साथ चार दिन की छोटी लड़ाई के बाद पाकिस्तान के साथ रक्षा ऑर्डर इतने बढ़ गए हैं कि पाकिस्तान जल्द ही इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से लोन लेना बंद कर सकता है।

 $7 बिलियन लोन को IMF ने दी थी मंजूरी  

IMF ने 2023 में पाकिस्तान के लिए $7 बिलियन के फाइनेंशियल मदद प्रोग्राम को मंजूरी  दी थी. हालांकि, यह मदद इस्लामाबाद के लिए फाइनेंशियल सुधार की शर्तों के साथ मिला था. PIA का प्राइवेटाइजेशन भी उस प्लान का हिस्सा था. आईएमएफ के $3 बिलियन की तुरंत रिलीज से इस्लामाबाद को सॉवरेन डिफॉल्ट से बचने में मदद मिली थी. जबकि $1 बिलियन मई में तब रिलीज किया गया जब पाकिस्तान भारत के साथ युद्ध में उलझा हुआ था.

सऊदी अरब समेत 6 देश जेएफ -17 लेने को तैयार 

पाकिस्तान और सऊदी अरब जेट्स के बदले लोन की डील में एक रिटायर्ड पाकिस्तानी एयर मार्शल ने रॉयटर्स को बताया कि इस्लामिक रिपब्लिक रक्षा उपकरण एक्सपोर्ट करने के लिए सऊदी अरब सहित छह देशों के साथ बातचीत कर रहा है. रियाद के साथ जेट-फॉर-लोन डील महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसने न केवल 2018 में इस्लामाबाद के लिए 6 बिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी, बल्कि पाकिस्तान द्वारा समय पर भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन जुटाने में विफल रहने के कारण पुनर्भुगतान को भी टाल दिया था. जबकि इंडिया टुडे ने रॉयटर्स सूत्र के हवाले से बताया है, "कुल डील 4 बिलियन डॉलर की थी, जिसमें लोन बदलने के अलावा उपकरणों पर अतिरिक्त 2 बिलियन डॉलर खर्च किए जाने थे."

यहां इस बात का जिक्र कर दें कि पाकिस्तान सिर्फ JF-17 को असेंबल करता है. जबकि मुख्य कंपोनेंट आयात करता है. बुधवार को एक समाचार रिपोर्ट में कहा गया कि शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार IMF को 2026-27 के बजट के लिए प्रमुख मैक्रोइकोनॉमिक और वित्तीय मानदंडों में छूट देने के लिए मनाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है.

यह सच है कि JF-17 और J-10 जैसे पाकिस्तानी फाइटर जेट को अजरबैजान और लीबिया जैसे कुछ देशों में खरीदार मिले हैं. बांग्लादेश से भी बातचीत चल रही है. विश्लेषक आयशा सिद्दीका ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी पर जोर दिया. JF-17 के एयरफ्रेम का सिर्फ 58% हिस्सा असल में पाकिस्तान में बनता है. इसका रेवेन्यू चीन के साथ शेयर किया जाता है, जो इस प्लेटफॉर्म का मुख्य डिजाइनर और मैन्युफैक्चरर है. पाकिस्तान सिर्फ कुछ ही कंपोनेंट बनाता है. एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई भी कथित तौर पर दोनों पार्टनर के बीच बांटी जाती है.

JF-17 थंडर IMF के कर्ज से नहीं बचा सकता

ख्वाजा आसिफ ने अपने रक्षा मंत्री के दावे पर पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषक और लेखिका आयशा सिद्दीकी ने कहा, "वह बहुत सारे पत्रकारों की तरह लग रहे हैं जो रक्षा क्षेत्र को कवर करने का दावा करते हैं. वे बस एक विमान और एक पनडुब्बी के पिछले हिस्से और अगले हिस्से में फर्क नहीं बता सकते. JF-17 थंडर एयरफ्रेम में पाकिस्तान की लगभग 35% हिस्सेदारी है. इससे इतना पैसा नहीं बचता कि पाकिस्तान को IMF से बचाया जा सके."

रूसी क्लिमोव RD-33 सीरीज का वेरिएंट

JF-17 थंडर फाइटर जेट में पाकिस्तान के अलावा रूस, चीन, इटली, तुर्की और UK जैसे कई देशों के कंपोनेंट हैं. पाकिस्तान के JF-17 थंडर जेट रूसी-निर्मित क्लिमोव RD-93 टर्बोफैन इंजन पर चलते हैं, जो RD-33 सीरीज का एक वेरिएंट है. अगर एक JF-17 $15 मिलियन में और एक J-10 $40 मिलियन में बेचा जाता है, तो उसमें से असल में पाकिस्तान को कितना मिलेगा? क्या यह जनवरी 2026 की शुरुआत तक लगभग $300 बिलियन के कर्ज और देनदारियों को चुकाने के लिए काफी होगा?

ख्वाजा आसिफ का दावा 'दिवास्वप्न'

 पाक के राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक ख्वाजा आसिफ का यह दावा कि जेट्स गरम केक की तरह बिक रहे हैं, एक आर्थिक सच्चाई के बजाय एक दिवास्वप्न जैसा लगता है. खासकर तब जब पाकिस्तान को अपनी नेशनल एयरलाइंस एक प्राइवेट कंपनी को बेचनी पड़ी.

पाकिस्तानी अर्थशास्त्री भी कहते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है. कुल सार्वजनिक कर्ज और देनदारियां PKR 81 ट्रिलियन या लगभग $280–300 बिलियन के बीच हैं. पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के 2025 के बयान के अनुसार इसका बाहरी कर्ज लगभग PKR 26 ट्रिलियन है. ऐसी आर्थिक स्थिति के बीच, ख्वाजा आसिफ का यह दावा कि पाकिस्तान छह महीनों में IMF के कर्ज के बिना काम चला सकता है, सिर्फ दिवास्वप्न लगता है.

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