सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप के टैरिफ का क्या होगा? क्या 1974 का ट्रेड एक्ट बचाएगा ‘ट्रेड वॉर’?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को गैर-कानूनी बताया. अब ट्रंप 1974 के ट्रेड एक्ट के जरिए 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की तैयारी में हैं.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ पर फैसला वहां की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा मोड़ है. यूएस की शीर्ष अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा IEEPA 1977 के तहत लगाए गए टैरिफ को गैर-कानूनी करार देते हुए साफ कर दिया कि राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों के नाम पर असीमित व्यापारिक टैक्स नहीं लगा सकते. लेकिन क्या इससे ट्रंप का ‘ट्रेड वॉर’ खत्म हो जाएगा? बिल्कुल नहीं. द गार्जियन के मुताबिक ट्रंप अब 1974 के ट्रेड एक्ट का सहारा लेकर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की तैयारी में हैं. ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह कानून उनके लिए कानूनी ढाल साबित होगा या फिर नया विवाद खड़ा करेगा? यही इस फैसले की असली कहानी है.
कोर्ट के फैसले में क्या कहा गया?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने IEEPA 1977 के तहत अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है. यह गैर कानूनी है. कोर्ट के अनुसार टैरिफ लगाने से पहले कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है. अभी तक किसी प्रेसिडेंट ने ऐसा नहीं किया. प्रेसिडेंट से कांग्रेस से मंजूरी लिए बगैर टैरिफ लगा दिया. टैरिफ की घोषणा उन्होंने पिछले अप्रैल में 'लिबरेशन डे' पर की थी. अलग-अलग रेट पर तय किए गए टैरिफ में युद्ध से जूझ रहे सीरिया और गरीब लेसोथो से लेकर यूके, चीन, कनाडा, मैक्सिको, जापान और ईयू देशों तक दर्जनों देश तक शामिल हैं.
IEEPA 1977 क्यों नहीं देता टैरिफ का अधिकार?
IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) राष्ट्रीय आपात स्थितियों से निपटने के लिए बनाया गया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून आर्थिक प्रतिबंधों की अनुमति देता है, लेकिन व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता. निचली अदालतों ने भी पहले इसी निष्कर्ष पर मुहर लगाई थी.
क्या ट्रंप टैरिफ वापस लेंगे?
नहीं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया कि ट्रेड वॉर जारी रहेगा. उन्होंने कहा, “हमारे पास दूसरे तरीके हैं, बहुत सारे दूसरे तरीके हैं.”
1974 का ट्रेड एक्ट: नया हथियार?
ट्रंप प्रशासन अब 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 का सहारा ले रहा है. ट्रेड का सेक्शन 122 प्रेसिडेंट को 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, लेकिन यह अधिकतम 150 दिन की सीमा तक का ही हो सकता है. यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार “इंटरनेशनल पेमेंट समस्याओं” के समाधान का आधार 2026 में टैरिफ रेवेन्यू लगभग पहले जैसा रह सकता है.
क्या 1974 का ट्रेड एक्ट ट्रंप की मुश्किलें कम करेगा?
कानून टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, लेकिन इसमें में जांच और सुनवाई जरूरी है. टैक्स कब तक प्रभावी रह सकता है, इसके लिए समय सीमा निर्धारित है.
कांग्रेस की निगरानी क्यों बढ़ी?
नेशनल सिक्योरिटी के आधार पर सेक्शन 232 जैसे प्रावधानों का भी इस्तेमाल संभव है, लेकिन यह प्रक्रिया लंबी और जटिल है.
मौजूदा ट्रेड डील्स पर क्या असर?
ट्रंप ने संकेत दिया कि कुछ डील्स कायम रहेंगी, कुछ को नए टैरिफ से बदला जाएगा. अगले सप्ताह उनका स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण नीति की दिशा साफ कर सकता है. ब्रिटेन के मेक यूके के इंटरनेशनल बिजनेस डायरेक्टर रिचर्ड रम्बेलो ने स्पष्ट गाइडेंस की मांग की है.
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या भारत सहित दूसरे देशों के साथ मौजूदा ट्रेड डील पर असर पड़ेगा, तो उन्होंने ने कहा, “उनमें से कई कायम हैं. कुछ नहीं रहेंगी और उन्हें दूसरे टैरिफ से बदल दिया जाएगा.” अगले हफते ट्रंप का सालाना स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण उनके अगले कदमों के बारे में और बता सकता है.
क्या टैरिफ रिफंड होंगे?
अनुमान है कि पिछले साल टैरिफ रेवेन्यू $240–300 बिलियन के बीच था. स्टडीज बताती हैं कि 90% बोझ अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं ने उठाया. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने रिफंड प्रक्रिया को “गड़बड़” बताया ट्रंप ने साफ कहा - “रिफंड पर कोई चर्चा नहीं.” बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट के फैसले का व्यापक असर होगा. सप्लाई चेन में अनिश्चितता बनी रहेगी. जबकि कंपनियां लॉन्ग-टर्म प्लान का इंतजार कर रहीं हैं.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA के रास्ते को बंद किया है, लेकिन 1974 का ट्रेड एक्ट ट्रंप को सीमित लेकिन वैकल्पिक शक्ति देता है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रंप के टैरिफ एजेंडा को झटका जरूर दिया है, लेकिन पूरी तरह रोका नहीं है. 1974 का ट्रेड एक्ट अस्थायी राहत दे सकता है, मगर कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बरकरार रहेंगी. क्या कांग्रेस और कोर्ट के बीच यह शक्ति संघर्ष 2026 की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा?