क्या ईरानी मिसाइलों से डर रहे हैं ट्रंप, इतनी बड़ी सैन्य तैनाती के बाद भी बार-बार बातचीत की क्यों कर रहे वकालत?
मंगलवार को अपने स्पीच में ईरान की बढ़ती मिसाइल और न्यूक्लियर क्षमता पर डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख दिखाया है. साथ ही बातचीत की वकालत भी की की है. सैन्य ताकत के बावजूद अमेरिका सीधे युद्ध से बचते हुए रणनीतिक दबाव की नीति अपना रहा है.
ईरान के मसले पर अमेरिका का रुख डर नहीं, बल्कि सावधानी और रणनीति के तहत कार्रवाई करने की है. ऐसा इसलिए कि ईरान की मिसाइल क्षमता ऐसी है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों को नुकसान पहुंचा सकता है. ट्रंप बार-बार यह कह रहे है कि ताकत दिखाने की धमकी तो दे रहे हैं, लेकिन वह युद्ध से बच भी रहे हैं. प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार रात अपने स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में ईरान को लेकर दिया गया बयान उसी रणनीति का हिस्सा है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि तेहरान एडवांस मिसाइलों को बनाने पर काम कर रहा है, जो आखिरकार यूनाइटेड स्टेट्स तक पहुंच सकती हैं.
ईरानी नेशनल (iranintl.com) न्यूज वेबसाइट के मुताबिक प्रेसिडेंट ने SOTU भाषण के दौरान कहा, "उन्होंने पहले ही ऐसी मिसाइल बना ली हैं जो यूरोप और विदेशों में हमारे बेस के लिए खतरा बन सकती हैं. वे ऐसी मिसाइल बनाने पर काम कर रहे हैं, जो जल्द ही यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका तक पहुंच जाएंगी."
क्या सच में ईरानी मिसाइलों से डर रहे हैं Donald Trump?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ईरान फिर से खतरनाक न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर रहा है. US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान ईरान को उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर नई चेतावनी दी और कहा कि US की पिछली कार्रवाई के बावजूद तेहरान न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना जारी रखे हुए है.
SOTU भाषण में ईरान को लेकर ट्रंप ने क्या खुलासा किया?
ट्रंप ने यह बयान ईरान के विवादित न्यूक्लियर प्रोग्राम और देश के बढ़ते मिसाइल हथियारों के जखीरे पर चिंताओं को लेकर जिनेवा में तेहरान और वाशिंगटन के बीच होने वाली बातचीत से पहले आई है?. उन्होंने कहा कि ईरान चेतावनी दी गई थी कि वे भविष्य में अपने हथियार प्रोग्राम, खासकर न्यूक्लियर हथियारों को फिर से बनाने की कोई कोशिश न करें. फिर भी वे इसे फिर से शुरू कर रहे हैं, और इस समय फिर से, अपने खतरनाक इरादों को पूरा कर रहे हैं."
वाशिंगटन की पुरानी बात को दोहराते हुए, ट्रंप ने वादा किया कि इस्लामिक रिपब्लिक को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. यह एक ऐसा पल था, जिस पर चैंबर में दोनों पार्टियों की साफ प्रतिक्रिया हुई और जब उन्होंने अपनी पॉलिसी दोहराई तो दोनों पार्टियों के सांसद खड़े हो गए.
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि तेहरान के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन चेतावनी दी कि अगर जरूरी हुआ तो अमेरिका कार्रवाई करने के लिए तैयार है.
जिनेवा वार्ता से पहले अमेरिका का सख्त संदेश क्या?
उन्होंने ये भी कहा कि पिछले कुठ समय अमेरिकी सेना ईरान के पास एक बड़े अमेरिकी नेवल बिल्डअप कर रही है. ईरान से लगते क्षेत्र में अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियर और कई वॉरशिप तैनात हैं. सेना की तैनाती का स्केल पिछले बड़े अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन के बराबर है, जिसमें एडवांस वॉरप्लेन और स्ट्राइक कैपेबिलिटी मौजूद हैं. उन्होंने कहा, “हम उनसे बातचीत कर रहे हैं. वे एक डील करना चाहते हैं, लेकिन हमने ये सीक्रेट शब्द नहीं सुने हैं ‘हमारे पास कभी न्यूक्लियर वेपन नहीं होगा.’
ईरान पर 32,000 लोगों की हत्या का आरोप कितना गंभीर?
ट्रंप ने अपने स्पीच में ईरान की सरकार पर आरोप लगाया कि सत्ता विरोधी प्रदर्शन के दौरान 32 हजार लोगों की हत्या की है, जिसे उन्होंने नरसंहार करार दिया. इन लोगों ने ईरानी अधिकारियों ने “यातो गोली मार दी या फिर उन्हें फांसी पर लटका दिया.”
ट्रंप ने कहा, “47 साल पहले जब से उन्होंने देश पर कब्जा किया, तब से दशकों से, सरकार और उसके हत्यारे लोगों ने आतंकवाद, मौत और नफरत के अलावा कुछ नहीं फैलाया है.”
कासिम सुलेमानी का जिक्र क्यों किया?
ट्रंप ने 2020 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हत्या का भी जिक्र किया. “हमने सुलेमानी को मार गिराया. मैंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ऐसा किया था. इसका बहुत बड़ा असर हुआ था. वह सड़क किनारे बम के जनक थे.”
पिछले साल के US ऑपरेशन, जिसे ऑपरेशन मिडनाइट हैमर कहा गया, जिसमें ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया गया था, का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान को अपने हथियार प्रोग्राम को फिर से बनाने के खिलाफ चेतावनी दी थी. इसके बावजूद उन्होंने न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम जारी रखा. इस समय फिर से अपने खतरनाक न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में जुटा है." ईरान ऐसी मिसाइल बना रहा है जो जल्द ही US तक पहुंच सकती हैं.
क्या ईरान की मिसाइलें US और उसके सहयोगियों के लिए खतरा है?
ईरान ने अमेरिका की एयर पावर की बराबरी करने के बजाय बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों में भारी इन्वेस्ट किया है. ये मिसाइलें मिडिल ईस्ट में U.S. बेस पर हमला कर सकती हैं. इजराइल, सऊदी अरब, UAE जैसे साथियों को टारगेट कर सकती हैं. फारस की खाड़ी में तेल शिपिंग में रुकावट डाल सकती हैं. एक छोटा हमला भी एक बड़े इलाके में लड़ाई शुरू कर सकता है. यही वजह है कि ट्रंप फूंक फूंककर कदम आगे बढ़ा रहे हैं. मिसाइल के अलावा अमेरिका को ईरानी प्रॉक्सी (हिज़्बुल्लाह, इराक में मिलिशिया, हूती) के खतरे की भी आशंका है.