America ने यदि कर दिया हमला तो क्या टिक पाएगा Iran? FAQ से समझे असल में क्या है जमीनी हकीकत
मध्य पूर्व में अमेरिकी हमले की आशंका के बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई के मकसद से कई स्तरों पर तैयारी कर रखी है. आसान भाषा में 10 बड़े पॉइंट समझिए ईरान की तैयारियां.
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की आशंका एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन चुकी है. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि युद्ध होगा या नहीं, बल्कि यह है कि अगर हालात बिगड़े तो ईरान किस रणनीति से जवाब देगा? पारंपरिक और मॉडर्न वारफयेर के मामले में अमेरिका भले ही ताकतवर हो, लेकिन ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में 'असिमेट्रिक वॉरफेयर' यानी अलग तरह की युद्ध रणनीति तैयार की है, जो सीधे टकराव के बजाय बहुस्तरीय दबाव बनाने पर आधारित है.
मिसाइल ताकत से लेकर साइबर हमलों तक, प्रॉक्सी नेटवर्क से लेकर समुद्री नियंत्रण तक ईरान ने खुद को इस तरह तैयार किया है कि वह सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े दुश्मन को चुनौती दे सके. खास बात यह है कि उसकी रणनीति सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक, कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव का भी मिश्रण है. यही वजह है कि किसी भी संभावित संघर्ष का असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया (खासतौर पर तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और सुरक्षा संतुलन) प्रभावित हो सकता है.
ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर ईरान की वे कौन-सी 10 बड़ी तैयारियां हैं, जिनके दम पर वह अमेरिका जैसे महाशक्ति के सामने खड़ा होने का दावा करता है.
ईरान की 10 बड़ी तैयारी : इन रणनीतियों से अमेरिका को देगा जवाब?
1. सवाल : बैलिस्टिक मिसाइल कितनी खतरनाक?
जवाब : ईरान के पास मीडियम और लॉन्ग रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है, जो हजारों किलोमीटर दूर तक निशाना साध सकती हैं. ईरान के पास 1000 से 2000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली 3000 से ज्यादा मिसाइल हैं. ये मिसाइलें सटीकता और गति के कारण अमेरिकी एयरबेस, सैन्य ठिकानों और शहरों को टारगेट कर सकती हैं. ईरान इन्हें डिटरेंस यानी डर पैदा करने के हथियार के रूप में देखता है. ताकि सीधे युद्ध की स्थिति में अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाया जा सके.
2. सवाल : एयर डिफेंस सिस्टम कितना मजबूत?
जवाब : ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को लगातार अपग्रेड किया है, जिसमें रडार, मिसाइल इंटरसेप्टर और स्वदेशी तकनीक शामिल हैं. यह सिस्टम दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने के लिए बनाया गया है. हालांकि, यह अमेरिका जितना एडवांस नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर यह काफी प्रभावी माना जाता है और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को सुरक्षा प्रदान करता है.
3. सवाल : प्रॉक्सी नेटवर्क कैसे करता है काम?
जवाब: ईरान सीधे युद्ध के बजाय प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, जिसमें विभिन्न मिलिटेंट और राजनीतिक समूह शामिल होते हैं. ये समूह मध्य पूर्व के अलग-अलग देशों में सक्रिय रहते हैं और ईरान के हितों को आगे बढ़ाते हैं. इससे ईरान बिना सीधे टकराव के अपने विरोधियों को चुनौती देता है और क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखता है. यह रणनीति कम लागत में ज्यादा प्रभाव पैदा करने का तरीका है.
4. सवाल : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कंट्रोल क्यों अहम?
जवाब : स्ट्रेट आफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है. यहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ईरान इस क्षेत्र पर निगरानी रखता है और तनाव की स्थिति में इसे बाधित कर सकता है. ऐसा होने पर वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे अमेरिका और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है.
5. सवाल : स्वार्म बोट्स रणनीति क्या है?
जवाब : ईरान की नौसेना छोटी, तेज और हथियारों से लैस नावों यानी “स्वार्म बोट्स” का इस्तेमाल करती है. ये एक साथ झुंड में हमला करती हैं और बड़े युद्धपोतों को घेर लेती हैं. इनकी संख्या और गति दुश्मन के लिए चुनौती बनती है. यह रणनीति खासकर संकरे समुद्री क्षेत्रों में प्रभावी होती है, जहां बड़ी नौसेना को रोकना आसान हो जाता है.
6. सवाल : साइबर वॉरफेयर में क्षमता कितनी?
जवाब : ईरान साइबर वॉरफेयर में भी तेजी से आगे बढ़ा है. वह दुश्मन देशों के बैंकिंग सिस्टम, पावर ग्रिड, सरकारी नेटवर्क और सैन्य डेटा को निशाना बना सकता है. साइबर हमलों के जरिए बिना युद्ध के भी बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सकता है. यह “लो-कॉस्ट हाई-इम्पैक्ट” रणनीति है, जिससे दुश्मन की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को कमजोर किया जा सकता है.
7. सवाल : अंडरग्राउंड ठिकाने कितने सुरक्षित?
जवाब : ईरान ने अपने कई सैन्य ठिकानों को जमीन के नीचे बनाया है, जहां मिसाइल, हथियार और कमांड सेंटर सुरक्षित रखे जाते हैं. हाल ही में अमेरिका ने इसको लेकर एक सैटेलाइट फोटो भी जारी किया था. ये ठिकाने हवाई हमलों से बचने के लिए डिजाइन किए गए हैं और इन्हें नष्ट करना बेहद मुश्किल होता है. इससे ईरान युद्ध के दौरान भी अपनी सैन्य क्षमता बनाए रख सकता है और अचानक जवाबी हमला कर सकता है.
8. सवाल : न्यूक्लियर प्रोग्राम कितना बड़ा फैक्टर?
जवाब : ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम लंबे समय से वैश्विक चिंता का विषय रहा है. वह इसे ऊर्जा और रिसर्च के लिए बताता है, लेकिन कई देश इसके सैन्य उपयोग की आशंका जताते हैं. परमाणु क्षमता मिलने पर ईरान की रणनीतिक ताकत कई गुना बढ़ सकती है, जिससे वह बड़े देशों के खिलाफ मजबूत डिटरेंस तैयार कर सकता है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों पर पूरी तरह से रोक लगा दे.
9. सवाल : IRGC की भूमिका क्या?
जवाब : इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प (IRGC), ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाइयों में से एक है. यह केवल देश की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति और प्रॉक्सी नेटवर्क को भी संचालित करता है. इसके पास मिसाइल, नौसेना और साइबर यूनिट्स हैं, जो इसे एक बहुआयामी शक्ति बनाते हैं और ईरान की विदेश नीति में अहम भूमिका निभाते हैं.
10. सवाल : क्षेत्रीय रणनीति कैसे बनती है?
जवाब : ईरान की क्षेत्रीय रणनीति का उद्देश्य मध्य पूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाना है. वह सहयोगी देशों, प्रॉक्सी समूहों जैसे हूती, हमास व अन्य और कूटनीति के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करता है. इसका मकसद है दुश्मनों को घेरना, अपने हितों की रक्षा करना और रणनीतिक संतुलन बनाए रखना. यह रणनीति उसे अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों के सामने टिके रहने में मदद करती है.




