पूर्व-पश्चिम से लेकर दक्षिण तक, देश के वो अनोखे मंदिर जहां पुरुष नहीं महिलाएं हैं पुजारन
देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई अनोखे मंदिर हैं, जहां पारंपरिक नियमों से अलग महिलाएं ही पुजारी की भूमिका निभा रही हैं. उत्तराखंड से लेकर तमिलनाडु तक ऐसे कई मंदिर हैं, जहां पुजारन पूजा करती हैं.
भारत में मंदिरों और पूजा-पाठ की परंपरा सदियों पुरानी है, जहां आमतौर पर पुरुष ही पुजारी होते हैं. लेकिन भारत में ऐसे भी मंदिर है, जहां पुरुष नहीं महिलाएं पुजारन हैं. ये मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव की मिसाल भी बन चुके हैं. यहां महिलाएं पूजा-अर्चना से लेकर पूरे मंदिर प्रबंधन तक की जिम्मेदारी संभालती हैं.
इन अनोखे मंदिरों की खासियत यह है कि वे सदियों पुरानी परंपराओं को एक नई दिशा दे रहे हैं. जहां पहले धार्मिक कार्यों में पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था, वहीं अब ये मंदिर यह साबित कर रहे हैं कि भक्ति और आध्यात्मिकता में महिलाओं की भूमिका भी उतनी ही मजबूत और महत्वपूर्ण है.
मां लिंग भैरवी मंदिर
तमिलनाडु के कोइंबटूर में स्थित यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां केवल महिलाएं ही पुजारी होती हैं और वे ही सभी धार्मिक अनुष्ठान करती हैं. इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां महिलाओं को आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है. हर पूजा विधि को महिलाएं पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाती हैं, जिससे यह मंदिर महिला नेतृत्व का मजबूत उदाहरण बनता है.
ये भी पढ़ें :कन्याकुमारी से लेकर असम तक, भारत के इन मंदिरों में नहीं कर सकते पुरुष दर्शन, जानें कारण
श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर
महाराष्ट्र के पंढरपुर में स्थित यह लगभग 900 साल पुराना मंदिर है. यहां महिलाओं को पुजारी के रूप में पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया गया है.
योगेश्वर श्री कृष्ण मंदिर
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित यह मंदिर भी अपनी अलग पहचान रखता है. यहां एक महिला मुख्य पुजारी हैं, जिनके साथ एक अन्य महिला सहयोगी के रूप में काम करती हैं. इस मंदिर की खास बात यह है कि पारंपरिक सोच के बावजूद यहां महिलाओं को पूजा-पाठ की पूरी जिम्मेदारी दी गई है. यह न केवल धार्मिक बदलाव का संकेत है, बल्कि समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है.
मां पंचुबराही मंदिर
ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में माँ पंचुबराही मंदिर है, जो करीब 500 साल पुराना है. मां पंचुबराही का मंदिर सतभाया की शक्तिशाली समुद्र देवी को समर्पित है. यहां, 'जारा सबर' समुदाय की आदिवासी महिलाएं पीढ़ियों से पुजारिन बनती हैं.




