भारत और इजराइल के बीच क्‍या है Hexagon Alliance जिससे पाक और चीन के उड़े तोते?

पश्चिम एशिया में नई रणनीतिक जंग की आहट सुनाई दे रही है. इजरायल के 'हेक्सागन अलायंस' प्रस्ताव ने पाकिस्तान और चीन की बेचैनी बढ़ा दी है. अगर यह सुरक्षा गठबंधन आकार लेता है तो यह तय है कि पाकिस्तान और चीन भारत के खिलाफ कोई भी हरकत करने से पहले 10 बार सोचेंगे.

Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 25 Feb 2026 1:54 PM IST

Israel Hexagon Alliance: पश्चिम एशिया में बड़ा खेल शुरू होने की सुगबुगाहट तेज़ हो गई है. इजरायल के प्रस्तावित 'हेक्सागन अलायंस' ने चीन और पाकिस्तान धड़कनें तेज कर दी हैं. अगर यह सुरक्षा गठबंधन आकार लेता है, तो आतंकवाद, पावर बैलेंस और रणनीतिक समीकरणों की पूरी तस्वीर बदल सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के दौरे पर रवाना हो गए हैं और इजराइल ने भारत को 'हेक्सागन अलायंस' में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है.

नेतन्याहू ने इसे 'हेक्सागन ऑफ अलायंस' यानी छह देशों का गठबंधन बताया है. नेतन्याहू का कहना कहना है कि अलायंस यह उन देशों का ग्रुप होगा जिनकी सुरक्षा चिंताएं और रणनीतिक हित एक जैसे हैं. एक तरफ जहां इजराइल ईरान, हिजबुल्लाह और हमास जैसे आतंकी संगठनों से परेशान हैं. वैसी ही भारत पाकिस्तान में फलफूल रहे आतंकवाद से परेशान है. ऐसे में इजराइल का यह प्रस्ताव भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है. भारत के साथ इसमें ग्रीस और साइप्रस का नाम भी लिया गया है. इसके अलावा कुछ अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों को भी इसमें शामिल किए जाने की बात कही गई है, हालांकि उनके नाम अभी सामने नहीं आए हैं.

इजराइल क्यों ले रहा है ये फैसला?

यह घोषणा 22 फरवरी को इजरायल के विदेश कार्यालय की ओर से की गई. यह ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है. इजरायल और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है. वहीं पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते को औपचारिक रूप दिया है. कुछ जानकारों ने इस व्यवस्था की तुलना 'इस्लामिक नाटो' से की है, तुर्की ने भी इस समझौते में संभावित रुचि के संकेत दिए हैं.

प्रधानमंत्री मोदी नरेंद्र मोदी आज इजराइल के दौरे पर रवाना हो गए हैं. यह उनकी दूसरी इजराइल की यात्रा है. भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. एक कैबिनेट बैठक के दौरान नेतन्याहू ने इस नए गठबंधन की रूपरेखा पर अपनी सोच रखी. उन्होंने कहा कि यह मिडिल ईस्ट, भूमध्यसागर क्षेत्र, अफ्रीका और एशिया के उन देशों को साथ लाएगा जो इलाकाई खतरों को लेकर एक जैसी सोच रखते हैं.

क्या है हेक्सागन अलायंस?

  • नेतन्याहू ने इस प्रस्तावित अलायंस को दो अनस्टेबल करने वाली ताकतों के खिलाफ एक जवाब बताया. उन्होंने एक 'कट्टर शिया एक्सिस' का जिक्र किया, जिसका इशारा मुख्य रूप से ईरान और उसके सहयोगी समूहों जैसे हमास, हिज्बुल्लाह और हूती विद्रोहियों की ओर था.
  • इसके अलावा उन्होंने एक उभरती 'कट्टर सुन्नी एक्सिस' की भी बात कही, जिसे उन्होंने इलाके में सक्रिय चरमपंथी संगठनों से जोड़ा.
  • इजराइल का यह प्रस्ताव ज्यादा औपचारिक और सुरक्षा केंद्रित ढांचे की ओर इशारा करता है.
  • इस हेक्सागन ढांचे का मकसद रक्षा समन्वय, खुफिया जानकारी साझा करने और रणनीतिक मजबूती को बढ़ाना बताया गया है.
  • नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से इस विचार को सामने रखकर और साझेदारों व विरोधी ताकतों का नाम लेकर इसे एक खुली रणनीतिक नीति का रूप दिया है.
  • इस प्रस्ताव में भारत को एक अहम भूमिका में रखा गया है, जो क्षेत्र में बदलते संतुलन में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में देखा जा रहा है.

पाकिस्तान और चीन के क्यों उड़े तोते?

  • इस प्रस्तावित समझौते पर पाकिस्तान और चीन की सीधी नजर मानी जा रही है. भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को लेकर चिंता जताता रहा है और कई मौकों पर पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाता आया है. भारत का कहना रहा है कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता है और पाकिस्तान सरकार ऐसे लोगों को पूरा समर्थन देती है.
  • जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों को लेकर भी भारत पहले आरोप लगाता रहा है कि उन्हें पाकिस्तान में संरक्षण मिलता है. भारत का दावा है कि पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क से जुड़े आतंकी भारत में घुसपैठ कर हमले करते हैं. कुछ महीने पहले हुआ पहलगाम हमला और 2019 में हुआ पुलवामा अटैक इसका उदाहरण हैं.
  • ऐसे परिदृश्य में अगर 'हेक्सागन अलायंस' जैसा सुरक्षा-केंद्रित ढांचा आकार लेता है, तो यह आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने का मंच बन सकता है. रक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और रणनीतिक तालमेल के जरिए ऐसे किसी भी पाक के नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया जा सकता है.
  • वहीं, चीन ने हाल के सालों में पश्चिम एशिया में आर्थिक, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, एक संगठित सुरक्षा ढांचा बनने पर इलाकाई समीकरण बदल सकते हैं, जिससे चीन को नुकसान झेलना पड़ सकता है.
  • अगर भारत इस ढांचे में अहम भूमिका निभाता है, तो एशिया-पश्चिम एशिया के बीच उसकी रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी. यह इसलिए अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से सीमा को लेकर अकसर विवाद होता है. इसका उदाहरण 2020 में गलवान में हुई झड़प है. एक अलायंस से भारत को कहीं न कहीं एक मज़बूत पॉज़ीशन मिलेगी.

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