क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस'? ट्रंप ने शामिल होने के लिए भारत को भेजा न्योता, पाकिस्तान को भी किया इनवाइट; जानें इसके बारे में सब कुछ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, शासन व्यवस्था और शांति स्थापना के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संस्था 'बोर्ड ऑफ पीस' में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया है. यह पहल ट्रंप के 20-सूत्रीय गाज़ा सीज़फायर प्लान के दूसरे चरण का अहम हिस्सा है. इस बोर्ड में कई वैश्विक नेताओं और देशों को भी आमंत्रित किया गया है. प्रस्तावित बोर्ड गाज़ा में प्रशासनिक क्षमता निर्माण, निवेश, पुनर्निर्माण और आर्थिक स्थिरता की निगरानी करेगा. भारत को मिला यह न्योता पश्चिम एशिया में उसकी बढ़ती कूटनीतिक भूमिका और वैश्विक भरोसे को दर्शाता है.;

( Image Source:  ANI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 18 Jan 2026 11:59 PM IST

What is the 'Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा में युद्ध के बाद की व्यवस्था, पुनर्निर्माण और शासन व्यवस्था को संभालने के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संस्था 'बोर्ड ऑफ पीस' में भारत को शामिल होने का न्योता दिया है. इस पहल को ट्रंप के गाज़ा सीज़फायर प्लान के दूसरे चरण का अहम हिस्सा माना जा रहा है. मामले से परिचित सूत्रों ने रविवार को इसकी पुष्टि की.

सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ-साथ कई अन्य वैश्विक नेताओं और देशों को भी इस बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है. यह बोर्ड गाज़ा में गवर्नेंस कैपेसिटी बिल्डिंग, पुनर्निर्माण, निवेश और पूंजी जुटाने जैसे अहम कार्यों की निगरानी करेगा.

पाकिस्तान को भी मिला न्योता

भारत को निमंत्रण मिलने से कुछ घंटे पहले पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को भी ट्रंप की ओर से 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का आमंत्रण मिला है. पाकिस्तान ने कहा है कि वह गाज़ा में शांति और स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करता रहेगा.

किन देशों और नेताओं को बुलावा?

सूत्रों के अनुसार, इस बोर्ड में शामिल होने के लिए जिन प्रमुख वैश्विक नेताओं और देशों को आमंत्रित किया गया है, उनमें तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के शीर्ष नेता शामिल हैं.

क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस'?

व्हाइट हाउस की जानकारी के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था के तौर पर गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे. इसका उद्देश्य गाज़ा में युद्ध के बाद स्थायी शांति, कानूनी और भरोसेमंद शासन व्यवस्था तथा आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना है.

ट्रंप ने इस पहल को अपने 20-सूत्रीय 'कॉम्प्रिहेंसिव प्लान' का केंद्र बताया है, जिसे उन्होंने पिछले साल सितंबर में पेश किया था. ट्रंप का दावा है कि इस योजना को अरब देशों, इजराइल और यूरोप के कई नेताओं का समर्थन मिल चुका है और नवंबर में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के जरिए इसे औपचारिक समर्थन भी मिला.

सदस्यता की शर्तें भी सख्त

रॉयटर्स और फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन द्वारा करीब 60 देशों को भेजे गए ड्राफ्ट चार्टर में यह शर्त रखी गई है कि यदि कोई देश तीन साल से अधिक समय तक बोर्ड की सदस्यता चाहता है, तो उसे 1 अरब डॉलर का योगदान करना होगा.

बोर्ड में कौन-कौन होंगे शामिल?

अब तक जिन प्रमुख नामों की पुष्टि हुई है, उनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जैरेड कुश्नर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अरबपति निवेशक मार्क रोवन, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारी रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं.

गाज़ा के लिए अलग प्रशासनिक ढांचा

बोर्ड के साथ-साथ दो और संस्थाएं भी बनाई जा रही हैं. नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाज़ा (NCAG), जिसका नेतृत्व फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट डॉ. अली शाथ करेंगे. यह समिति गाज़ा में सार्वजनिक सेवाओं, नागरिक संस्थानों और सामान्य जीवन की बहाली पर काम करेगी. गाज़ा एग्ज़ीक्यूटिव बोर्ड, जिसमें तुर्किये, कतर, मिस्र, इज़राइल, यूएई और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

भारत के लिए क्यों अहम है यह न्योता?

भारत को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता मिलना पश्चिम एशिया में उसकी बढ़ती कूटनीतिक भूमिका और वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद साझेदार के रूप में उसकी छवि को दर्शाता है. यदि भारत इस पहल में शामिल होता है, तो यह गाज़ा संकट के समाधान में उसकी सक्रिय भूमिका की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा.

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