Iran War: अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी अमेरिका को मिला ठेंगा! Trump के मंत्री ने बताया US को कितना महंगा पड़ रहा तेहरान से उलझना

ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में अमेरिका का खर्च तेजी से बढ़ता जा रहा है. व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद अब तक अमेरिका करीब 12 अरब डॉलर खर्च कर चुका है.

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Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 16 March 2026 9:30 AM IST

Israel US Iran War: अमेरिका ने 28 फरवरी को इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से अब तक इस युद्ध पर करीब 12 अरब डॉलर खर्च कर दिए हैं. यह जानकारी अमेरिका के शीर्ष आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने दी है. उन्होंने यह आंकड़ा रविवार को सीबीएस के कार्यक्रम “फेस द नेशन” में बताया और कहा कि उन्हें अब तक इसी खर्च के बारे में जानकारी दी गई है. इसके बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर इस जंग में ट्रंप के हाथ क्या आया? रिजीम चेंज करने का उनका मकसद एकदम फेल रहा.

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू के दौरान हैसेट को बीच में स्पष्टीकरण भी देना पड़ा. शुरुआत में ऐसा लगा कि वह पूरे युद्ध के संभावित कुल खर्च की बात कर रहे हैं, लेकिन बाद में उन्होंने साफ किया कि यह अब तक का खर्च है. कार्यक्रम की एंकर मार्गरेट ब्रेनन ने कहा कि सिर्फ पहले हफ्ते में ही गोला-बारूद पर 5 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुका था. हालांकि हैसेट ने इस बात पर सीधे जवाब नहीं दिया.

क्या बोले हैसेट?

इसके बावजूद हैसेट ने कहा कि इस युद्ध से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा खतरा नहीं है. उनका कहना था कि वित्तीय बाजार भविष्य के ऊर्जा अनुबंधों की कीमतों में पहले से ही यह मानकर चल रहे हैं कि यह संघर्ष जल्दी खत्म हो जाएगा और ऊर्जा की कीमतें भी कम होंगी. यह अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता से अलग स्थिति दिखाता है.

हालांकि बाजारों में अभी भी अस्थिरता बनी हुई है क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चेतावनी दी है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है. हैसेट ने कहा कि अगर खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही में कोई बाधा आती है तो इसका असर अमेरिका से ज्यादा उन देशों पर पड़ेगा जो इस क्षेत्र के तेल पर ज्यादा निर्भर हैं.

उन्होंने कहा कि ईरान की कार्रवाई से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होगा. उनका कहना था कि 1970 के दशक के मुकाबले अब अमेरिका खुद बड़ा तेल उत्पादक देश बन चुका है और उसके पास पर्याप्त तेल है.

मिशन के दायरे को लेकर क्या है चिंता?

इसी बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान पर हमले और तेज होने वाले हैं. इससे संकेत मिलता है कि युद्ध का खर्च आगे और बढ़ सकता है. युद्ध के उद्देश्य को लेकर भी अब अनिश्चितता बढ़ती जा रही है. ट्रंप प्रशासन की ओर से पहले कहा गया था कि इस अभियान का लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है. बाद में कहा गया कि इसका उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करना है. अब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर ईरान के तेल ढांचे को निशाना बनाने की बात भी सामने आ रही है.

प्रशासन के जवाबों को लेकर क्या उठे थे सवाल?

मार्च की शुरुआत में सीनेट में हुई एक गोपनीय ब्रीफिंग के बाद सीनेट में अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने कहा कि उन्हें “मिशन के दायरे के बढ़ने” को लेकर गंभीर चिंता है. उन्होंने बैठक को असंतोषजनक बताया और कहा कि प्रशासन हर दिन हमलों की वजह को लेकर अलग-अलग जवाब दे रहा है.

युद्ध में कितने लोग मारे गए हैं?

पिछले हफ्ते सीनेटर क्रिस वैन होलेन ने अल जजीरा से कहा था कि अमेरिका ने पैंडोरा का बॉक्स खोल दिया है, बिना यह जाने कि इसका नतीजा कहां तक जाएगा. 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद से अब तक ईरान में कम से कम 2 हजार लोगों की मौत हो चुकी है और ज्यादातर मरने वाले ईरानी हैं.

यह संघर्ष अब लेबनान तक फैल चुका है और खाड़ी देशों को भी ईरान की ओर से बार-बार ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच कुछ देश, जैसे भारत, अपने तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए वॉशिंगटन को दरकिनार कर सीधे तेहरान से बातचीत कर रहे हैं, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज सुरक्षित रह सकें.

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