One Child Policy के बाद अब कंडोम पर टैक्स, क्या चीन खुद अपने जाल में फंसा? जानें भारत से आगे निकलने का दांव कैसे बना गले की फांस

चीन ने गिरती जनसंख्या को रोकने के लिए कंडोम और गर्भनिरोधक साधनों पर 13% VAT लगाने का फैसला किया है, जिस पर देशभर में विरोध और बहस छिड़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जन्मदर बढ़ने की बजाय स्वास्थ्य और सामाजिक जोखिम बढ़ सकते हैं. लगातार घटती जन्मसंख्या और बुजुर्ग होती आबादी बीजिंग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. दशकों की सख्त जनसंख्या नीतियों के बाद अब भरोसा बहाल करना सरकार के लिए सबसे कठिन काम बन गया है.;

( Image Source:  Sora_ AI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 1 Jan 2026 8:20 PM IST

China Population Crisis, China Condom Tax: चीन में जनसंख्या में हो रही गिरावट को रोकने के लिए सरकार का एक नया फैसला तीखी बहस और आलोचना का कारण बन गया है. 1 जनवरी से चीन में कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों जैसे कॉन्ट्रासेप्टिव्स पर 13 प्रतिशत वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) लग गया है, जबकि चाइल्डकेयर, शादी से जुड़ी सेवाओं और बुजुर्ग देखभाल को इस टैक्स से छूट दी जाएगी. सरकार का दावा है कि यह कदम जन्मदर बढ़ाने की व्यापक नीति का हिस्सा है.

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यह टैक्स बदलाव उन छूटों को खत्म करता है जो 1994 से लागू थीं, जब चीन सख्ती से एक-संतान नीति का पालन कर रहा था. अब, जब देश लगातार तीसरे साल जनसंख्या में गिरावट दर्ज कर चुका है, सरकार उसी नीति के उलट फैसले लेने को मजबूर दिख रही है.

लगातार घटती जनसंख्या से परेशान बीजिंग

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2024 में चीन में सिर्फ 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो एक दशक पहले के मुकाबले लगभग आधा है. 2019 में जहां जन्म संख्या करीब 1.47 करोड़ थी, वहीं 2024 तक यह गिरकर 95 लाख के आसपास आ गई. 2023 में भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने का दर्जा भी हासिल कर लिया. बुजुर्ग होती आबादी और सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच चीनी सरकार युवाओं पर शादी और बच्चे पैदा करने का दबाव लगातार बढ़ा रही है.

सोशल मीडिया पर मजाक, ज़मीन पर गुस्सा

कंडोम टैक्स की घोषणा के बाद चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ यूजर्स ने कीमतें बढ़ने से पहले कंडोम जमा करने के मज़ाक उड़ाए, तो कई लोगों ने कहा कि गर्भनिरोधक की कीमत बच्चों को पालने के खर्च के सामने कुछ भी नहीं है.

अनचाहे नतीजों का डर

चीनी सरकार की नीति को लेकर गंभीर चिंताएं भी सामने आई हैं. लोगों ने चेतावनी दी कि गर्भनिरोधक महंगे होने से छात्र और आर्थिक रूप से कमजोर लोग जोखिम भरे फैसले ले सकते हैं. उन्होंने इसे इस नीति का 'सबसे खतरनाक पहलू' बताया. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी आशंका जताई है कि गर्भनिरोधक तक पहुंच महंगी होने से अनचाही गर्भावस्था और यौन संचारित रोगों के मामले बढ़ सकते हैं. 2024 में चीन में सिफिलिस के 6.7 लाख से ज्यादा और गोनोरिया के 1 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए.

दुनिया में सबसे ज्यादा गर्भपात चीन में होता है?

चीन लंबे समय से गर्भपात के उच्च आंकड़ों के लिए जाना जाता रहा है. 2014 से 2021 के बीच हर साल 90 से 100 लाख गर्भपात दर्ज किए गए. हालांकि 2022 के बाद सरकार ने गर्भपात से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करना बंद कर दिया.

विशेषज्ञ बोले- असर सीमित रहेगा

डेमोग्राफर और नीति विशेषज्ञ इस बात को लेकर सशंकित हैं कि कंडोम पर टैक्स लगाने से जन्मदर में कोई ठोस बढ़ोतरी होगी. उनका कहना है कि यह मानना कि कंडोम महंगे होने से लोग ज्यादा बच्चे पैदा करेंगे, 'नीति को जरूरत से ज्यादा सोचने' जैसा है. एक्सपर्ट्स ने इसे एक प्रतीकात्मक कदम बताया और चेतावनी दी कि कई प्रोत्साहन योजनाएं कर्ज में डूबी प्रांतीय सरकारों पर निर्भर हैं, जिनके पास इन्हें लागू करने के संसाधन नहीं हैं.

महिलाओं पर पड़ेगा ज्यादा बोझ?

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस टैक्स का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ेगा, क्योंकि चीन में जन्म नियंत्रण की जिम्मेदारी अधिकतर महिलाओं पर ही है. 2022 के एक अध्ययन के मुताबिक केवल 9% जोड़े कंडोम का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 44% IUD और 30% महिला नसबंदी पर निर्भर हैं.  कुछ महिलाओं का कहना है कि यह फैसला सरकार के उस पुराने रवैये की याद दिलाता है, जब एक-संतान नीति के तहत जुर्माने, जबरन गर्भपात और सख्त नियंत्रण लागू किए गए थे. एक महिला ने कहा कि ह महिलाओं के शरीर और उनकी इच्छाओं को नियंत्रित करने की एक और कोशिश है.

माहवारी तक पूछने के आरोप

हाल के महीनों में यह आरोप भी लगे हैं कि कुछ प्रांतों में स्थानीय अधिकारी महिलाओं को फोन कर उनकी माहवारी और गर्भावस्था योजनाओं के बारे में पूछ रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि ऐसे कदम सरकार के प्रति अविश्वास और बढ़ा सकते हैं.

भरोसा टूटने का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि दशकों तक जनसंख्या नियंत्रित करने वाली नीतियों के बाद अब जन्मदर बढ़ाना आसान नहीं होगा. सिर्फ टैक्स बढ़ाने या घटाने से वह भरोसा वापस नहीं आएगा, जिसे सालों की दखलअंदाजी ने कमजोर किया है.

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