बूंद बूंद को तरसेगा अमेरिका! UN रिपोर्ट में खुलासा, ग्रीनलैंड पर ट्रंप की रणनीति से जुड़ी खतरनाक सच्चाई आई सामने
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने अमेरिका में गहराते जल संकट को लेकर चेताया है. ग्रीनलैंड पर ट्रंप की दिलचस्पी के पीछे पानी, चीन और रूस से जुड़ी बड़ी रणनीति सामने आई. अगर अमेरिका ने जल संरक्षण पर ठोस नीति नहीं बनाई, जलवायु परिवर्तन से निपटने के कारगर कदम नहीं उठाए तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया की सबसे बड़ी ताकत भी पानी के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाएगी.;
दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली महाशक्ति अमेरिका आने वाले वर्षों में पीने के पानी के गंभीर संकट से जूझ सकता है. संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय जल, पर्यावरण और स्वास्थ्य संस्थान (UNU-INWEH) द्वारा 20 जनवरी को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार अगर हालात नहीं बदले, तो अमेरिका के कई बड़े इलाके वॉटर स्ट्रेस और ड्रिंकिंग वॉटर शॉर्टेज की चपेट में आ जाएंगे. इसी बीच ग्रीनलैंड को लेकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दिलचस्पी अब एक नई बहस को जन्म दे रही है. सवाल उठ रहा है कि क्या ग्रीनलैंड सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भविष्य का पानी है? इस बात को ध्यान में रखते हुए वो रूस-चीन की आड़ में दुनिया का ध्यान भटका रहे है।.
UN रिपोर्ट ने क्यों बजाया खतरे का अलार्म?
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के दक्षिण पश्चिम के कई राज्यों में ग्राउंड वॉटर लेवल तेजी से गिर रहा है. जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा और हीटवेव बढ़ रही हैं. ग्लेशियर और स्नो रिजर्व सिकुड़ रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार रही, तो अमेरिका को आने वाले दशकों में पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ सकता है.
अमेरिका में कहां सबसे ज्यादा गहराया जल संकट?
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के कैलिफोर्निया, एरिजोना, नेवादा, टेक्सास जैसे राज्यों में वॉटर क्राइसिस इमरजेंसी लेवल तक पहुंच चुका है. खेती, उद्योग और शहरी आबादी तीनों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.यूएन रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण पश्चिम अमेरिका में के कोलोराडो नदी और उसके जलाशयों के सूखने के कारण एक हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है.
ग्रीनलैंड क्यों बन गया अमेरिका की रणनीति का केंद्र?
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और यहां भारी मात्रा में मीठे पानी का भंडार मौजूद है. यहां के ग्लेशियर दुनिया के सबसे बड़े फ्रेश वॉटर रिजर्व माने जाते हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघलने से नए समुद्री और रणनीतिक रास्ते खुल रहे हैं. यही वजह है कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान ग्रीनलैंड को खरीदने तक की बात कही थी.
ट्रंप की गुप्त रणनीति - जमीन नहीं, पानी
यूएन के भूजल विश्लेषकों के मुताबिक ट्रंप की नजर भविष्य के जल संसाधनों पर है. आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक अहमियत और दुर्लभ खनिज और ऊर्जा स्रोत है. ग्रीनलैंड पर पकड़ का मतलब है आने वाले समय में वॉटर सिक्योरिटी पर बढ़त बनाना है.
चीन-रूस फैक्टर ने बढ़ाई अमेरिका की चिंता
ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र में चीनी निवेश और रिसर्च के जरिए मौजूदगी बढ़ा रहा है. रूस पहले से ही सैन्य और रणनीतिक पकड़ मजबूत कर चुका है. ऐसे में अमेरिका को डर है कि पानी, खनिज और नए व्यापारिक रास्तों पर उसकी पकड़ कमजोर न पड़ जाए.
तो क्या आने वाले समय में ‘वॉटर वॉर’ हो सकता है?
कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि 21वीं सदी में तेल नहीं, पानी सबसे बड़ा हथियार बनेगा. दुनिया के बड़े देश जल स्रोतों पर कब्जे के लिए रणनीतिक कदम उठाएंगे. ग्रीनलैंड पर बढ़ती दिलचस्पी इसी आने वाले वॉटर वॉर की आहट मानी जा रही है.
यूएन रिपोर्ट में क्या है?
UNU-INWEH के डायरेक्टर और रिपोर्ट के मुख्य लेखक कावेह मदानी ने एक बयान में कहा, "यह रिपोर्ट एक असहज सच्चाई बताती है. कई क्षेत्र अपनी हाइड्रोलॉजिकल क्षमता से ज़्यादे का लोग दोहन कर रहे हैं. दुनिया के कई जलाशय पहले ही दिवालिया हो चुकी हैं."
उन्होंने कहा कि 2022 और 2023 के बीच, 1.8 मिलियन लोग सूखे की स्थिति में रह रहे थे. रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की बड़ी झीलों में से 50% ने 1990 के दशक की शुरुआत से पानी खो दिया है. वैश्विक घरेलू पानी का 50% अब भूजल से प्राप्त होता है और 40% सिंचाई का पानी उन जलभृतों से लिया जाता है जो लगातार खाली हो रहे हैं. दुनिया के प्रमुख जलभृतों में से 70% में लंबी अवधि की गिरावट देखी जा रही है.
मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, दक्षिण एशिया में खतरा
रिपोर्ट के अनुसार उच्च जल दोहन, क्लाइमेट चेंज, ग्लोबल वार्मिंग, कम कृषि उत्पादकता, ऊर्जा की कमी, रेत और धूल के तूफान और जटिल राजनीतिक अर्थव्यवस्थाओं के कारण मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका पानी की कमी वाले "हॉट स्पॉट" में से हैं. दक्षिण एशिया भी भूजल-निर्भर कृषि और शहरीकरण के कारण चिंता वाले क्षेत्रों में से है, जिससे जल स्तर में लगातार गिरावट हुआ है.