संत समागम: धीरेंद्र शास्त्री ने स्वामी चिदानंद को दिया कन्या विवाह का आमंत्रण, ऋषिकेश को बताया विश्व आध्यात्म का केंद्र
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने गुरुवार को परमार्थ निकेतन पहुंचकर स्वामी चिदानंद सरस्वती से भेंट की. उन्होंने ऋषिकेश को वैश्विक आध्यात्म का केंद्र बताया और स्वामी चिदानंद को सामूहिम कन्या विवाह कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण दिया. जानें पूरा डिटेल.;
गंगा की अविरल धारा, वेद मंत्रों की गूंज और संत परंपरा की गरिमा के बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उत्तराखंड के परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश पहुंचे. यहां उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से आत्मीय भेंट कर उन्हें कन्या विवाह महोत्सव का निमंत्रण दिया. इस अवसर पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा - “ऋषिकेश केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है.”
दुनिया को भटकाव से मुक्ति दिला सकता है ऋषिकेश
धीरेंद्र शास्त्री का परमार्थ निकेतन पहुंचने पर वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक स्वागत किया गया. गंगा तट पर स्थित इस प्रतिष्ठित आश्रम में स्वामी चिदानंद सरस्वती के साथ उनकी लंबी आध्यात्मिक चर्चा हुई. उन्होंने ‘ऋषिकेश विश्व आध्यात्म की राजधानी’ बताया. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “ऋषिकेश वह भूमि है जहां योग, ध्यान और सनातन चेतना एक साथ बहती है. यहां आने से आत्मा को शांति और दिशा मिलती है.” उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया भटकाव में है, तब भारत और ऋषिकेश वैश्विक मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं.
कन्या विवाह महोत्सव का निमंत्रण
इस अवसर पर धीरेंद्र शास्त्री ने स्वामी चिदानंद सरस्वती को बागेश्वर धाम में आयोजित होने वाले कन्या विवाह कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि कन्या विवाह जैसे आयोजन सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण हैं. साथ ही कहा कि श्रीराम भारत के प्राण हैं, मर्यादा, करुणा, धर्म और राष्ट्रभक्ति के शाश्वत प्रतीक हैं. श्रीराम लला प्रतिष्ठा का यह दिन देशवासियों के जीवन में सद्भाव, एकता और नैतिक बल को और अधिक सुदृढ़ करेगा. आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्वामी चिदानंद सरस्वती को चलता-फिरता तीर्थ भी बताया.
सेवा, पर्यावरण और सनातन संवाद
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भी इस भेंट को सनातन मूल्यों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया. दोनों संतों ने पर्यावरण संरक्षण, गंगा स्वच्छता, युवाओं में आध्यात्मिक चेतना जैसे विषयों पर विचार साझा किए. उन्होंने स्वामी चिदानन्द सरस्वती को श्रीराम लला प्रतिष्ठा-2026 की देशवासियों को शुभकामनाएं दी. स्वामी चिदानन्द सरस्वती और आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री ने वेदमंत्रों के साथ गंगा पूजन भी किया.
आस्था ही भारत की शक्ति
इस संत समागम को धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. यह मुलाकात बताती है कि आधुनिक भारत में भी परंपरा और सेवा एक साथ आगे बढ़ सकती हैं.
कन्या विवाह करुणा का जीवंत उदाहरण
वहीं, स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि सामूहिक कन्या विवाह जैसे आयोजन सनातन संस्कृति की सामाजिक संवेदनशीलता और करुणा का जीवंत उदाहरण हैं. उन्होंने कहा कि यह आयोजन निश्चित रूप से निर्धन परिवारों की बेटियों को सम्मान और सुरक्षा देता है. साथ ही समाज में समरसता और सहयोग की भावना को भी सशक्त करेगा। उन्होंने बागेश्वर धाम कैंसर अस्पताल, मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रगति के विषय में विस्तार से जानकारी ली. आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अस्पताल की वर्तमान स्थिति, भावी योजनाओं और सेवा-उद्देश्य से अवगत कराया?