नमाज पढ़ने के लिए मजबूर, जबरन टॉयलेट साफ करवाना; 8वीं कक्षा के छात्रों ने कैसे खोली प्रिंसिपल की पोल?

देहरादून में एक स्कूल के प्रिंसिपल पर कक्षा 8 के छात्रों के साथ कथित तौर पर जबरन धार्मिक गतिविधियां करवाने और अनुचित कार्य करने के आरोप लगे हैं.

Dehradun School

(Image Source:  AI: Sora )
Edited By :  विशाल पुंडीर
Updated On :

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक स्कूल के प्रिंसिपल पर कक्षा 8 के छात्रों के साथ कथित तौर पर जबरन धार्मिक गतिविधियां करवाने और अनुचित कार्य करने के आरोप लगे हैं.

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्रों ने खुद आगे आकर बाल आयोग को पत्र लिखकर अपनी आपबीती साझा की. बच्चों की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.

छात्रों ने चिट्ठी में क्या लिखा?

जानकारी के अनुसार, स्कूल के कक्षा 8 के छात्रों ने सामूहिक रूप से बाल अधिकार संरक्षण आयोग को पत्र लिखकर प्रिंसिपल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. इस पत्र में छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे स्कूल में शौचालय साफ करवाने जैसे कार्य भी कराए गए, जो न केवल अनुचित हैं बल्कि बाल अधिकारों का उल्लंघन भी है.

क्या हैं आरोप?

1. जबरन नमाज पढ़ने के लिए दबाव

2. स्कूल परिसर में टॉयलेट साफ करवाना

3. मानसिक दबाव और डर का माहौल बनाना

प्रशासन ने क्या की कार्रवाई?

मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन हरकत में आ गया है. अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित स्कूल प्रशासन से जवाब तलब किया गया है. बाल आयोग ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं.

यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है. बच्चों को जबरन किसी धार्मिक गतिविधि में शामिल करना और उनसे सफाई जैसे काम करवाना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है.

आगे क्या कार्रवाई?

सूत्रों के अनुसार, जांच के आधार पर दोषी पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल, अधिकारियों ने सभी पक्षों से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है.

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